प्रशांत किशोर का बिहार विधान परिषद चुनाव पर आह्वान: 'चार वर्षों का हिसाब लेने का अवसर'
सारांश
मुख्य बातें
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 30 सितंबर 2026 को मुजफ्फरपुर में पत्रकारों से बात करते हुए बिहार के आगामी विधान परिषद चुनाव को लेकर मतदाताओं से जवाबदेही-आधारित मतदान की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह चुनाव महज सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं, बल्कि मौजूदा सरकार को अगले चार वर्षों के लिए जवाबदेह ठहराने का अवसर है।
चुनाव को जवाबदेही का मंच बताया
किशोर ने कहा कि मतदाताओं का वोट सरकार की गलत नीतियों और कमियों पर अंकुश लगाने का हथियार होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार में दशकों से लोग डर और जातीय समीकरणों के आधार पर मतदान करते रहे हैं — कभी लालू प्रसाद यादव के डर से भारतीय जनता पार्टी (BJP) को, तो कभी BJP के डर से लालू के पक्ष में। उनके अनुसार, इस राजनीतिक चक्र में शिक्षकों को न अपेक्षित सम्मान मिला, न उचित वेतन।
पलायन और बेरोज़गारी का मुद्दा
किशोर ने दावा किया कि आज भी बिहार के एक करोड़ से अधिक युवा महज ₹10,000 से ₹15,000 मासिक मज़दूरी के लिए दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में युवा रोज़गार का मुद्दा लगातार राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहा है। उन्होंने शिक्षित मतदाताओं — विशेषकर शिक्षकों और स्नातकों — से अपील की कि वे मुद्दों और जवाबदेही को ध्यान में रखकर मतदान करें।
BJP को नुकसान का दावा
किशोर ने यह भी दावा किया कि आगामी विधान परिषद चुनाव में BJP को नुकसान उठाना पड़ेगा। उनके अनुसार, जो मतदाता पहले मुफ्त राशन और जातीय गणित के आधार पर मतदान करते थे, वे अब नए राजनीतिक विकल्प पर विचार कर रहे हैं। गौरतलब है कि किशोर का यह बयान उनके पार्टी उम्मीदवारों की घोषणा के साथ आया है, जो इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा भी बनाता है।
जन सुराज के उम्मीदवार घोषित
जन सुराज पार्टी ने विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से श्याम नंदन यादव और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. बी. मोहन को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। किशोर ने बताया कि श्याम नंदन यादव कारगिल शहीद प्रमोद यादव के भाई हैं और शिक्षण संस्थानों से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। डॉ. बी. मोहन समाज में एक चिकित्सक के रूप में जाने जाते हैं।
बिहार विधान परिषद की पृष्ठभूमि
बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले इस चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज हो गई हैं। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र परंपरागत रूप से शिक्षित और पेशेवर मतदाताओं के लिए अलग प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करते हैं। जन सुराज जैसी नई पार्टी का इन सीटों पर उतरना इस चुनाव को और प्रतिस्पर्धी बनाता है। किशोर का यह कदम दर्शाता है कि वे परंपरागत जाति-आधारित राजनीति को चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।