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प्रशांत किशोर की सरकार को चेतावनी: युवाओं का गुस्सा हल्के में न लें, चुनाव सुधार नहीं तो आंदोलन जारी रहेगा

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प्रशांत किशोर की सरकार को चेतावनी: युवाओं का गुस्सा हल्के में न लें, चुनाव सुधार नहीं तो आंदोलन जारी रहेगा

सारांश

प्रशांत किशोर का कहना है — यह आंदोलन सिर्फ शुरुआत है। चुनाव आयोग की कार्यशैली, बेरोज़गारी और पेपर लीक से उबल रहे युवाओं को हल्के में लेना सरकार के लिए भारी पड़ सकता है। जंतर-मंतर के बाद दिल्ली में 40,000 सुरक्षाकर्मी — फिर भी असंतोष थमने का नाम नहीं ले रहा।

मुख्य बातें

प्रशांत किशोर ने 10 अक्टूबर 2026 को सरकार को चेताया कि युवाओं के आंदोलन को हल्के में न लें।
उन्होंने चुनाव आयोग (ECI) की कार्यशैली — फॉर्म-6, फॉर्म-7 बदलाव, एसआईआर, मतगणना पारदर्शिता — पर सवाल उठाए।
बिहार में चुनाव से दो दिन पहले तक ₹10,000 में वोट खरीदने का आरोप लगाया (स्वतंत्र सत्यापन बाकी)।
दिल्ली प्रदर्शन के दौरान लगभग 40,000 सुरक्षाकर्मी तैनात होने का दावा।
बेरोज़गारी, शिक्षा और पेपर लीक को युवा असंतोष की मूल वजह बताया।
व्यापक एवं पारदर्शी चुनाव सुधार न होने तक विरोध-प्रदर्शन जारी रहने की चेतावनी।

जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 10 अक्टूबर 2026 को सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि बेरोज़गारी, शिक्षा-व्यवस्था की खामियों और पेपर लीक से उपजे युवाओं के असंतोष को नज़रअंदाज़ करना महँगा पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा आंदोलन केवल शुरुआत है और जब तक चुनाव आयोग (ECI) तथा चुनाव प्रक्रिया में व्यापक एवं पारदर्शी सुधार नहीं होते, विरोध-प्रदर्शन थमने के आसार नहीं हैं।

चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

किशोर ने आरोप लगाया कि पिछले 8 से 10 वर्षों में समाज के एक बड़े वर्ग का चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा लगातार घटा है। उनके अनुसार, नए मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 और मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 में किए गए बदलाव संदेह के दायरे में हैं। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के इस्तेमाल, चुनाव तिथियों की घोषणा की प्रक्रिया, आचार संहिता लागू करने के तरीके, पर्यवेक्षकों की नियुक्ति और मतगणना की पारदर्शिता — सभी पर सवाल खड़े किए।

किशोर ने स्पष्ट किया कि ये चिंताएँ किसी एक व्यक्ति या पार्टी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह व्यापक जन-भावना का प्रतिबिंब है।

बिहार चुनाव में वोट खरीद के आरोप

किशोर ने बिहार का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि चुनाव से दो दिन पहले तक मतदाताओं को ₹10,000 देकर वोट खरीदने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव के दौरान जन सुराज के कार्यकर्ताओं को पकड़कर विरोधी पक्ष को प्रभावित किया गया। ये आरोप अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।

दिल्ली में सुरक्षा-बल की तैनाती

दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन का हवाला देते हुए किशोर ने दावा किया कि सड़कों पर करीब 40,000 पुलिसकर्मी, अर्धसैनिक बल और अन्य सुरक्षा बल तैनात हैं। उन्होंने इसे सरकार की 'घबराहट' का संकेत बताया और कहा कि इतने बड़े सुरक्षा-तंत्र के बावजूद युवाओं की नाराज़गी को दबाया नहीं जा सकता। गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर इससे पहले हुए प्रदर्शन के बाद भी युवाओं का आक्रोश थमा नहीं है।

युवाओं के असंतोष की जड़ें

किशोर के अनुसार युवाओं का गुस्सा केवल चुनावी अनियमितताओं तक सीमित नहीं है। बेरोज़गारी, शिक्षा-व्यवस्था में खामियाँ और पेपर लीक की बार-बार होने वाली घटनाएँ इस असंतोष को और गहरा कर रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में धाँधली के मामले लगातार सामने आते रहे हैं।

आगे क्या होगा

किशोर ने स्पष्ट किया कि जब तक चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया में ठोस एवं पारदर्शी सुधार नहीं किए जाते, तब तक विरोध-प्रदर्शनों को रोकना आसान नहीं होगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि युवाओं के इस संगठित आक्रोश को राजनीतिक चश्मे से देखने की बजाय गंभीरता से लिया जाए, अन्यथा यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती यह बताती है कि प्रशासन आंदोलन की गंभीरता को समझता है, लेकिन संवाद की बजाय बल-प्रयोग की भाषा को तरजीह दे रहा है। बिहार में वोट खरीद के आरोप अभी तक सत्यापित नहीं हैं, इसलिए उन्हें दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए — लेकिन चुनाव प्रक्रिया में जन-विश्वास का क्षरण एक वास्तविक और दीर्घकालिक संस्थागत संकट है, जिसे महज़ सुरक्षा-तंत्र से नहीं टाला जा सकता।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 और फॉर्म-7 में बदलाव, एसआईआर के ज़रिए नाम हटाने की प्रक्रिया, चुनाव तिथियों की घोषणा, आचार संहिता लागू करने और मतगणना की पारदर्शिता — सभी पर गंभीर सवाल हैं। उनके अनुसार पिछले 8 से 10 वर्षों में बड़े तबके का चुनाव आयोग पर भरोसा कमज़ोर हुआ है।
जन सुराज का यह आंदोलन किन मुद्दों पर है?
जन सुराज का आंदोलन मुख्यतः चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, बेरोज़गारी, शिक्षा-व्यवस्था की खामियों और पेपर लीक की घटनाओं के विरोध में है। प्रशांत किशोर ने कहा है कि युवाओं का असंतोष इन सभी मुद्दों के संयुक्त प्रभाव का नतीजा है।
क्या बिहार में वोट खरीद के आरोप सिद्ध हुए हैं?
अभी तक ये आरोप स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं। प्रशांत किशोर ने दावा किया है कि चुनाव से दो दिन पहले तक ₹10,000 देकर वोट खरीदने की कोशिश की गई, लेकिन इस पर चुनाव आयोग या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कितने सुरक्षाकर्मी तैनात हैं?
प्रशांत किशोर के दावे के अनुसार दिल्ली की सड़कों पर करीब 40,000 पुलिसकर्मी, अर्धसैनिक बल और अन्य सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। उन्होंने इसे सरकार की आंदोलन के प्रति चिंता का प्रमाण बताया।
प्रशांत किशोर के अनुसार आंदोलन कब थमेगा?
किशोर ने कहा है कि जब तक चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया में व्यापक एवं पारदर्शी सुधार नहीं किए जाते, तब तक विरोध-प्रदर्शन जारी रह सकते हैं। उन्होंने इस आंदोलन को केवल शुरुआत बताया और कहा कि इसे रोकना आसान नहीं होगा।
राष्ट्र प्रेस
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