प्रशांत किशोर की सरकार को चेतावनी: युवाओं का गुस्सा हल्के में न लें, चुनाव सुधार नहीं तो आंदोलन जारी रहेगा
सारांश
मुख्य बातें
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 10 अक्टूबर 2026 को सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि बेरोज़गारी, शिक्षा-व्यवस्था की खामियों और पेपर लीक से उपजे युवाओं के असंतोष को नज़रअंदाज़ करना महँगा पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा आंदोलन केवल शुरुआत है और जब तक चुनाव आयोग (ECI) तथा चुनाव प्रक्रिया में व्यापक एवं पारदर्शी सुधार नहीं होते, विरोध-प्रदर्शन थमने के आसार नहीं हैं।
चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
किशोर ने आरोप लगाया कि पिछले 8 से 10 वर्षों में समाज के एक बड़े वर्ग का चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा लगातार घटा है। उनके अनुसार, नए मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 और मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 में किए गए बदलाव संदेह के दायरे में हैं। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के इस्तेमाल, चुनाव तिथियों की घोषणा की प्रक्रिया, आचार संहिता लागू करने के तरीके, पर्यवेक्षकों की नियुक्ति और मतगणना की पारदर्शिता — सभी पर सवाल खड़े किए।
किशोर ने स्पष्ट किया कि ये चिंताएँ किसी एक व्यक्ति या पार्टी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह व्यापक जन-भावना का प्रतिबिंब है।
बिहार चुनाव में वोट खरीद के आरोप
किशोर ने बिहार का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि चुनाव से दो दिन पहले तक मतदाताओं को ₹10,000 देकर वोट खरीदने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव के दौरान जन सुराज के कार्यकर्ताओं को पकड़कर विरोधी पक्ष को प्रभावित किया गया। ये आरोप अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
दिल्ली में सुरक्षा-बल की तैनाती
दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन का हवाला देते हुए किशोर ने दावा किया कि सड़कों पर करीब 40,000 पुलिसकर्मी, अर्धसैनिक बल और अन्य सुरक्षा बल तैनात हैं। उन्होंने इसे सरकार की 'घबराहट' का संकेत बताया और कहा कि इतने बड़े सुरक्षा-तंत्र के बावजूद युवाओं की नाराज़गी को दबाया नहीं जा सकता। गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर इससे पहले हुए प्रदर्शन के बाद भी युवाओं का आक्रोश थमा नहीं है।
युवाओं के असंतोष की जड़ें
किशोर के अनुसार युवाओं का गुस्सा केवल चुनावी अनियमितताओं तक सीमित नहीं है। बेरोज़गारी, शिक्षा-व्यवस्था में खामियाँ और पेपर लीक की बार-बार होने वाली घटनाएँ इस असंतोष को और गहरा कर रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में धाँधली के मामले लगातार सामने आते रहे हैं।
आगे क्या होगा
किशोर ने स्पष्ट किया कि जब तक चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया में ठोस एवं पारदर्शी सुधार नहीं किए जाते, तब तक विरोध-प्रदर्शनों को रोकना आसान नहीं होगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि युवाओं के इस संगठित आक्रोश को राजनीतिक चश्मे से देखने की बजाय गंभीरता से लिया जाए, अन्यथा यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।