प्रतिभा पारकर पनामा में भारत की अगली राजदूत नियुक्त, IFS बैच 2000 की वरिष्ठ अधिकारी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय विदेश सेवा (IFS) की वरिष्ठ अधिकारी प्रतिभा पारकर को 14 मई 2026 को पनामा गणराज्य में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, वर्तमान में वह मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं और शीघ्र ही अपना नया कार्यभार संभालेंगी। IFS बैच 2000 की इस अनुभवी राजनयिक का कूटनीतिक करियर दो दशकों से अधिक का है।
राजनयिक करियर की शुरुआत
प्रतिभा पारकर ने अपनी विदेश सेवा की शुरुआत रूस स्थित भारतीय दूतावास से की थी। इसके बाद उन्होंने इंडोनेशिया में प्रथम सचिव के रूप में दायित्व निभाया। 2006 से 2008 के बीच उन्होंने विदेश मंत्रालय में म्यांमार डेस्क की कूटनीतिक जिम्मेदारियाँ संभालीं।
बहुआयामी अंतरराष्ट्रीय अनुभव
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में उन्होंने काउंसलर के रूप में कार्य किया। 2014 से 2017 तक उन्होंने विदेश मंत्रालय में बांग्लादेश और म्यांमार (BM) डिवीजन की निदेशक के रूप में उच्च-स्तरीय राजकीय यात्राओं और सीमा नीति के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2017 से 2020 तक वह फ्रैंकफर्ट में भारत की महावाणिज्य दूत रहीं, जहाँ उन्होंने जर्मनी में भारतीय कूटनीतिक, आर्थिक और प्रवासी हितों का प्रबंधन किया। इस दौरान उन्होंने KfW डेवलपमेंट बैंक जैसे प्रमुख वित्तीय संस्थानों के साथ सहयोग का नेतृत्व भी किया।
अंगोला में राजदूत का कार्यकाल
27 मई 2020 को प्रतिभा पारकर को अंगोला में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया था। 2020 से 2023 तक के इस कार्यकाल में उनका मुख्य फोकस ऊर्जा संसाधन और दक्षिण-दक्षिण विकास सहयोग पर रहा। 2023 से 2026 तक वह विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में कार्यरत रहीं।
शैक्षणिक और प्रशिक्षण पृष्ठभूमि
प्रतिभा पारकर ने मुंबई विश्वविद्यालय से इतिहास विषय में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। 2000 में सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन सर्विस (SSIFS) में कूटनीतिक, प्रशासनिक और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का आवश्यक प्रशिक्षण लिया।
शिक्षा और सांस्कृतिक कूटनीति में योगदान
अपनी विभिन्न विदेशी तैनातियों के दौरान उन्होंने उच्च शिक्षा बोर्डों और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थाओं के साथ सक्रिय रूप से कार्य करते हुए छात्र आदान-प्रदान और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा दिया। पनामा में उनकी नियुक्ति मध्य अमेरिका में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।