नेहरू की प्रधानमंत्री बनने की जल्दी, एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक में बदलाव पर प्रतुल शाहदेव की टिप्पणी
सारांश
Key Takeaways
रांची, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने एनसीईआरटी की कक्षा ८ की पाठ्यपुस्तक में विभाजन वाले अध्याय पर टिप्पणी करते हुए कहा, "यह एक ऐतिहासिक तथ्य है। उस समय, कांग्रेस नेताओं ने भारत के बंटवारे पर चर्चा को दबा दिया था। बंटवारे का प्रस्ताव कांग्रेस नेतृत्व में पारित हुआ था। कहा जाता है कि महात्मा गांधी ने इसका विरोध किया था, लेकिन अंततः उनके विचारों को नजरअंदाज कर दिया गया।"
उन्होंने आगे बताया कि जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनने की इतनी हड़बड़ी थी कि वे अंतरिम पीएम बने, जबकि उन्हें शून्य वोट मिले थे और सरदार पटेल को १२ वोट मिले थे। उन्होंने पीएम बनने के लिए भारत का बंटवारा करा दिया। कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को अधिशेष में पारित किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शाहदेव ने राष्ट्र प्रेस से कहा कि उनका कहना था कि पाकिस्तान के पीएम को जान का खतरा था। यह एक बड़ा सवाल है कि पाकिस्तान में किसकी जान को खतरा था। अमेरिका के राष्ट्रपति यह बता रहे हैं कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की जान असुरक्षित थी। पाकिस्तान को इसे समझना चाहिए।
प्रतुल शाहदेव ने केरल का नाम बदलने के मुद्दे पर कहा, "केरल का पुराना नाम केरलम था, इसलिए इसमें कोई समस्या नहीं है। सभी राजनीतिक दलों ने केरल नाम को स्वीकार कर लिया है। हम पुरानी गलतियों को सुधार रहे हैं। ममता बनर्जी को याद रखना चाहिए कि जब यूपीए सरकार थी, तो उन्होंने पहली बार पश्चिम बंगाल का नाम बांग्ला रखने का प्रस्ताव भेजा था। उस समय विदेश मंत्री ने कहा था कि बांग्ला बांग्लादेश के नाम जैसा है, इसलिए ऐसा करना मुश्किल होगा। उस समय ममता बनर्जी मुश्किल में थीं।
उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज एफआईआर के बाद जांच तेज होने पर आरोप लगाया कि कांग्रेस न्यायिक प्रक्रिया पर अनावश्यक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है, जो उचित नहीं है।
झारखंड के चतरा में हुए एयर एम्बुलेंस हादसे पर उन्होंने कहा कि दुर्घटना की जांच में ब्लैक बॉक्स बरामद हो गया है और डीजीसीए की टीम मामले का अध्ययन कर रही है। दुर्घटना से पहले विमान की ओर से कोई एसओएस सिग्नल नहीं मिला था। यह एक अत्यंत दुखद घटना है, क्योंकि इलाज के दौरान किसी की जान जाना बहुत पीड़ादायक होता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था कमजोर होने के कारण मरीजों को दिल्ली जैसे शहरों की ओर जाना पड़ता है। बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन मौतें रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते। राज्य सरकार ने अभी तक मुआवजे की घोषणा नहीं की है, जबकि स्वास्थ्य मंत्री ने केवल सरकारी प्रावधानों के अनुसार सहायता देने की बात कही है।
भाजपा प्रवक्ता ने असम में एक महिला के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यह घटना बेहद चिंताजनक है। पीड़िता के खाते से १० हजार रुपए भी ट्रांसफर किए गए और इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। असम पुलिस न्याय दिलाने के लिए बहुत सक्षम है।