क्या प्रौद्योगिकी का असली उद्देश्य केवल प्रगति नहीं, बल्कि उद्देश्यपूर्ण प्रगति है?
सारांश
Key Takeaways
- प्रौद्योगिकी का उद्देश्य केवल प्रगति नहीं, बल्कि उद्देश्यपूर्ण प्रगति है।
- कुरुक्षेत्र की पवित्रता और धर्म की विजय का महत्व।
- एनआईटी कुरुक्षेत्र ने 64 पेटेंट प्राप्त किए हैं।
- छात्रों को नवाचार और अनुसंधान के लिए प्रेरित किया गया।
- आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कम लागत वाली तकनीकों पर अनुसंधान।
कुरुक्षेत्र, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार को हरियाणा के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), कुरुक्षेत्र के 20वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने भारत के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में से एक के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होने पर गौरवान्वित होने की भावना व्यक्त की।
उपराष्ट्रपति ने एनआईटी कुरुक्षेत्र की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह एक समृद्ध विरासत, जीवंत वर्तमान और भविष्य वाला संस्थान है जो देश में तकनीकी शिक्षा के मानकों को आकार दे रहा है।
उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र एक पवित्र भूमि है जो हमें याद दिलाती है कि अधर्म पर धर्म की हमेशा विजय होती है, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल एक समारोह नहीं, बल्कि एक ऐसा क्षण होता है जब वर्षों का समर्पण गर्व, आशा और अवसर से भरी एक नई शुरुआत में बदल जाता है।
इस दौरान उन्होंने एआई, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और अर्धचालकों के क्षेत्र में विकास के बारे में भी चर्चा की।
उन्हें इस बात पर जोर दिया कि प्रौद्योगिकी उद्योगों को नया रूप देने और समाज के कामकाज के तरीके को पुनर्परिभाषित करने में बड़ी भूमिका निभा रही है। उन्होंने छात्रों से जिम्मेदारी से नवाचार करने का आग्रह किया और कहा कि प्रौद्योगिकी का असली उद्देश्य केवल प्रगति नहीं, बल्कि उद्देश्यपूर्ण प्रगति है।
उन्होंने छात्रों को अनुसंधान, नवाचार और भारत-विशिष्ट समस्या-समाधान में गहराई से उतरने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि ये दोनों इंजन भारत के तकनीकी नेतृत्व को गति देंगे। उन्होंने युवा नवप्रवर्तकों के लिए राष्ट्रीय महत्व के उभरते क्षेत्रों, जैसे टिकाऊ विनिर्माण, स्मार्ट मोबिलिटी, क्वांटम प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी, कृषि नवाचार और हरित बुनियादी ढांचे का अन्वेषण करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उपराष्ट्रपति ने 2047 के विकासशील भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण का वर्णन करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि एनआईटी कुरुक्षेत्र के स्नातक इस लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान को अब तक 64 पेटेंट प्राप्त हो चुके हैं, जो अनुसंधान, नवाचार और बौद्धिक संपदा सृजन की इसकी सशक्त संस्कृति को दर्शाता है।
उन्होंने डीआरडीओ और इसरो के सहयोग से एआई-आधारित युद्ध, रक्षा अनुसंधान और चंद्रयान तथा मार्स ऑर्बिटर मिशन जैसे अंतरिक्ष अभियानों में उन्नत तकनीकों में संस्थान के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। उन्होंने गांवों और मलिन बस्तियों में जीवन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कम लागत वाली, स्वदेशी तकनीकों पर अनुसंधान के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत की दिशा में संस्थान के प्रयासों की भी सराहना की।
इस अवसर पर हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, एनआईटी कुरुक्षेत्र के निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी, एनआईटी कुरुक्षेत्र के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अध्यक्ष डॉ. तेजस्विनी अनंत कुमार और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।