प्रियंका चतुर्वेदी: लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी होनी चाहिए निष्पक्ष, अविश्वास प्रस्ताव आवश्यक
सारांश
Key Takeaways
- लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी की निष्पक्षता महत्वपूर्ण है।
- अविस्वास प्रस्ताव लाना एक संसदीय प्रक्रिया है।
- विपक्ष ने सत्ताधारी दल के पक्षपाती व्यवहार का आरोप लगाया है।
- अविस्वास प्रस्ताव राजनीतिक रूप से प्रतीकात्मक है।
- कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त है।
नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष एकजुटता से खड़ा है। शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "अध्यक्ष की कुर्सी निष्पक्ष होनी चाहिए, जो सत्ताधारी और विपक्ष दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।"
उन्होंने आगे कहा, "जब कुर्सी के संतुलन पर सवाल उठता है, तो संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं के तहत विपक्ष के लिए अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना बेहद आवश्यक हो जाता है। इससे बहस को जन्म दिया जा सकता है, जिसके बाद मतदान होगा। नियमों के अनुसार चर्चा आरंभ होगी। भले ही विपक्ष मतदान में जीत न सके, लेकिन अध्यक्ष के अधिकार पर सवाल उठाकर एक सशक्त संदेश दिया गया है।"
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और तेल आपूर्ति के मुद्दे पर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, "मैं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की टिप्पणियों को खारिज करती हूं। ऐसा प्रतीत होता है कि वे मानते हैं कि सभी देश उनके उपनिवेश हैं। उनका मानना है कि शक्तिशाली राष्ट्र जब चाहें, अन्य देशों की राष्ट्रीय संप्रभुता और निर्णयों को दरकिनार कर सकते हैं। हाल ही में ट्रंप ने भारत को शर्तों पर तेल खरीदने की अनुमति दी थी।"
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और निर्णय होने तक सदन की कार्यवाही में शामिल न होने का निर्णय लिया है। विपक्षी दल लगातार आरोप लगा रहे हैं कि ओम बिरला सदन की कार्यवाही को निष्पक्ष तरीके से नहीं चला रहे हैं और सत्ताधारी दल के पक्ष में उनका झुकाव स्पष्ट है।
हालांकि, लोकसभा में संख्या बल को देखते हुए इस अविश्वास प्रस्ताव को राजनीतिक दृष्टि से ज्यादातर प्रतीकात्मक माना जा रहा है, क्योंकि इसके पारित होने की संभावना बहुत कम है।
कांग्रेस के अनुसार, अविश्वास प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस के साथ समाजवादी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) समेत कई विपक्षी दलों ने इसका समर्थन किया है। अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया है कि लोकसभा अध्यक्ष ने बार-बार उन्हें सदन में जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने का अवसर नहीं दिया।