परगट सिंह का बड़ा आरोप: एंटी-ड्रोन सिस्टम 'बाज अख' पर तैनात पंजाब पुलिस सिपाही ही निकला हेरोइन तस्कर, 15 किलो बरामद
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह ने 15 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस का एक सिपाही — जो सीमा पार ड्रोन-आधारित तस्करी रोकने के लिए तैनात 'बाज अख' एंटी-ड्रोन सिस्टम पर ड्यूटी कर रहा था — खुद 15 किलो हेरोइन की तस्करी करते हुए पकड़ा गया है। इस घटना ने मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार के नशा-विरोधी अभियान 'युद्ध नशे विरुद्ध' की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परगट सिंह का आरोप: क्या कहा एक्स पर
परगट सिंह ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा — 'युद्ध नशे विरुद्ध' के नाम पर क्या मजाक है। उन्होंने पंजाबी ट्रिब्यून की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सीमा पार ड्रग तस्करी को रोकने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम पर तैनात पुलिसकर्मी के पास से 15 किलो हेरोइन बरामद हुई है। परगट ने आगे आरोप लगाया कि जब नशा रोकने की जिम्मेदारी वाले लोग ही तस्करी करते पकड़े जाएं, तो पंजाब के ड्रग माफिया को मिल रहे राजनीतिक और पुलिस संरक्षण पर संदेह स्वाभाविक है।
'बाज अख' एंटी-ड्रोन सिस्टम: क्या है यह तकनीक
पंजाब सरकार ने पाकिस्तान-पंजाब अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन के ज़रिए हो रही हथियारों और नशे की तस्करी रोकने के लिए 'बाज अख' (पंजाबी में अर्थ: ईगल आई) नामक एंटी-ड्रोन प्रणाली तैनात की है। मई 2026 में सरकार ने इसकी कई यूनिट्स को मंजूरी दी थी और मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में तरनतारन सहित सीमावर्ती ज़िलों में इसे सक्रिय किया गया है।
यह सिस्टम 8 से 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले ड्रोन्स का पता लगाने, उनकी रियल-टाइम ट्रैकिंग करने, उन्हें जाम करने और निष्क्रिय करने में सक्षम है। इसे प्रदेश की सीमा-सुरक्षा रणनीति का अहम स्तंभ बताया गया था।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और राजनीतिक हमला
पंजाब की विपक्षी पार्टियों — विशेषकर कांग्रेस (INC) — का कहना है कि इसी सुरक्षा तंत्र पर तैनात जवान के तस्करी में लिप्त पाए जाने की खबर ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के नशा-विरोधी अभियान की पोल खोल दी है। आलोचकों का तर्क है कि जब तंत्र के भीतर से ही सेंध लगाई जाए, तो बाहरी तकनीकी उपाय महज दिखावा बनकर रह जाते हैं।
गौरतलब है कि 'युद्ध नशे विरुद्ध' अभियान को सरकार अपनी बड़ी उपलब्धियों में गिनाती रही है, और इस घटना ने उस दावे को सीधी चुनौती दी है।
यह कोई पहला मामला नहीं
यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में पुलिसकर्मियों के नशा तस्करी में शामिल होने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसी घटनाएँ बार-बार एक गहरे संस्थागत संकट की ओर इशारा करती हैं, जिसे महज तकनीकी समाधानों से नहीं सुलझाया जा सकता। सत्यापित तथ्यों के अनुसार, गिरफ्तार सिपाही की पहचान और संबंधित विभागीय कार्रवाई के विवरण अभी सामने नहीं आए हैं।
आगे क्या होगा
इस मामले पर पंजाब सरकार और पुलिस विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतज़ार है। कांग्रेस ने मामले की उच्चस्तरीय जाँच और जिम्मेदारी तय करने की माँग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो 'बाज अख' सिस्टम की तैनाती प्रक्रिया और कर्मियों की जाँच पड़ताल में बड़े बदलाव की जरूरत पड़ेगी।