पंजाब BJP ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू की, नशा-भ्रष्टाचार-अपराध बनेंगे प्रमुख मुद्दे
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पंजाब इकाई ने 2027 पंजाब विधानसभा चुनावों की तैयारी औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। 17 अक्टूबर 2026 को संगरूर में आयोजित राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठक में पार्टी ने नशीली दवाओं, भ्रष्टाचार और अपराध को चुनावी एजेंडे के केंद्र में रखने का निर्णय लिया। यह कदम उस राज्य में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) पर सीधा राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है, जहाँ 2022 में BJP की करारी हार हुई थी।
मुख्य घटनाक्रम
पार्टी के राज्य महासचिव अनिल सरीन ने बताया कि राज्य कार्यकारिणी समिति के निर्णयों को ज़मीनी स्तर तक पहुँचाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि BJP अपने 36 संगठनात्मक जिलों में 19 अक्टूबर 2026 तक जिला-स्तरीय बैठकें आयोजित करेगी। इसके बाद 22 से 24 अक्टूबर के बीच मंडल-स्तरीय बैठकें होंगी।
सरीन के अनुसार, इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को राज्य स्तर पर तय की गई रणनीति, पारित प्रस्तावों और कार्यक्रमों से अवगत कराना है — और बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना है।
नशा और हत्याकांड पर BJP का हमला
पार्टी विधायक अश्वनी शर्मा ने मानसा में नशा-विरोधी आवाज़ बुलंद करने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान और AAP सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस हत्या ने पूरे पंजाब में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है।
शर्मा ने कहा, 'लोग अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं और जनता पंजाब सरकार, विशेषकर मुख्यमंत्री भगवंत मान से जवाब माँग रही है। हालाँकि जनता के सवालों का जवाब देने के बजाय मुख्यमंत्री फ्रांस की यात्रा पर निकल पड़े हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि इससे पता चलता है कि मुख्यमंत्री इस मामले को लेकर 'बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं।'
रणनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में BJP को महज़ 2 सीटें मिली थीं और उसे अकाली दल से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ना पड़ा था। इसी पृष्ठभूमि में पार्टी अब जमीनी संगठन को मज़बूत करने और मुद्दा-आधारित अभियान की नींव रखने में जुटी है। नशे का संकट पंजाब में वर्षों से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है और इसे हर चुनाव में प्रमुखता से उठाया जाता रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब AAP सरकार नशा-विरोधी अभियान को अपनी उपलब्धियों में गिनाती रही है। BJP के ताज़ा हमले सत्तारूढ़ पार्टी के उस दावे को कमज़ोर करने की कोशिश हैं।
आगे की राह
पार्टी की योजना है कि राज्य स्तर पर अंतिम रूप दिए गए कार्यक्रम और नीतियाँ क्रमशः जिला, मंडल और बूथ स्तर तक पहुँचाई जाएँ। इन बैठकों के ज़रिए कार्यकर्ताओं को उनकी जिम्मेदारियाँ सौंपी जाएँगी और जमीनी स्तर पर पार्टी गतिविधियों के लिए आवश्यक ढाँचा तैयार किया जाएगा। 2027 तक BJP की नज़र पंजाब में अपनी खोई ज़मीन वापस पाने पर है।