क्या पंजाब की कानून व्यवस्था, ड्रग्स और चंडीगढ़ मुद्दे पर संसद में होनी चाहिए चर्चा?
सारांश
Key Takeaways
- पंजाब में कानून व्यवस्था की स्थिति गंभीर है।
- हरसिमरत कौर ने संसद में चर्चा की मांग की है।
- ड्रग्स और हथियारों की तस्करी पर रोक लगाने की आवश्यकता है।
- संसद में सभी मुद्दों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए।
- पंजाब के बाढ़ प्रभावित मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं।
नई दिल्ली, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने रविवार को शीतकालीन सत्र को लेकर सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि संसद का सुचारू रूप से चलना आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में चर्चा अलग होती है और सत्र के दौरान माहौल कुछ और ही होता है।
हरसिमरत कौर ने कहा कि विपक्ष लोगों के मुद्दे को सही तरीके से नहीं उठा पाता और जब सरकार उन्हें रोकती है, तो ऐसा लगता है कि दोनों पक्षों में मिलीभगत है, जिसके कारण सत्र समाप्त हो जाता है।
उन्होंने आगे कहा, "मुझे 18 साल हो गए हैं, लेकिन मैंने इस तरह का छोटा सत्र पहले कभी नहीं देखा। नवंबर की जगह दिसंबर में केवल 15 दिन का शीतकालीन सत्र भी एक उदाहरण है कि इसमें से 7 दिन इसी लड़ाई में निकल जाएंगे कि हम बोलना चाहते हैं और हमें रोक दिया जाएगा।"
हरसिमरत कौर ने कहा कि गुरु तेग बहादुर की शहादत के अवसर पर सभी को 2 मिनट बोलने का मौका मिलना चाहिए। हमारे राज्य पंजाब में एक तरफ पाकिस्तान ड्रग्स, हथियार और अन्य गैरकानूनी चीजें भेज रहा है, जबकि बीएसएफ इसका रोकने में असफल है।
उन्होंने बताया कि पंजाब में कानून व्यवस्था और ड्रग्स की स्थिति गंभीर हो गई है। हाईकोर्ट ने भी इसका नोटिस लिया है और सरकार से जवाब मांगने की कार्रवाई की है। पंजाब में बाढ़ का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है।
हरसिमरत कौर ने कहा कि एसआईटी, चुनाव के दौरान अकाउंट में पैसे भेजने सहित कई मुद्दों पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने चंडीगढ़, पंजाब यूनिवर्सिटी और अन्य मुद्दों पर चर्चा की आवश्यकता जताई और पूछा कि पंजाब से दुश्मनी क्यों निकाली जा रही है। हमें इसका जवाब चाहिए।