30 जुलाई 2026
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क्या पुतिन से विपक्ष को नहीं मिलने देना देश की परंपरा पर भारी चोट है?

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क्या पुतिन से विपक्ष को नहीं मिलने देना देश की परंपरा पर भारी चोट है?

सारांश

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने रूस के प्रधानमंत्री पुतिन से विपक्षी नेताओं की मुलाकात न कराने पर सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे हमारे देश की परंपरा पर एक गंभीर आघात बताया है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया।

मुख्य बातें

पुतिन की यात्रा पर विपक्षी नेताओं से मुलाकात न होना एक विवादित मुद्दा है।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने इसे परंपरा पर चोट बताया है।
संसद में राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाया है।

मुर्शिदाबाद, 6 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। रूस के प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन की दो दिवसीय यात्रा के दौरान विपक्षी नेताओं से उनकी मुलाकात नहीं कराने पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने सरकार की कड़ी आलोचना की।

अधीर रंजन चौधरी ने कहा, "ऐसा नहीं होना चाहिए था, लेकिन हो रहा है। राहुल गांधी के साथ पुतिन साहब की मुलाकात का इंतजाम सरकार को करना चाहिए था, क्योंकि यह हमारी परंपरा है, जो आजादी के बाद से होती आ रही है।"

भारत दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन को रूसी भाषा में अनुवादित 'गीता' भेंट की। इस पर अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कहा, "पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को गीता भेंट की। पुतिन साहब भी मोदी को बाइबल भेंट कर सकते हैं, अगर पीएम मोदी पढ़ें तो। पीएम मोदी के गीता देने पर हम कोई आपत्ति नहीं जताते हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "आपत्ति जताने का सिर्फ एक कारण है कि हमारे देश में विपक्षी नेताओं को सम्मान देने की परंपरा रही है, जो अब नजर नहीं आ रही है। अगर कोई विदेशी मेहमान आए तो वह विपक्षी नेता के साथ मुलाकात और बातचीत करते हैं, लेकिन पता नहीं क्यों ऐसा नहीं हो रहा कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन की राहुल गांधी के साथ मुलाकात नहीं हो सकी। यह हमारे देश की परंपरा पर एक गहरी चोट है।"

गुरुवार को, लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने विदेशी मेहमानों से विपक्षी नेताओं के न मिलने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने विदेश से आने वाले डेलिगेट्स को कहा है कि वे विपक्ष के नेता (एलओपी) से न मिलें।

उन्होंने कहा था, "भारत के संबंध सबके साथ हैं। विपक्ष का नेता एक दूसरा परिप्रेक्ष्य देता है। भारत का हम भी प्रतिनिधित्व करते हैं। सरकार नहीं चाहती कि विपक्ष के लोग बाहर के लोगों से मिलें।"

संपादकीय दृष्टिकोण

जहां राजनीतिक परंपराएं और सम्मान की भावना झलकती हैं। जब विदेशी मेहमान आते हैं, तो ऐसे में विपक्षी नेताओं का सम्मिलित होना लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। यह हमारी परंपरा है, और इसे बनाए रखना चाहिए।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या पुतिन से विपक्ष के नेताओं की मुलाकात होनी चाहिए थी?
जी हां, विपक्ष के नेताओं का सम्मान देना हमारी परंपरा का हिस्सा है।
अधीर रंजन चौधरी ने क्या कहा?
उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह हमारी परंपरा पर चोट है।
राहुल गांधी का इस मुद्दे पर क्या कहना है?
राहुल गांधी ने कहा है कि सरकार विपक्ष के नेताओं से मिलने से रोक रही है।
राष्ट्र प्रेस
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