पुतिन को मोदी पर सर्वाधिक भरोसा, यूक्रेन शांति प्रयासों की सराहना: शाहनवाज हुसैन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता शाहनवाज हुसैन ने 2 अक्टूबर 2026 को कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सर्वाधिक भरोसा करते हैं, और यही कारण है कि पुतिन ने यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने के मोदी के प्रयासों की खुलकर सराहना की। हुसैन ने यह बयान नई दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत में दिया।
मोदी की तारीफ के पीछे क्या कारण
शाहनवाज हुसैन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पहले ऐसे वैश्विक नेता हैं जिन्होंने रूस जाकर स्पष्ट रूप से कहा था कि 'हम बुद्ध के देश से आए हैं और युद्ध के पक्ष में नहीं हैं।' उन्होंने दोनों पक्षों से संघर्ष विराम की अपील की थी।
हुसैन के अनुसार, मोदी की यह प्रेरणा और संदेश राष्ट्रपति पुतिन को अत्यंत सकारात्मक लगा। उन्होंने कहा, 'दुनिया में अगर पुतिन को सबसे ज्यादा किसी पर भरोसा है, तो वह प्रधानमंत्री मोदी हैं — इसीलिए उन्होंने यह तारीफ की।'
विपक्ष के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कथित इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्ष द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन पर हुसैन ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे 'पूरी तरह बेवजह का प्रदर्शन' करार दिया।
हुसैन ने कहा कि विपक्ष के पास न कोई ठोस काम है, न कोई वास्तविक मुद्दा। उनका तर्क था कि ईरान, अमेरिका और इज़रायल के बीच चल रहे संघर्ष से जहाँ अधिकांश देश प्रभावित हैं, वहीं भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है — और इसका श्रेय उन्होंने मोदी के वित्तीय प्रबंधन को दिया।
चुनाव आयोग पर विपक्ष की आलोचना: BJP का पलटवार
शाहनवाज हुसैन ने विपक्ष की चुनाव आयोग-विरोधी रणनीति पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और हिमाचल प्रदेश में जीतता है, तब चुनाव आयोग उन्हें 'ठीक' लगता है। पर जब वे हारते हैं, तो चुनाव आयोग और ईवीएम को दोष दिया जाता है।
उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) पर भी निशाना साधा — 'दिल्ली में हार के बाद AAP हताश है' — और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) को लेकर कहा कि वह लगातार चुनाव हारने के बाद सारा दोष चुनाव आयोग पर थोपने की कोशिश कर रही है।
आगे की राजनीतिक दिशा
हुसैन के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब भारत की कूटनीतिक सक्रियता — विशेषकर रूस-यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में — वैश्विक स्तर पर चर्चा में है। साथ ही घरेलू स्तर पर चुनाव आयोग की साख और SIR प्रक्रिया को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है। आने वाले हफ्तों में यह राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं।