क्या रायबरेली में पंकज सिंह हत्या कांड में सभी पांच अभियुक्त बरी हो गए?
सारांश
Key Takeaways
- पंकज सिंह हत्या कांड में सभी अभियुक्तों को बरी किया गया है।
- यह मामला लगभग 10 वर्षों तक चला।
- अदालत ने साक्ष्यों की कमी के आधार पर निर्णय लिया।
- अभियुक्तों की पैरवी अमिताभ त्रिपाठी और सर्वेंद्र सिंह ने की।
- इस फैसले ने न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों की अहमियत को फिर से उजागर किया।
रायबरेली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जनपद में बहुचर्चित पंकज सिंह हत्या कांड में लगभग 10 वर्ष बाद न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) द्वितीय प्रतिमा तिवारी की अदालत ने नामित सभी पांच अभियुक्तों को बाइज्जत बरी कर दिया।
कोर्ट ने अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपों को ठोस साक्ष्यों के साथ सिद्ध न कर पाने के आधार पर यह फैसला सुनाया।
यह मामला 25 जनवरी 2016 का है, जब पंकज सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। इस घटना के बाद पुलिस ने मुकुट सिंह, अभय, अंकित फास्टर, धनंजय और अजय को नामित करते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए यह केस लंबी चर्चाओं का विषय बना रहा और लगभग एक दशक तक ट्रायल चला।
ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाह पेश किए, लेकिन वे अपने बयान को पुख्ता साक्ष्यों के साथ साबित नहीं कर सके। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष कथानक साक्ष्य को पूरी तरह स्थापित करने में असफल रहा है, जिससे आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं हो सके।
अभियुक्तों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमिताभ त्रिपाठी और सर्वेंद्र सिंह उर्फ “बन्ना” ने प्रभावी पैरवी करते हुए कोर्ट के समक्ष मजबूत दलीलें पेश कीं।
उन्होंने अभियोजन की कमजोरियों, गवाहों के विरोधाभासी बयानों और साक्ष्यों के अभाव की ओर ध्यान आकर्षित किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सभी अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए बाइज्जत बरी कर दिया।
फैसले के बाद अभियुक्त पक्ष में संतोष का माहौल है, जबकि यह निर्णय एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों की अहम भूमिका को रेखांकित करता है। लंबे समय से चले इस मामले का पटाक्षेप होने से न्यायालय परिसर में भी चर्चाओं का दौर देखने को मिला।
अधिवक्ता अमिताभ त्रिपाठी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इसमें छह लोगों के नाम पर एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन जांच के दौरान ही एक व्यक्ति का नाम पुलिस ने निकाल दिया था। कोर्ट ने भी साक्ष्य न मिलने के चलते पांच लोगों को बरी कर दिया है। हम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं।
अधिवक्ता शिवेंद्र प्रताप सिंह बन्ना ने कहा कि कोर्ट ने साक्ष्य के आधार पर अपना फैसला सुनाया है। जांच में कई बातें सामने आ गई थीं, लेकिन कोर्ट के फैसले का सभी को स्वागत है।