राहुल गांधी की चुनाव आयोग याचिका में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने पाई 14 खामियाँ, सुनवाई से पहले सुधार अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित विपक्षी इंडिया गठबंधन के 11 नेताओं द्वारा भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में दायर संयुक्त याचिका में रजिस्ट्री ने 14 तकनीकी और दस्तावेजी कमियाँ चिह्नित की हैं। 12 अक्टूबर 2026 को शाम 4:37 बजे दाखिल इस याचिका को इन कमियों के निराकरण के बाद ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकेगा।
कौन-कौन सी हैं खामियाँ
सर्वोच्च न्यायालय की रजिस्ट्री ने जो प्रमुख कमियाँ दर्ज की हैं, उनमें चुनाव आयोग के अधिकारियों को नाम से प्रतिवादी बनाना, संबंधित पुराने फैसले की प्रति न संलग्न करना और 9 याचिकाकर्ताओं का वकालतनामा न होना शामिल है। इसके अतिरिक्त, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान-पत्र की धुंधली प्रति प्रस्तुत की गई और कोर्ट को ₹220 की कोर्ट फीस कम प्राप्त हुई।
रजिस्ट्री के निर्देश के अनुसार, दस्तावेजों की स्पष्ट प्रतियाँ और शेष सभी औपचारिकताएँ पूरी किए जाने के बाद ही प्रकरण को सुनवाई-सूची में स्थान मिलेगा। यह याचिका अधिवक्ता प्रसन्ना एस. की ओर से न्यायालय में दाखिल की गई थी।
याचिकाकर्ता कौन हैं
यह याचिका केवल राहुल गांधी की ओर से नहीं, बल्कि विपक्षी गठबंधन के 11 वरिष्ठ नेताओं की ओर से संयुक्त रूप से दाखिल की गई है। इनमें राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सौगत रॉय, अखिलेश यादव, तेजस्वी प्रसाद यादव, संजय राउत, एम. ए. बेबी, डी. राजा, महुआ माजी, सुप्रिया सुले और ई. टी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं।
गौरतलब है कि इस याचिका में चार पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है — पहले प्रतिवादी के रूप में भारतीय चुनाव आयोग और अन्य तीन प्रतिवादियों के रूप में आयोग के अधिकारी ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह संधू एवं विवेक जोशी को नामित किया गया है।
याचिका में क्या उठाए गए हैं मुद्दे
सूत्रों के अनुसार, याचिका में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिका की पूरी प्रति अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है, परंतु कथित तौर पर इसमें हाल के चुनावों में कथित अनियमितताओं, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विवादित पहलुओं का उल्लेख है।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों ने कई राज्यों के चुनाव परिणामों को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हैं।
आगे क्या होगा
अब याचिकाकर्ताओं की कानूनी टीम को रजिस्ट्री द्वारा चिह्नित सभी 14 कमियों को दूर करना होगा — जिसमें धुंधले दस्तावेजों को बदलना, लापता वकालतनामे जमा करना और कोर्ट फीस की शेष राशि जमा करना शामिल है। इन सुधारों के बाद ही यह मामला किसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध हो सकेगा। यह प्रकरण भारतीय न्यायिक इतिहास में चुनाव आयोग की स्वायत्तता और जवाबदेही को लेकर एक महत्त्वपूर्ण नज़ीर बन सकता है।