राहुल गांधी विदेशी टूलकिट के मोहरे, भारत को बदनाम करने विदेश जाते हैं: शाजिया इल्मी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नेता शाजिया इल्मी ने 18 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। इल्मी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी एक विदेशी टूलकिट के मोहरे हैं जो बार-बार विदेश जाकर भारत को बदनाम करने और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमज़ोर करने का प्रयास करते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव एक बार फिर तेज़ हो गया है।
इल्मी का सीधा आरोप
शाजिया इल्मी ने कहा, 'यह साफ है कि राहुल गांधी एक विदेशी टूलकिट के मोहरे हैं। वे बार-बार विदेश जाते हैं ताकि भारत का अपमान कर सकें, देश का मज़ाक उड़ा सकें और भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला कर सकें।' उन्होंने नेहा बोरा का उल्लेख करते हुए दावा किया कि राहुल गांधी ने उन्हें नेतृत्व करने के लिए आगे रखा है और वे कथित तौर पर बांग्लादेश से प्रेरित हैं। इल्मी के अनुसार, यह इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस की मंशा देश में अशांति फैलाने की है।
रिजीम चेंज की साजिश का आरोप
इल्मी ने आगे कहा कि 'रिजीम चेंज यानी तख्तापलट का विचार मिस्र, सीरिया और लीबिया जैसे देशों से आ रहा है, और इसे भारत में कतई नहीं होने दिया जाएगा।' उन्होंने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे 'घर बैठे-बैठे तख्तापलट करना चाहते हैं जिससे पूरे देश में आगजनी हो।' गौरतलब है कि BJP नेताओं द्वारा यह विदेशी हस्तक्षेप का आरोप पहली बार नहीं है — पिछले कुछ वर्षों में कई अवसरों पर कांग्रेस पर इस तरह के हमले किए गए हैं।
कपिल सिब्बल पर प्रतिक्रिया
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के बयान पर टिप्पणी करते हुए इल्मी ने कहा, 'कपिल सिब्बल एक वकील हैं, वह जानते हैं कि देश का संविधान क्या कहता है, कानून का शासन क्या है और चुनावी व्यवस्था क्या है। अगर सिर्फ उनकी ख्वाहिश है कि भाजपा चली जाए, तो ऐसा सोचने मात्र से कुछ नहीं होने वाला।' उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार बदलती है तो सिर्फ जनता के जनादेश के आधार पर।
राजनीतिक संदर्भ
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में गिना जा रहा है। इल्मी ने कहा कि 'दुनिया जानती है कि भारत आज तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, और राहुल गांधी को यह रास नहीं आता।' विपक्ष ने इन आरोपों पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आगामी चुनावी मौसम में इस तरह के बयान और तेज़ हो सकते हैं।