राहुल सिन्हा का ममता बनर्जी पर हमला: बंगाल के आदिवासी समाज से अपील
सारांश
Key Takeaways
- राहुल सिन्हा ने ममता बनर्जी की सरकार पर तीखा हमला किया।
- आदिवासी समाज के प्रति अपमान की बात कही गई।
- राष्ट्रपति शासन की मांग को लेकर जागरूकता फैलाने का आह्वान।
पश्चिम मिदनापुर, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा के नेता राहुल सिन्हा ने ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर कड़ा हमला किया है। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग कर रही है। उनकी बातों से स्पष्ट होता है कि राष्ट्रपति शासन की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सरकार एसआईआर-एसआईआर करके समय बर्बाद कर रही है। जब इस सरकार का कार्यकाल समाप्त होगा, तब स्वतः राष्ट्रपति शासन लागू हो जाएगा, जिसमें चुनाव भी होंगे, जो जनता की मांग है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मांग टीएमसी ही पूरी करेगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रति बंगाल सरकार की नाराजगी पर राहुल सिन्हा ने कहा कि ममता बनर्जी और उनकी सरकार ने राष्ट्रपति के साथ जो किया है, वह संविधान का अपमान है और बंगाल की परंपरा के खिलाफ है। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति आदिवासी समुदाय से हैं, इसलिए ममता बनर्जी उनके साथ ऐसा बर्ताव कर सकीं। ममता बनर्जी द्वारा दिए गए बयान से यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने आदिवासी समुदाय का अपमान किया है। मैं बंगाल के आदिवासी समाज से निवेदन करना चाहता हूं कि वे अपने समाज के अपमान के खिलाफ जागरूकता फैलाएं और इस सरकार को उखाड़ फेंकें।
यह ज्ञात रहे कि 9वें अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के आयोजन स्थल में बदलाव को लेकर हुए विवाद पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा था कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार ने आज प्रोटोकॉल की घोर अवहेलना करते हुए भारत के राष्ट्रपति का अपमान करके अपनी अराजकता की नई सीमा पार कर दी है।
गृह मंत्री शाह ने कहा था कि इससे टीएमसी सरकार की भ्रष्टता उजागर होती है, जो न केवल नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है, बल्कि भारत के राष्ट्रपति को भी अपने अत्याचार का शिकार बनाती है। भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान, वह भी हमारे आदिवासी भाई-बहनों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में, हमारे राष्ट्र और उन मूल्यों का अपमान है जो हमारे संवैधानिक लोकतंत्र की पहचान हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि यह शर्मनाक और अभूतपूर्व है। लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तीकरण में विश्वास रखने वाला हर व्यक्ति निराश है। स्वयं आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति द्वारा व्यक्त की गई पीड़ा और दुख ने भारत की जनता के मन में अपार दुख पैदा कर दिया है।