राजा वडिंग का पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा, बोले — 'हवा का रुख भांपकर खुद दिया, किसी ने माँगा नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को औपचारिक रूप से अपना इस्तीफा सौंपा और स्पष्ट किया कि पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ने का फैसला उनका अपना था — किसी के कहने पर नहीं। वडिंग ने कहा कि वह नहीं चाहते थे कि उनकी वजह से पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व किसी दबाव में पड़े, इसलिए उन्होंने पहल करते हुए यह कदम उठाया।
इस्तीफे की पृष्ठभूमि
राजा वडिंग ने अपने बयान में कहा, 'इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि इस्तीफा किसी ने माँगा था या मैंने अपनी मर्जी से दिया... वैसे, किसी ने मेरा इस्तीफा नहीं माँगा था।' उन्होंने एक भावपूर्ण उपमा देते हुए कहा, 'जैसे घर की बुज़ुर्ग महिलाएं हवा का रुख देखकर बता देती थीं कि बारिश होने वाली है और कपड़े भीगने से बचाने के लिए तैयारी कर लेनी चाहिए, वैसे ही मैंने भी हालात को बारीकी से समझा।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्होंने स्वयं अपने सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल में 'पूर्व' शब्द जोड़ दिया था, ताकि किसी को औपचारिक रूप से कहने की नौबत ही न आए।
सचिन पायलट और पार्टी नेताओं से दूरी
वडिंग ने बताया कि उन्होंने पंजाब प्रभारी सचिन पायलट या किसी अन्य पार्टी नेता से इस विषय पर कोई बातचीत नहीं की। हालाँकि, उन्होंने यह ज़रूर स्वीकार किया कि उन्होंने सुना है कि कथित तौर पर प्रभारी की ओर से संकेत मिले थे कि बदलाव होना चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने पायलट के सामने अपना पक्ष रखा, तो वडिंग ने कहा, 'मैं अपना पक्ष सिर्फ एक व्यक्ति के सामने रखता हूँ और वह हैं राहुल गांधी।'
चन्नी और अन्य नेताओं के दबाव का प्रश्न
पत्रकारों ने जब यह जानना चाहा कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और अन्य पंजाब कांग्रेस नेताओं के कथित दबाव के चलते यह कदम उठाया गया, तो वडिंग ने इससे सीधे इनकार नहीं किया, लेकिन कहा, 'मैं नहीं चाहता था कि मेरे नेता पर ऊपर से कोई दबाव पड़े, इसलिए मैंने उससे पहले ही इस्तीफा दे दिया।' यह बयान इस बात का संकेत देता है कि आंतरिक खींचतान की चर्चाएँ पूरी तरह निराधार नहीं थीं।
आगे की योजना
पद छोड़ने के बाद अपनी योजना के बारे में राजा वडिंग ने कहा कि फिलहाल वह गुरुद्वारे में 'सेवा' करेंगे और 'ध्यान' लगाएँगे। उन्होंने पार्टी के प्रति वफ़ादारी दोहराते हुए कहा कि पार्टी जो भी जिम्मेदारी सौंपेगी, वह उसे पूरी निष्ठा से निभाएँगे। यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब पंजाब में कांग्रेस की संगठनात्मक मज़बूती को लेकर पार्टी के भीतर बहस जारी है और नए अध्यक्ष के नाम पर चर्चाएँ तेज़ होने की संभावना है।