राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: जोधपुर, पाली, कोटा के गांवों में बहिष्कार; बीकानेर में सर्वाधिक मतदान
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान में 22 अक्टूबर 2026 को पंचायती राज संस्थाओं के पहले चरण के चुनाव में 16 जिला परिषदों और 104 पंचायत समितियों में मतदान जारी है, जिसमें 85,07,306 पंजीकृत मतदाता और 6,926 उम्मीदवार मैदान में हैं। हालाँकि परिसीमन और आरक्षण विवादों के चलते जोधपुर, पाली और कोटा के कई गाँवों में मतदाताओं ने चुनाव का बहिष्कार किया, जबकि कुछ बूथों पर ईवीएम की तकनीकी खराबी से मतदान अस्थायी रूप से बाधित रहा।
मतदान का बहिष्कार: जिलेवार स्थिति
पाली जिले में रानी पंचायत समिति के दुथरिया गाँव और सोजत पंचायत समिति के नेपावास गाँव के निवासियों ने मतदान का बहिष्कार किया। दुथरिया के ग्रामीण परिसीमन के बाद अपने गाँव के इटंद्रा मेडतियान में विलय के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि पड़ोसी गाँव तक पहुँचने के लिए वन क्षेत्र से होकर लगभग 9 किलोमीटर का घुमावदार रास्ता तय करना पड़ता है। उन्होंने अलग ग्राम पंचायत बनाने या गाँव को भदरलाऊ में पुनः शामिल करने की माँग रखी है।
नेपावास के ग्रामीण सोजत पंचायत समिति के वार्ड-1 से वार्ड-3 में स्थानांतरित किए जाने के विरोध में हैं। प्रशासन इस मुद्दे पर ग्रामीणों से बातचीत कर रहा है।
जोधपुर जिले में शेरगढ़ विधानसभा क्षेत्र के मंगल सिंह नगर ग्राम पंचायत के निवासियों ने सरपंच पद पर ओबीसी आरक्षण के विरोध में मतदान का बहिष्कार किया। ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत के 1,052 पंजीकृत मतदाताओं में से कोई भी ओबीसी वर्ग से नहीं है। तहसीलदार, एसडीएम विक्रांत शर्मा और स्थानीय विधायक बाबूसिंह राठौर ग्रामीणों को मनाने के लिए गाँव पहुँचे।
कोटा जिले के इटावा क्षेत्र में सिनोटा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले चक-टोडी तोडीखेड़ली गाँव के निवासियों ने भी बहिष्कार किया। ग्रामीण कृष्णा मीना के अनुसार यह गाँव पहले ढिपरी चंबल ग्राम पंचायत का हिस्सा था, लेकिन बाद में इसे लगभग 11 किलोमीटर दूर स्थित सिनोटा से जोड़ दिया गया। वन क्षेत्र और दूरी के कारण बुजुर्ग ग्रामीणों की आवाजाही विशेष रूप से कठिन हो गई है।
ईवीएम की खराबी और अन्य व्यवधान
कोटा की सांगोद पंचायत समिति में कुराडिया खुर्द मतदान केंद्र पर ईवीएम में खराबी के चलते लगभग 15 मिनट तक मतदान स्थगित रहा। मशीन बदलने के बाद प्रक्रिया फिर शुरू हुई। पाली में बागड़ी नगर पंचायत के मतदान केंद्र 2 पर ईवीएम खराबी के कारण लगभग एक घंटे की देरी हुई। रिटर्निंग ऑफिसर भागीरथ चौधरी ने दूसरी मशीन की व्यवस्था कर मतदान बहाल कराया।
बीकानेर में अडूरी ग्राम पंचायत के बूथ 19 पर एक मतदाता कतार में खड़े-खड़े अचानक अस्वस्थ हो गए और गिर पड़े। बाड़मेर में मंगता पंचायत समिति के वार्ड 8 से चुनाव लड़ रहे एक कांग्रेस उम्मीदवार की मृत्यु के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने संबंधित मतदान केंद्र पर सार्वजनिक सूचना चस्पा की, जिसमें बताया गया कि उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिन्ह ईवीएम से हटा दिया गया है।
मतदान के आंकड़े और प्रशासनिक तैयारी
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, बीकानेर में सर्वाधिक मतदान दर्ज की गई, जबकि उदयपुर में सबसे कम। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में परिसीमन को लेकर जन असंतोष कई जिलों में सतह पर आ चुका है। गौरतलब है कि यह राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार आने के बाद पहला बड़ा पंचायत चुनाव है।
राज्य के उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने जयपुर जिले की मौजमाबाद पंचायत समिति के अंतर्गत श्रीनिवासपुरा गाँव के बूथ नंबर 92 पर अपने परिवार — पत्नी, बेटा और बेटी — के साथ मतदान किया।
राजनीतिक समीकरण
मुख्य मुकाबला भाजपा और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच है। इसके अलावा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी), भारतीय आदिवासी पार्टी (बीएपी) और निर्दलीय उम्मीदवार भी कई क्षेत्रों में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। ये पंचायत चुनाव जमीनी स्तर पर दोनों प्रमुख दलों की स्वीकार्यता की परीक्षा माने जा रहे हैं।
आगे क्या
स्थानीय विरोध, प्रशासनिक वार्ताएँ और छिटपुट तकनीकी व्यवधानों के बीच मतदान प्रक्रिया जारी है। परिसीमन को लेकर उठे विवादों का दीर्घकालिक समाधान राज्य सरकार की प्राथमिकता सूची में शामिल होना अपेक्षित है, क्योंकि ऐसे बहिष्कार स्थानीय लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं।