राजनाथ सिंह बोले — मिसाइल हो, मर्यादा न हो तो शक्ति अधूरी; AI हो, राष्ट्र-चेतना न हो तो विकास अधूरा
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्र मंदिर विश्व रामायण आश्रम में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि केवल सैन्य और तकनीकी शक्ति पर्याप्त नहीं है — उसके साथ आंतरिक मर्यादा और राष्ट्रीय चेतना का होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा, 'हमारे पास मिसाइल हों, लेकिन मन में मर्यादा न हो, तो शक्ति अधूरी है। हमारे पास एआई हो लेकिन राष्ट्रीय चेतना न हो, तो विकास अधूरा है।'
पितृपक्ष और बलिदानियों का स्मरण
रक्षा मंत्री ने पितृपक्ष के संदर्भ में कहा कि तर्पण केवल पूर्वजों के स्मरण तक सीमित नहीं रहना चाहिए — उन वीर बलिदानियों को भी याद किया जाना चाहिए जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए। उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है, वह कभी नहीं गिरता, और जो अपने बलिदानियों को स्मरण करता है, वह सदैव आगे बढ़ता है।
मानस की शुद्धि और समाज की एकता
राजनाथ सिंह ने कहा कि बड़ा मनुष्य कभी केवल अपने लिए नहीं जीता — वह अपना जीवन समाज के लिए समर्पित करता है और दूसरों के सुख-दुख को अपना मानता है। उन्होंने रेखांकित किया कि धर्मशास्त्रों, पुराणों से लेकर भारतीय संविधान और भारतीय न्याय संहिता तक — सभी समाज के मानस की शुद्धि का कार्य करते हैं और यही हमें सभ्य बनाए रखते हैं।
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि मन का कलुष ही राष्ट्र-विरोधी विचारों को जन्म देता है, जबकि मानस की शुद्धि राष्ट्र को सर्वस्व मानने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि बड़प्पन केवल शक्ति और सामर्थ्य में नहीं, बल्कि सहनशीलता, उदारता और सबको साथ लेकर चलने की क्षमता में भी होता है।
सांस्कृतिक संरक्षण में सरकार के प्रयास
राजनाथ सिंह ने सरकार की सांस्कृतिक पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि उज्जैन में बाबा महाकाल के भव्य कॉरिडोर का निर्माण, काशी में बाबा विश्वनाथ धाम के परिसर का पुनरुद्धार, और अयोध्या में राममंदिर का निर्माण — ये सभी भारत की सांस्कृतिक अस्मिता को संरक्षित और संवर्धित करने के ऐतिहासिक प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के लिए अनगिनत पीढ़ियाँ प्रतीक्षारत रहीं, किंतु आज वह मंदिर अपनी पूरी भव्यता के साथ खड़ा है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नए आयाम छूने के साथ-साथ राष्ट्र की आंतरिक शक्ति को भी निरंतर मजबूत कर रही है।
टेरिटोरियल आर्मी स्थापना दिवस पर बधाई
इसी अवसर पर रक्षा मंत्री ने टेरिटोरियल आर्मी के स्थापना दिवस पर सभी जवानों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि टेरिटोरियल आर्मी 'नागरिक भी, सैनिक भी' की भावना का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। सीमाओं की सुरक्षा से लेकर आपदा राहत और राष्ट्र-निर्माण तक, इस बल ने साहस, समर्पण और निस्वार्थ सेवा की अनुकरणीय परंपराओं को जीवित रखा है। रक्षा मंत्री ने उनके अमूल्य योगदान को सैल्यूट किया।
कार्यक्रम का संदर्भ
यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब देश में आध्यात्मिक और राष्ट्रीय पहचान को लेकर व्यापक विमर्श चल रहा है। गौरतलब है कि राजनाथ सिंह नियमित रूप से ऐसे सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में शामिल होते हैं और वहाँ सुरक्षा नीति को आत्मिक मूल्यों से जोड़ने वाले विचार रखते हैं। आगे भी वे ऐसे मंचों पर राष्ट्र-चेतना और नागरिक कर्तव्य के विषय पर संवाद जारी रखेंगे।