राम कृपाल यादव का बयान: लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव एक गंभीर राजनीतिक गिरावट
सारांश
Key Takeaways
- राम कृपाल यादव ने ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को असफल बताया।
- कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इस कदम से राजनीति का स्तर गिर रहा है।
- स्पीकर का पद सभी सदस्यों के अधिकारों का संरक्षक होता है।
- अमित शाह ने स्पीकर का बचाव किया और इस प्रस्ताव को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
- लोकसभा में इस तरह के प्रस्ताव लगभग चार दशकों बाद लाए गए हैं।
पटना, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार सरकार के मंत्री राम कृपाल यादव ने गुरुवार को कहा कि लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव पहले से ही असफल होना निर्धारित था। उन्होंने विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस पर प्रहार करते हुए कहा कि इस कदम से राजनीति का स्तर गिरता हुआ स्पष्ट दिखाई देता है।
उन्होंने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से कहा, "यह प्रारंभ से ही स्पष्ट था कि ऐसा ही होगा। कांग्रेस पार्टी और अन्य विपक्षी सदस्यों द्वारा अध्यक्ष के खिलाफ उठाया गया यह प्रस्ताव असफल होना निश्चित था। यह राजनीतिक आचरण में गिरावट का एक बड़ा उदाहरण है और विशेषकर कांग्रेस का स्तर बहुत निचले स्तर पर गिर गया है।"
उन्होंने सवाल उठाया कि जब परिणाम पहले से ही स्पष्ट था, तो ऐसा प्रस्ताव लाने का उद्देश्य क्या था? राम कृपाल यादव ने कहा, "जब आपको पहले से पता है कि परिणाम क्या होगा, तब भी आप ऐसा कदम उठाते हैं। आखिरकार, आप क्या हासिल करना चाहते हैं? जो व्यक्ति संवैधानिक पद पर है, उसका सम्मान होना चाहिए, चाहे वह किसी भी पार्टी से जुड़ा हो।"
राम कृपाल यादव ने बताया कि भारत के संसदीय इतिहास में स्पीकर के खिलाफ इस तरह के प्रस्ताव दुर्लभ हैं। उनके अनुसार, पहले लोकसभा स्पीकर जीवी मावलंकर के खिलाफ एक बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। इसके अलावा, उन्हें याद नहीं है कि किसी अन्य स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाया गया हो। विपक्ष ने पहले कभी ऐसा प्रयास नहीं किया।
उन्होंने यह भी कहा कि संसद में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि स्पीकर को निशाना बनाया जाए। संसद में विचारों में भिन्नता हो सकती है, लेकिन स्पीकर पर ऐसा हमला क्यों? उन्होंने कौन सा गलत कार्य किया है? क्या उन्होंने कोई साजिश की है? स्पीकर वही निर्णय लेते हैं जो उन्हें सही लगता है। अब सदन ने इस प्रस्ताव को खारिज किया है और भविष्य में भी ऐसा ही होगा अगर फिर से ऐसा प्रयास किया गया।
वास्तव में, लोकसभा ने बुधवार को लगभग 13 घंटे चली लंबी बहस के बाद स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को ध्वनि मत से खारिज कर दिया। यह प्रस्ताव विपक्षी दलों द्वारा पेश किया गया था। विपक्ष का आरोप था कि स्पीकर सदन के संचालन में निष्पक्षता सुनिश्चित करने में असफल रहे हैं। हालांकि, बहस के दौरान सरकार ने इन आरोपों का दृढ़ता से खंडन किया।
इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी स्पीकर का समर्थन करते हुए विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस तरह का प्रस्ताव लाना संसदीय राजनीति में एक दुर्भाग्यपूर्ण कदम है।
अमित शाह ने कहा, "लोकसभा का स्पीकर किसी एक पार्टी का नहीं होता, बल्कि संपूर्ण सदन का होता है। वह सभी सदस्यों के अधिकारों का संरक्षक होता है। ऐसे में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना किसी साहसिक कदम के रूप में नहीं देखा जा सकता।"
उन्होंने बताया कि बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्य चर्चा में शामिल हुए, जिसके बाद प्रस्ताव खारिज कर दिया गया।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं सामान्य नहीं हैं। स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लगभग चार दशकों बाद आया है। यह कोई साधारण घटना नहीं है।
अमित शाह ने चेतावनी दी कि स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने कहा, "लोकसभा भारत का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मंच है और इसकी विश्वसनीयता केवल देश में नहीं, बल्कि दुनिया भर में है। जब इस संस्था के प्रमुख की ईमानदारी पर सवाल उठाया जाता है, तो इससे हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर भी प्रश्न उठते हैं।"