क्या राजसमंद में 131 फीट ऊंची बालाजी की प्रतिमा बनकर तैयार हो गई है?
सारांश
Key Takeaways
- राजसमंद में 131 फीट ऊंची बालाजी की प्रतिमा का निर्माण
- निर्माण में पर्यावरण का ध्यान रखा गया है
- प्रतिमा का निर्माण फाइबर तकनीक से किया गया है
- विशेषता: तीन प्रतिमाएं आमने-सामने हैं
- महत्वपूर्ण योगदान: नरेश भाई कुमावत और अन्य कारीगर
राजसमंद, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान के राजसमंद जिले के नाथद्वारा में वल्लभ संप्रदाय की प्रधान पीठ ने नया चार धाम बनाने की योजना बनाई है। नाथद्वारा में पहले से ही भगवान श्रीनाथजी की एक विशाल प्रतिमा विद्यमान है, लेकिन अब पीठ 131 फीट ऊंची बालाजी की प्रतिमा का निर्माण कर रही है, जो अब लगभग पूर्ण हो चुकी है।
इससे पहले नाथद्वारा में भगवान शिव की 179 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण किया गया था, और अब बालाजी की यह प्रतिमा भी तैयार होने के कगार पर है।
यह 131 फीट ऊंची बालाजी की प्रतिमा अरावली की पहाड़ी पर स्थित है, जो जमीनी स्तर से 500 फीट की ऊंचाई पर बनी है। इस प्रतिमा का निर्माण फाइबर की अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके किया गया है। इस प्रक्रिया में प्रतिमा के सांचे को जटिल तरीके से तैयार किया जाता है और उस पर फाइबरग्लास की परतें लगाई जाती हैं, जिससे प्रतिमा को मजबूती मिले। हालांकि, अरावली की पहाड़ी पर निर्माण कार्य करना कठिन था, क्योंकि वहां सामान पहुंचाना चुनौतीपूर्ण था। इस प्रतिमा का निर्माण कार्य लगभग 5 महीने पहले आरंभ हुआ था।
नाथद्वारा के गिरिराज परिक्रमा में यह श्रीजी के हनुमान जी का स्वरूप अनोखा है। इसकी विशेषता यह है कि यह तीनों अद्भुत प्रतिमाएं एक-दूसरे के आमने-सामने हैं और एक-दूसरे को निहार रही हैं। इस प्रतिमा की कल्पना मुंबई के उद्योगपति गिरीश भाई शाह ने की थी और इसका निर्माण कार्य श्रीनाथजी मंदिर के तिलकायत गोस्वामी राकेश बाबा और युवराज विशाल बाबा की अनुमति से शुरू हुआ।
श्रीजी के हनुमान के इंजीनियर राजदीपसिंह ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि हमें कहा गया था कि हनुमान जी की प्रतिमा का निर्माण पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना करना है। इसीलिए हमने पहले क्रेन लगाई और फिर निर्माण कार्य आरंभ किया। यह प्रतिमा इंडिया और अमेरिकन स्टैंडर्ड्स को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।
गिरीश भाई शाह, जो श्रीजी के हनुमान के मुख्य संचालक हैं, भावुक होकर इस प्रतिमा के निर्माण पर बात करते हैं। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में लिखा है कि जहां श्रीनाथजी हैं, वहां भगवान हनुमान जी और भगवान शिव का होना अनिवार्य है। यह एक भक्त की भावना है और मुझे इस विचार के साथ आया कि यहां भगवान हनुमान जी की प्रतिमा होनी चाहिए, जो श्रीनाथ जी के सामने हो। अपनी सेवा भावना को पूरा करते हुए हमने गोस्वामी राकेश बाबा और युवराज विशाल बाबा से आज्ञा ली और काम शुरू किया।
प्रतिमा के निर्माण में दिल्ली के प्रसिद्ध मूर्ति कारीगर नरेश भाई कुमावत, शरद गुप्ता, आर्किटेक्ट शिरीश सनाढय, और राजदीप सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इससे पहले नरेश भाई कुमावत ने 379 फीट ऊंची शिव प्रतिमा का कार्य भी किया है।