क्या अमेरिका में मास शूटिंग के हालात बदतर हो रहे हैं?
सारांश
Key Takeaways
- पिछले दो वर्षों में अमेरिका में 367 मास शूटिंग हुईं।
- गोलियों के हमले ने स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों को भी प्रभावित किया है।
- सीडीसी के अनुसार, 46,000 से अधिक अमेरिकी नागरिक बंदूक से संबंधित हिंसा में मारे गए।
- राजनीतिक बहसें हथियारों के नियंत्रण पर केंद्रित होनी चाहिए।
- सुरक्षा की समस्या को गंभीरता से लेना आवश्यक है।
वॉशिंगटन, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका 2024 और 2025 के बीच जिस खामोशी से अपनी ज़मीन पर खून बहता देख रहा है, वह विश्व को चौंका देता है। पिछले दो वर्षों में चार या उससे अधिक मौतों वाली गोलीबारी की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि दुनिया की सबसे विकसित मानी जाने वाली यह सुपरपावर अपने ही सड़कों पर फैले हथियारों के जंगल को नियंत्रित नहीं कर पा रही है।
आंकड़े हैरान करने वाले हैं। गन वाइलेंस आर्काइव के अनुसार, 2025 के पहले दस महीनों (जनवरी से अक्टूबर, आंकड़े 3 नवंबर तक के) में ही 367 मास शूटिंग्स हुईं, जिनमें कुल 366 लोगों की मौत हुई और 1,600 से अधिक लोग घायल हुए। 2024 में भी हालात इससे बेहतर नहीं थे; सैकड़ों गोलियों ने स्कूलों, घरों, सड़कों, बार, और चर्चों को भी सुरक्षित नहीं छोड़ा।
2024 की शुरुआत रक्तरंजित थी। 21 जनवरी को इलिनॉय के जोलिएट में एक व्यक्ति ने अलग-अलग स्थानों पर फायरिंग करके आठ लोगों को मार डाला। पुलिस इन घटनाओं को 'आइसोलेटेड' कहकर आगे बढ़ जाती है।
साल 2024 का एक और काला दिन सितंबर में आया जब जॉर्जिया के एक हाई स्कूल में एक छात्र ने अपने सहपाठियों और शिक्षकों पर गोली चला दी। चार लोग मारे गए, नौ घायल हुए, और एक बार फिर स्कूलों की सुरक्षा पर प्रश्न उठ खड़े हुए। यह विडंबना है कि जिस देश ने दुनिया को आधुनिक शिक्षा, उच्च तकनीक, और डिजिटल सुरक्षा के मॉडल दिए, वही अपने बच्चों को कक्षा में सुरक्षित रखने के लिए जूझ रहा है। अमेरिका में स्कूल शूटिंग अब किसी अनहोनी की तरह नहीं आती; यह एक पैटर्न बनता जा रहा है।
2025 के अंत तक कैलिफोर्निया के स्टॉकटन में इसी पैटर्न को दोहराया गया। ब्लैक फ्राइडे पर एक बैंक्वेट हॉल में रोशनी और संगीत के बीच अचानक चीखें गूंज उठीं। चार लोग वहीं ढेर हो गए, और दस लोग अस्पताल पहुंचे।
इन घटनाओं का सबसे डरावना पहलू यह है कि आंकड़े हर बार घटना से बड़े होते जा रहे हैं। मौतें और हमले बढ़ रहे हैं, हथियारों की उपलब्धता अनियंत्रित है, और राजनीतिक बहसें इतनी ध्रुवीकृत हैं कि गोली भी वोट बैंक के चश्मे से देखी जाने लगी है। सीडीसी ने 2023 में बताया था कि 46,000 से अधिक अमेरिकी नागरिक बंदूक से संबंधित हिंसा में मारे गए—जो दुनिया के किसी भी विकसित देश से कई गुना अधिक है। 2024–2025 में यह रुझान नहीं बदला, बस आंकड़ों ने नए चेहरे धारण कर लिए।
अमेरिका दुनिया को हमेशा लोकतंत्र, स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की शिक्षा देता है, लेकिन यह भी सच है कि उसका अपना समाज हथियारों की बाढ़ में डूब रहा है। वह देश जो दुनिया की सबसे सुरक्षित सीमाएं बनाने का दावा करता है, वही अपने नागरिकों को रोजमर्रा की सुरक्षा नहीं दे पा रहा है।