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थूथुकुडी मछुआरों की सी-एम्बुलेंस मांग: गहरे समुद्र में जान बचाने की पुकार

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थूथुकुडी मछुआरों की सी-एम्बुलेंस मांग: गहरे समुद्र में जान बचाने की पुकार

सारांश

थूथुकुडी के लगभग 10,000 मछुआरे रोज़ गहरे समुद्र में जाते हैं — बिना किसी आपातकालीन चिकित्सा सहारे के। सी-एम्बुलेंस की माँग सिर्फ एक सुविधा की नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के बीच की खाई पाटने की है।

मुख्य बातें

थूथुकुडी के मछुआरा समुदाय ने अधिकारियों से सी-एम्बुलेंस सेवा शुरू करने की माँग की है।
जिले में 163.5 किलोमीटर तटरेखा, 21 मछुआरा बस्तियाँ और रोज़ाना समुद्र में जाने वाले लगभग 10,000 मछुआरे हैं।
4,500 से अधिक देसी नावें, 350 गिल-नेट नावें और लगभग 200 बॉटम ट्रॉलर जिले से संचालित होते हैं।
मशीनीकृत नावों की समुद्री यात्रा 10 घंटे से अधिक की होती है; गिल-नेट नावें कई दिन समुद्र में रहती हैं।
मछुआरों का प्रस्ताव है कि तट के रणनीतिक बिंदुओं पर प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों सहित सी-एम्बुलेंस तैनात की जाएँ।

तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले में मछुआरा समुदाय ने अधिकारियों से सी-एम्बुलेंस सेवा शुरू करने की माँग की है, ताकि गहरे समुद्र में चिकित्सा आपात स्थिति में फँसे मछुआरों की समय पर जान बचाई जा सके। समुदाय का कहना है कि किनारे तक पहुँचने में लगने वाले कई घंटे अक्सर जानलेवा साबित होते हैं।

मुख्य समस्या क्या है

मछुआरों के अनुसार, जब समुद्र में किसी क्रू सदस्य को दिल का दौरा, सांस लेने में कठिनाई या कोई गंभीर चोट लगती है, तो मछली पकड़ने वाली नाव को किनारे तक लाने में कई घंटे लग जाते हैं। इस देरी में मरीज की हालत बिगड़ सकती है और यह जानलेवा भी साबित हो सकती है। मछुआरों का मानना है कि इमरजेंसी मेडिकल सुविधाओं से लैस सी-एम्बुलेंस इस अंतर को पाट सकती है।

थूथुकुडी की समुद्री स्थिति

थूथुकुडी जिले में 163.5 किलोमीटर लंबी तटरेखा है, जो उत्तर में वेम्बार से दक्षिण में मन्नार की खाड़ी के साथ मनाप्पड तक फैली है। जिले में 21 मछुआरा बस्तियाँ सक्रिय रूप से समुद्री मत्स्य पालन में लगी हैं।

अधिकारियों के अनुसार, जिले से 4,500 से अधिक मोटराइज़्ड देसी नावें, 350 मशीनीकृत गिल-नेट नावें और लगभग 200 मशीनीकृत बॉटम ट्रॉलर संचालित होती हैं। प्रतिदिन लगभग 10,000 मछुआरे आजीविका के लिए समुद्र में जाते हैं। इसके अलावा, समुद्र तल से शंख एकत्र करने में लगभग 500 शंख गोताखोर भी शामिल हैं।

जोखिम की गहराई

देसी नावों वाले मछुआरे सामान्यतः 12 नॉटिकल मील तक के क्षेत्रीय जल में काम करते हैं, जबकि मशीनीकृत नावें गहरे समुद्र में जाती हैं और उनकी यात्रा 10 घंटे से अधिक की होती है। गिल-नेट नावें कई-कई दिन समुद्र में रहती हैं। किसी मछुआरे के डूबने या लापता होने की स्थिति में खोज अभियान के लिए आस-पास की नावों को लगाया जाता है और मछुआरा संघ लंबी खोज का खर्च उठाते हैं।

यह ऐसे समय में और भी गंभीर है जब समुद्र में मृत्यु होने पर पूरा मछुआरा समुदाय परंपरागत रूप से काम रोककर किनारे लौट आता है — जिससे आजीविका पर भी सीधा असर पड़ता है।

समुदाय की माँग

मछुआरों का प्रस्ताव है कि थूथुकुडी तट के रणनीतिक बिंदुओं पर प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों के साथ सुसज्जित सी-एम्बुलेंस तैनात की जाएँ। यह सेवा तत्काल मेडिकल देखभाल प्रदान कर सकती है, गंभीर रूप से बीमार या घायल मछुआरों को सुरक्षित निकालने में सहायता कर सकती है और गहरे समुद्र से मुख्य भूमि के अस्पतालों तक पहुँचने में लगने वाले समय को उल्लेखनीय रूप से कम कर सकती है।

आगे की राह

अभी तक अधिकारियों की ओर से इस माँग पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि भारत के कई तटीय राज्यों में समुद्री आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की कमी एक पुरानी समस्या रही है। थूथुकुडी जैसे घनी मछुआरा आबादी वाले जिले में यह माँग नीति-निर्माताओं के लिए एक अहम परीक्षा बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ मत्स्य पालन नीतियाँ उत्पादन और निर्यात पर केंद्रित रहती हैं, लेकिन मछुआरों की जान की सुरक्षा पीछे छूट जाती है। केरल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी समुद्री आपातकालीन सेवाएँ अधूरी हैं। जब तक राज्य सरकार इस माँग पर ठोस बजट और क्रियान्वयन योजना नहीं लाती, यह एक और 'विचाराधीन प्रस्ताव' बनकर रह जाएगी — और अगली मौत फिर रोकी नहीं जा सकेगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

थूथुकुडी में सी-एम्बुलेंस की माँग क्यों उठ रही है?
थूथुकुडी के मछुआरों का कहना है कि गहरे समुद्र में चिकित्सा आपात स्थिति में किनारे तक पहुँचने में कई घंटे लगते हैं, जिससे मरीज की जान जा सकती है। सी-एम्बुलेंस इस देरी को कम कर तत्काल उपचार सुनिश्चित कर सकती है।
थूथुकुडी जिले में कितने मछुआरे समुद्र में जाते हैं?
अधिकारियों के अनुसार, थूथुकुडी जिले से प्रतिदिन लगभग 10,000 मछुआरे समुद्र में जाते हैं। इसके अलावा लगभग 500 शंख गोताखोर भी समुद्र तल पर काम करते हैं।
सी-एम्बुलेंस से मछुआरों को क्या फायदा होगा?
प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों से लैस सी-एम्बुलेंस तत्काल मेडिकल देखभाल दे सकती है, गंभीर रूप से बीमार या घायल मछुआरों को सुरक्षित बाहर निकाल सकती है और अस्पताल पहुँचने में लगने वाले समय को उल्लेखनीय रूप से कम कर सकती है।
थूथुकुडी की तटरेखा कितनी लंबी है और कितनी बस्तियाँ हैं?
थूथुकुडी जिले में 163.5 किलोमीटर लंबी तटरेखा है, जो वेम्बार से मनाप्पड तक फैली है। जिले में 21 मछुआरा बस्तियाँ सक्रिय रूप से समुद्री मत्स्य पालन में लगी हैं।
क्या अधिकारियों ने इस माँग पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक अधिकारियों की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मछुआरा समुदाय तटीय रणनीतिक बिंदुओं पर सी-एम्बुलेंस तैनाती की अपील कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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