21 सितंबर 2026
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त्रिपुरा में एम्बुलेंस के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनेगा, CM माणिक साहा ने अगरतला में ICU-CSSD का उद्घाटन किया

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त्रिपुरा में एम्बुलेंस के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनेगा, CM माणिक साहा ने अगरतला में ICU-CSSD का उद्घाटन किया

सारांश

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने आपातकालीन एम्बुलेंस के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाने की घोषणा की और ₹13.5 करोड़ की लागत से अगरतला में नई ICU-CSSD सुविधाओं का उद्घाटन किया। लक्ष्य है कि राज्य का कोई भी मरीज इलाज के लिए बाहर न जाए और रेफरल संख्या शून्य हो।

मुख्य बातें

त्रिपुरा में आपात स्थितियों में एम्बुलेंस की निर्बाध आवाजाही के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाए जाएंगे — CM माणिक साहा की घोषणा।
अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं जीबीपी अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में ₹13.5 करोड़ की लागत से नई ICU और CSSD इकाइयाँ शुरू हुईं।
नए आईसीयू में पुरुष व महिला मरीजों के लिए अलग-अलग 9-9 बेड की व्यवस्था।
राज्य में वर्तमान में 9 सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक कार्यरत; सभी प्रमुख अस्पतालों में डिजिटल सेवाएँ लागू करने की पहल।
सरकार का लक्ष्य: राज्य से बाहर जाने वाले रेफरल मरीजों की संख्या शून्य करना।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को घोषणा की कि आपात स्थितियों में मरीजों को ले जाने वाली एम्बुलेंस की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए राज्य में विशेष ग्रीन कॉरिडोर स्थापित किए जाएंगे, ताकि यातायात जाम की वजह से कोई भी मरीज समय पर उपचार से वंचित न रहे। यह घोषणा उन्होंने अगरतला स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं जीबीपी अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में नवनिर्मित आईसीयू (गहन चिकित्सा इकाई) और सीएसएसडी इकाइयों के उद्घाटन के अवसर पर की।

ग्रीन कॉरिडोर की घोषणा: क्या और क्यों

मुख्यमंत्री साहा ने बताया कि एम्बुलेंस की आवाजाही को लेकर वे कई बैठकें कर चुके हैं और समर्पित ग्रीन कॉरिडोर बनाने के लिए आवश्यक उपाय किए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'हम एक ग्रीन कॉरिडोर बनाएंगे ताकि मरीज यातायात जाम में न फंसें।' यह कदम उन घटनाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण है जहाँ शहरी यातायात भीड़ के कारण आपातकालीन चिकित्सा सहायता में विलंब होता है।

गौरतलब है कि त्रिपुरा जैसे पहाड़ी और अर्ध-शहरी राज्य में सुदूर इलाकों से रेफरल मरीजों को जिला मुख्यालय या राजधानी तक पहुँचाने में अक्सर समय की बाधा आती है। ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था इस अंतराल को पाटने की दिशा में एक ठोस नीतिगत प्रयास के रूप में देखी जा रही है।

नई ICU और CSSD सुविधाओं का उद्घाटन

अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं जीबीपी अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में ₹13.5 करोड़ की कुल लागत से नए आईसीयू और सीएसएसडी (सेंट्रल स्टेराइल सप्लाई डिपार्टमेंट) इकाइयाँ तैयार की गई हैं। इस आईसीयू में पुरुष एवं महिला मरीजों के लिए अलग-अलग नौ-नौ बेड की सुविधा उपलब्ध है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में वर्तमान में नौ सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक कार्यरत हैं, और सभी प्रमुख रेफरल अस्पतालों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से जोड़ने का कार्य जारी है। इसके साथ ही, सभी अस्पतालों में डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराने की पहल भी चल रही है, जिनमें से कई अस्पतालों में यह पहले से ही लागू है।

रेफरल मरीजों की संख्या शून्य करने का लक्ष्य

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का प्रभार भी सँभाल रहे साहा ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि त्रिपुरा के किसी भी निवासी को बेहतर इलाज के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े। उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में राज्य से बाहर जाने वाले रेफरल मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है और सरकार इस संख्या को शून्य तक लाने के लिए प्रयासरत है।

यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत के कई राज्य स्वास्थ्य अवसंरचना की कमी के चलते अपने गंभीर मरीजों को कोलकाता, चेन्नई या दिल्ली भेजने पर निर्भर रहते हैं। त्रिपुरा का यह प्रयास क्षेत्र में एक नई मिसाल बन सकता है।

प्रशिक्षण और बुनियादी ढाँचे पर ज़ोर

मुख्यमंत्री साहा ने बताया कि स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे के उन्नयन के साथ-साथ डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को चरणबद्ध उन्नत प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि नई अत्याधुनिक इकाइयाँ कुशलतापूर्वक संचालित हो सकें। राज्य सरकार के तीन मुख्य लक्ष्यों में बेहतर बुनियादी ढाँचा, त्वरित चिकित्सा सेवाएँ और अस्पतालों में स्वच्छता बनाए रखना शामिल है।

आगामी महीनों में ग्रीन कॉरिडोर नीति का विस्तृत खाका और इसके क्रियान्वयन की समयसीमा सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है — पूर्वोत्तर के शहरों में जहाँ यातायात प्रबंधन की संस्थागत क्षमता सीमित है, वहाँ केवल नीतिगत इच्छाशक्ति पर्याप्त नहीं होगी। रेफरल संख्या 'शून्य' करने का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन त्रिपुरा जैसे राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और भौगोलिक दुर्गमता दोनों बड़ी बाधाएँ हैं। ₹13.5 करोड़ की ICU-CSSD परियोजना अवसंरचना की दिशा में ठोस कदम है, लेकिन यह देखना होगा कि प्रशिक्षित मानव संसाधन इन इकाइयों को वास्तव में चालू रख सकते हैं या नहीं।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा में एम्बुलेंस ग्रीन कॉरिडोर क्या है?
यह एक विशेष यातायात व्यवस्था होगी जिसमें आपातकालीन मरीजों को ले जाने वाली एम्बुलेंस के लिए रास्ता साफ रखा जाएगा ताकि यातायात जाम में देरी न हो। CM माणिक साहा ने 21 सितंबर 2026 को इसकी घोषणा की और कहा कि इसके लिए आवश्यक उपाय किए जाएंगे।
अगरतला में नई ICU सुविधा कितनी लागत से बनी और इसमें क्या है?
अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं जीबीपी अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में ₹13.5 करोड़ की कुल लागत से नई ICU और CSSD इकाइयाँ तैयार हुई हैं। इस ICU में पुरुष और महिला मरीजों के लिए अलग-अलग 9-9 बेड की सुविधा है।
त्रिपुरा सरकार का रेफरल मरीजों को लेकर क्या लक्ष्य है?
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि त्रिपुरा का कोई भी नागरिक बेहतर इलाज के लिए राज्य से बाहर न जाए और राज्य से बाहर भेजे जाने वाले रेफरल मरीजों की संख्या शून्य हो। CM साहा के अनुसार वर्तमान में यह संख्या पहले से कम हुई है।
त्रिपुरा में अभी कितने सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक काम कर रहे हैं?
वर्तमान में त्रिपुरा में 9 सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक कार्यरत हैं। राज्य के सभी प्रमुख रेफरल अस्पतालों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है और डिजिटल सेवाएँ भी चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही हैं।
CM माणिक साहा का स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर क्या विज़न है?
CM साहा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का प्रभार भी सँभाल रहे हैं। उनका विज़न है — बेहतर बुनियादी ढाँचा, त्वरित चिकित्सा सेवाएँ, अस्पतालों में स्वच्छता और डॉक्टरों को चरणबद्ध उन्नत प्रशिक्षण देकर राज्य के लोगों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना।
राष्ट्र प्रेस
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