त्रिपुरा में एम्बुलेंस के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनेगा, CM माणिक साहा ने अगरतला में ICU-CSSD का उद्घाटन किया
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को घोषणा की कि आपात स्थितियों में मरीजों को ले जाने वाली एम्बुलेंस की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए राज्य में विशेष ग्रीन कॉरिडोर स्थापित किए जाएंगे, ताकि यातायात जाम की वजह से कोई भी मरीज समय पर उपचार से वंचित न रहे। यह घोषणा उन्होंने अगरतला स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं जीबीपी अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में नवनिर्मित आईसीयू (गहन चिकित्सा इकाई) और सीएसएसडी इकाइयों के उद्घाटन के अवसर पर की।
ग्रीन कॉरिडोर की घोषणा: क्या और क्यों
मुख्यमंत्री साहा ने बताया कि एम्बुलेंस की आवाजाही को लेकर वे कई बैठकें कर चुके हैं और समर्पित ग्रीन कॉरिडोर बनाने के लिए आवश्यक उपाय किए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'हम एक ग्रीन कॉरिडोर बनाएंगे ताकि मरीज यातायात जाम में न फंसें।' यह कदम उन घटनाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण है जहाँ शहरी यातायात भीड़ के कारण आपातकालीन चिकित्सा सहायता में विलंब होता है।
गौरतलब है कि त्रिपुरा जैसे पहाड़ी और अर्ध-शहरी राज्य में सुदूर इलाकों से रेफरल मरीजों को जिला मुख्यालय या राजधानी तक पहुँचाने में अक्सर समय की बाधा आती है। ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था इस अंतराल को पाटने की दिशा में एक ठोस नीतिगत प्रयास के रूप में देखी जा रही है।
नई ICU और CSSD सुविधाओं का उद्घाटन
अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं जीबीपी अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में ₹13.5 करोड़ की कुल लागत से नए आईसीयू और सीएसएसडी (सेंट्रल स्टेराइल सप्लाई डिपार्टमेंट) इकाइयाँ तैयार की गई हैं। इस आईसीयू में पुरुष एवं महिला मरीजों के लिए अलग-अलग नौ-नौ बेड की सुविधा उपलब्ध है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में वर्तमान में नौ सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक कार्यरत हैं, और सभी प्रमुख रेफरल अस्पतालों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से जोड़ने का कार्य जारी है। इसके साथ ही, सभी अस्पतालों में डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराने की पहल भी चल रही है, जिनमें से कई अस्पतालों में यह पहले से ही लागू है।
रेफरल मरीजों की संख्या शून्य करने का लक्ष्य
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का प्रभार भी सँभाल रहे साहा ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि त्रिपुरा के किसी भी निवासी को बेहतर इलाज के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े। उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में राज्य से बाहर जाने वाले रेफरल मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है और सरकार इस संख्या को शून्य तक लाने के लिए प्रयासरत है।
यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत के कई राज्य स्वास्थ्य अवसंरचना की कमी के चलते अपने गंभीर मरीजों को कोलकाता, चेन्नई या दिल्ली भेजने पर निर्भर रहते हैं। त्रिपुरा का यह प्रयास क्षेत्र में एक नई मिसाल बन सकता है।
प्रशिक्षण और बुनियादी ढाँचे पर ज़ोर
मुख्यमंत्री साहा ने बताया कि स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे के उन्नयन के साथ-साथ डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को चरणबद्ध उन्नत प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि नई अत्याधुनिक इकाइयाँ कुशलतापूर्वक संचालित हो सकें। राज्य सरकार के तीन मुख्य लक्ष्यों में बेहतर बुनियादी ढाँचा, त्वरित चिकित्सा सेवाएँ और अस्पतालों में स्वच्छता बनाए रखना शामिल है।
आगामी महीनों में ग्रीन कॉरिडोर नीति का विस्तृत खाका और इसके क्रियान्वयन की समयसीमा सामने आने की उम्मीद है।