9 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या जो राम का विरोध करेगा, उसका राजनीतिक अस्तित्व रावण की तरह मिट जाएगा?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या जो राम का विरोध करेगा, उसका राजनीतिक अस्तित्व रावण की तरह मिट जाएगा?

सारांश

भाजपा सांसद मुकेश राजपूत ने सपा नेता डॉ. नवल किशोर के बयान की कड़ी निंदा की। उनका कहना है कि जो राम का विरोध करेगा, उसका राजनीतिक अस्तित्व रावण की तरह मिट सकता है। जानिए इस विवाद के पीछे की कहानी और क्या है इसके राजनीतिक मायने।

मुख्य बातें

राम के प्रति सम्मान का महत्व राजनीतिक बयानबाजी के धार्मिक प्रभाव सामाजिक सद्भाव की आवश्यकता धार्मिक आस्था का संरक्षण भाजपा की सेवा की राजनीति

फर्रुखाबाद, 17 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी के नेता डॉ. नवल किशोर शाक्य के विवादास्पद बयान पर भाजपा सांसद मुकेश राजपूत ने कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने नवल किशोर के बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि जो राम का नहीं, वह किसी काम का नहीं।

सांसद मुकेश राजपूत ने सपा नेता के इस बयान को असंवेदनशील और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस हमेशा ऐसी राजनीति करती है, जिसका मकसद लोगों की आस्था को आहत करना और समाज में भ्रम फैलाना होता है।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने ‘मिले मुलायम कांशीराम’ का नारा दिया था, वे अब इस दुनिया में नहीं हैं। उस नारे का अब कोई महत्व नहीं है, लेकिन भगवान श्रीराम आज भी हर भक्त के हृदय में जीवित हैं।

मुकेश राजपूत ने आगे कहा कि भगवान राम पहले टेंट में विराजमान थे और अब अयोध्या के भव्य श्रीराम मंदिर में प्रतिष्ठित हैं। राम मंदिर में दर्शन करने वालों की संख्या ने विश्व रिकॉर्ड बना दिया है। इतने श्रद्धालु आज तक किसी भी मंदिर में दर्शन के लिए नहीं पहुंचे हैं।

सांसद ने नवल किशोर शाक्य पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जो राम का नहीं, वह किसी काम का नहीं। उन्होंने रावण का उदाहरण देते हुए कहा कि रावण ने भी भगवान राम का विरोध किया था। उसके एक लाख पुत्र और सवा लाख नाती थे, लेकिन उसका वंश समाप्त हो गया। घर में दीया-बाती जलाने वाला तक कोई नहीं बचा।

राजपूत ने कहा कि जो भी नेता या राजनीतिक दल भगवान राम का अपमान करेंगे, उनका भी वही हाल होगा। जिनके दिलों में भगवान राम के प्रति सम्मान नहीं है, उनके घरों में भी दिया-बाती जलाने वाला कोई नहीं बचेगा।

उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति सेवा और राष्ट्र निर्माण की है, जबकि विपक्ष सिर्फ धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ कर समाज को बांटने का काम करता है। उन्होंने कहा कि राम हमारी आस्था के केंद्र हैं और जो राम का विरोध करेगा, उसका राजनीतिक अस्तित्व भी रावण की तरह मिट जाएगा।

दरअसल, डॉ. नवल किशोर ने हाल ही में सिद्धार्थनगर में एक कार्यक्रम के दौरान मंच से कहा था 'मिले मुलायम कांशीराम, हवा उड़ गए जय श्रीराम।' यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद हिंदू संगठनों और भाजपा नेताओं ने इसे भगवान राम का अपमान बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं दूसरी ओर राजनीति में इसे भुनाने की कोशिशें भी होती हैं।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. नवल किशोर शाक्य ने क्या कहा था?
डॉ. नवल किशोर ने कहा था 'मिले मुलायम कांशीराम, हवा उड़ गए जय श्रीराम।'
मुकेश राजपूत ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
मुकेश राजपूत ने कहा कि जो राम का विरोध करेगा, उसका राजनीतिक अस्तित्व रावण की तरह मिट जाएगा।
राम मंदिर में कितने श्रद्धालु आए हैं?
राम मंदिर में दर्शन करने वालों की संख्या ने विश्व रिकॉर्ड बना दिया है।
क्या यह बयान धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है?
जी हाँ, भाजपा नेताओं और हिंदू संगठनों ने इसे भगवान राम का अपमान बताते हुए कड़ा विरोध किया है।
भाजपा की राजनीति का मकसद क्या है?
भाजपा की राजनीति सेवा और राष्ट्र निर्माण की है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले