रामदास कदम का उद्धव ठाकरे पर हमला: 'स्कूली बच्चों को आंदोलन में घसीटना भविष्य से खिलवाड़'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना नेता रामदास कदम ने 20 अक्टूबर 2026 को मुंबई में शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि स्कूली बच्चों को राजनीतिक आंदोलन में उतारना उनके भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ है। कदम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'गरीबों का भगवान' बताया और उद्धव ठाकरे को 'हताश नेता' करार दिया।
मुख्य आरोप: बच्चों का राजनीतिक इस्तेमाल
कदम ने कहा, 'बच्चों को पढ़ाई-लिखाई से हटाकर आंदोलन के लिए उतारते हैं — उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आपको क्या अधिकार है?' उन्होंने आगे कहा कि जागरूकता का सही मार्ग विद्यार्थियों के लिए शिक्षा है, न कि राजनीतिक रैलियाँ। कदम के अनुसार, उद्धव ठाकरे और 'दिल्ली वाले पप्पू' — यानी कांग्रेस नेतृत्व — मिलकर स्कूली बच्चों को अपने आंदोलन का हथियार बना रहे हैं।
उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री काल पर सवाल
कदम ने उद्धव ठाकरे के राजनीतिक अनुभव पर भी सवाल दागा। उन्होंने कहा, 'कोई सत्ता को खत्म नहीं करता — उद्धव ठाकरे खुद मुख्यमंत्री रहे हैं, तो उन्हें इस्तीफा क्यों देना पड़ा?' कदम का तर्क था कि इतने अनुभव के बाद भी ठाकरे जब सरकार-विरोध की भाषा बोलते हैं, तो यह विरोधाभासी है।
PM मोदी की तारीफ और बालासाहब का संदर्भ
कदम ने प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों को मुफ्त अनाज, कश्मीर से धारा 370 हटाना, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और पाकिस्तान को मुँहतोड़ जवाब देना — ये सब मोदी की उपलब्धियाँ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बालासाहब ठाकरे जीवित होते, तो उद्धव को कांग्रेस के साथ जाकर मुख्यमंत्री बनने का अवसर कभी नहीं देते।
दशहरा रैली और 'असली शिवसेना' का दावा
कदम ने मुंबई में एक ही दिन दो अलग-अलग दशहरा रैलियों का उल्लेख किया — एक बालासाहब ठाकरे के विचारों से जुड़ी और दूसरी उद्धव ठाकरे की। उन्होंने दावा किया कि रैलियों की भीड़ से खुद स्पष्ट हो जाएगा कि 'असली शिवसेना' किसकी है। गौरतलब है कि शिवसेना के दो गुटों — एकनाथ शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना और उद्धव गुट — के बीच 'असली पार्टी' का विवाद चुनाव आयोग और अदालतों तक पहुँच चुका है।
महाराष्ट्र के किसान संकट पर चिंता
राजनीतिक हमले के साथ-साथ कदम ने महाराष्ट्र में जारी कृषि संकट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य में अकाल जैसे हालात हैं और किसानों की आत्महत्याएँ रुकी नहीं हैं। उनके अनुसार, असली ज़रूरत राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की नहीं, बल्कि संकटग्रस्त किसानों तक मदद पहुँचाने की है।
यह टकराव ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियाँ तेज़ हैं और दोनों शिवसेना गुट एक-दूसरे की विरासत और जनाधार पर दावा ठोक रहे हैं।