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रामदास कदम का उद्धव ठाकरे पर हमला: 'स्कूली बच्चों को आंदोलन में घसीटना भविष्य से खिलवाड़'

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रामदास कदम का उद्धव ठाकरे पर हमला: 'स्कूली बच्चों को आंदोलन में घसीटना भविष्य से खिलवाड़'

सारांश

शिवसेना नेता रामदास कदम ने उद्धव ठाकरे पर स्कूली बच्चों को राजनीतिक आंदोलन में घसीटने का आरोप लगाया — यह हमला महाराष्ट्र की 'असली शिवसेना' की जंग का नया मोर्चा है। दशहरा रैली की प्रतिद्वंद्विता के बीच बालासाहब की विरासत केंद्र में है।

मुख्य बातें

रामदास कदम ने 20 अक्टूबर 2026 को उद्धव ठाकरे पर स्कूली बच्चों को आंदोलन में उतारने का आरोप लगाया।
कदम ने PM मोदी को 'गरीबों का भगवान' बताया और मुफ्त अनाज, धारा 370 हटाने व राम मंदिर को उपलब्धि गिनाया।
कदम का दावा — यदि बालासाहब ठाकरे होते तो उद्धव को कांग्रेस के साथ मिलकर मुख्यमंत्री बनने का मौका कभी न देते।
मुंबई में दशहरा रैली के लिए दोनों शिवसेना गुटों ने अलग-अलग आयोजन किए; कदम ने भीड़ को 'असली शिवसेना' का प्रमाण बताया।
कदम ने महाराष्ट्र के किसान संकट और जारी आत्महत्याओं पर भी चिंता जताई।

शिवसेना नेता रामदास कदम ने 20 अक्टूबर 2026 को मुंबई में शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि स्कूली बच्चों को राजनीतिक आंदोलन में उतारना उनके भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ है। कदम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'गरीबों का भगवान' बताया और उद्धव ठाकरे को 'हताश नेता' करार दिया।

मुख्य आरोप: बच्चों का राजनीतिक इस्तेमाल

कदम ने कहा, 'बच्चों को पढ़ाई-लिखाई से हटाकर आंदोलन के लिए उतारते हैं — उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आपको क्या अधिकार है?' उन्होंने आगे कहा कि जागरूकता का सही मार्ग विद्यार्थियों के लिए शिक्षा है, न कि राजनीतिक रैलियाँ। कदम के अनुसार, उद्धव ठाकरे और 'दिल्ली वाले पप्पू' — यानी कांग्रेस नेतृत्व — मिलकर स्कूली बच्चों को अपने आंदोलन का हथियार बना रहे हैं।

उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री काल पर सवाल

कदम ने उद्धव ठाकरे के राजनीतिक अनुभव पर भी सवाल दागा। उन्होंने कहा, 'कोई सत्ता को खत्म नहीं करता — उद्धव ठाकरे खुद मुख्यमंत्री रहे हैं, तो उन्हें इस्तीफा क्यों देना पड़ा?' कदम का तर्क था कि इतने अनुभव के बाद भी ठाकरे जब सरकार-विरोध की भाषा बोलते हैं, तो यह विरोधाभासी है।

PM मोदी की तारीफ और बालासाहब का संदर्भ

कदम ने प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों को मुफ्त अनाज, कश्मीर से धारा 370 हटाना, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और पाकिस्तान को मुँहतोड़ जवाब देना — ये सब मोदी की उपलब्धियाँ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बालासाहब ठाकरे जीवित होते, तो उद्धव को कांग्रेस के साथ जाकर मुख्यमंत्री बनने का अवसर कभी नहीं देते।

दशहरा रैली और 'असली शिवसेना' का दावा

कदम ने मुंबई में एक ही दिन दो अलग-अलग दशहरा रैलियों का उल्लेख किया — एक बालासाहब ठाकरे के विचारों से जुड़ी और दूसरी उद्धव ठाकरे की। उन्होंने दावा किया कि रैलियों की भीड़ से खुद स्पष्ट हो जाएगा कि 'असली शिवसेना' किसकी है। गौरतलब है कि शिवसेना के दो गुटों — एकनाथ शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना और उद्धव गुट — के बीच 'असली पार्टी' का विवाद चुनाव आयोग और अदालतों तक पहुँच चुका है।

महाराष्ट्र के किसान संकट पर चिंता

राजनीतिक हमले के साथ-साथ कदम ने महाराष्ट्र में जारी कृषि संकट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य में अकाल जैसे हालात हैं और किसानों की आत्महत्याएँ रुकी नहीं हैं। उनके अनुसार, असली ज़रूरत राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की नहीं, बल्कि संकटग्रस्त किसानों तक मदद पहुँचाने की है।

यह टकराव ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियाँ तेज़ हैं और दोनों शिवसेना गुट एक-दूसरे की विरासत और जनाधार पर दावा ठोक रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस पर ठोस नीतिगत प्रस्ताव की जगह भावनात्मक अपील ज़्यादा दिखती है।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामदास कदम ने उद्धव ठाकरे पर क्या आरोप लगाए?
रामदास कदम ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे स्कूली बच्चों को पढ़ाई से हटाकर राजनीतिक आंदोलन में उतार रहे हैं, जो उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। कदम के अनुसार, इस प्रकार बच्चों का राजनीतिक इस्तेमाल अनुचित और अनैतिक है।
रामदास कदम ने PM मोदी को 'गरीबों का भगवान' क्यों बताया?
कदम के अनुसार, करोड़ों लोगों को मुफ्त अनाज देना, कश्मीर से धारा 370 हटाना और अयोध्या में राम मंदिर बनवाना PM मोदी की ऐसी उपलब्धियाँ हैं जो उन्हें आम गरीब जनता का 'भगवान' बनाती हैं। यह बयान महाराष्ट्र की राजनीतिक बहस में सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से मोदी की छवि को मज़बूत करने की कोशिश है।
दशहरा रैली को लेकर दोनों शिवसेना गुटों में क्या विवाद है?
मुंबई में दशहरा रैली के लिए दोनों गुटों ने अलग-अलग आयोजन किए — एक एकनाथ शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना की और दूसरी उद्धव ठाकरे गुट की। कदम ने दावा किया कि रैलियों की भीड़ खुद बता देगी कि 'असली शिवसेना' कौन सी है।
कदम ने बालासाहब ठाकरे का संदर्भ क्यों दिया?
कदम ने तर्क दिया कि यदि बालासाहब ठाकरे जीवित होते, तो वे उद्धव ठाकरे को कांग्रेस के साथ गठबंधन कर मुख्यमंत्री बनने की अनुमति कभी नहीं देते। यह तर्क शिवसेना की 'हिंदुत्व और स्वतंत्र पहचान' की मूल विचारधारा के आधार पर उद्धव गुट की वैधता को चुनौती देने के लिए है।
महाराष्ट्र में किसान संकट को लेकर कदम ने क्या कहा?
कदम ने कहा कि महाराष्ट्र में अकाल जैसी स्थिति है और किसानों की आत्महत्याएँ जारी हैं। उनके अनुसार, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय संकटग्रस्त किसानों तक मदद पहुँचाना प्राथमिकता होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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