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रांची की 11 वर्षीया आश्वी वशिष्ठ ने नाक पर 80 बार हूला हूप घुमाकर जीता गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

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रांची की 11 वर्षीया आश्वी वशिष्ठ ने नाक पर 80 बार हूला हूप घुमाकर जीता गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

सारांश

खेल-खेल में शुरू हुआ हूला हूप का शौक रांची की 11 वर्षीया आश्वी वशिष्ठ को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड तक ले गया। एक मिनट में नाक पर 80 बार हूला हूप — और इसके अलावा एशिया व इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स भी। यह कहानी प्रतिभा, परिवार और हौसले की है।

मुख्य बातें

आश्वी वशिष्ठ ने 3 मई 2026 को एक मिनट में नाक पर 80 बार हूला हूप घुमाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।
रिकॉर्ड का प्रमाणपत्र और मेडल 8 अक्टूबर 2026 को उनके घर पहुँचा।
आश्वी डीएवी कपिलदेव स्कूल, रांची में कक्षा छह की छात्रा हैं, आयु 11 वर्ष ।
इनलाइन स्केट्स पर 6 मिनट 40 सेकंड में 397 बार हूला हूप — एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी नाम दर्ज।
स्केट्स पर 3 मिनट 46 सेकंड में 226 बार हूला हूप — इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी स्थान।
आश्वी ने यह रिकॉर्ड अपने दादा अशोक शर्मा , माँ कविता वशिष्ठ और पिता राहुल वशिष्ठ को समर्पित किया।

रांची की 11 वर्षीया आश्वी वशिष्ठ ने 3 मई 2026 को एक मिनट में नाक के चारों ओर 80 बार हूला हूप घुमाकर प्रतिष्ठित गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किया। इस असाधारण उपलब्धि का प्रमाणपत्र और मेडल 8 अक्टूबर 2026 को उनके घर पहुँचा, जिससे पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।

कैसे शुरू हुआ यह सफर

आश्वी ने बताया कि करीब चार-पाँच साल पहले उन्होंने हूला हूप को महज एक खेल के रूप में घुमाना शुरू किया था। शुरुआती दिनों में घर और आसपास के लोग उनकी लय और गति की सराहना करते थे। धीरे-धीरे यह शौक एक गंभीर अभ्यास में बदल गया। उन्होंने कहा कि करीब छह महीने पहले रिकॉर्ड बनाने का विचार मन में आया और तभी से लक्ष्य निर्धारित कर प्रतिदिन अभ्यास शुरू किया।

रिकॉर्ड का प्रदर्शन और प्रमाणन

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की शर्तों के अनुसार, आश्वी के प्रदर्शन की रिकॉर्डिंग डीएवी कपिलदेव स्कूल परिसर में की गई, जहाँ वह कक्षा छह की छात्रा हैं। नाक पर हूला हूप को संतुलित रखते हुए लगातार गति और लय बनाए रखना अत्यंत कठिन माना जाता है — और यही कारण है कि गिनीज ने इसे असाधारण प्रदर्शन की श्रेणी में स्थान दिया।

और भी रिकॉर्ड हैं आश्वी के नाम

आश्वी की उपलब्धियाँ केवल गिनीज तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने इनलाइन स्केट्स पहनकर नाक पर एंटी-क्लॉकवाइज दिशा में 6 मिनट 40 सेकंड में 397 बार हूला हूप घुमाकर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी अपना नाम दर्ज कराया है। इसके अलावा स्केट्स पर संतुलन बनाते हुए 3 मिनट 46 सेकंड में 226 बार हूला हूप घुमाने का रिकॉर्ड इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी उनके नाम है।

परिवार का प्रोत्साहन और समर्पण

23 सितंबर 2015 को जन्मी आश्वी, रांची के अपर बाज़ार निवासी राहुल वशिष्ठ और कविता वशिष्ठ की पुत्री हैं। वह अपनी इस सफलता का श्रेय पूरी तरह परिवार को देती हैं। उन्होंने कहा कि उनके दादा अशोक शर्मा हमेशा हौसला बढ़ाते रहे। आश्वी ने यह रिकॉर्ड अपने दादा, माँ और पिता को समर्पित किया है।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब देश में बाल खिलाड़ियों और असाधारण प्रतिभाओं को लेकर राष्ट्रीय जागरूकता बढ़ रही है। आश्वी जैसी उपलब्धियाँ न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश में बच्चों को नई ऊँचाइयाँ छूने की प्रेरणा देती हैं। आगे आश्वी का लक्ष्य अपने मौजूदा रिकॉर्ड को और बेहतर करना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जैसा आश्वी के मामले में भी हुआ। सवाल यह है कि क्या राज्य और केंद्र सरकार ऐसी बाल प्रतिभाओं को समय रहते पहचानकर उन्हें राष्ट्रीय मंच देने की दिशा में ठोस कदम उठाएँगी।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आश्वी वशिष्ठ ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड कैसे बनाया?
आश्वी वशिष्ठ ने 3 मई 2026 को एक मिनट में नाक के चारों ओर 80 बार हूला हूप घुमाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। यह प्रदर्शन रांची के डीएवी कपिलदेव स्कूल परिसर में रिकॉर्ड किया गया था।
आश्वी वशिष्ठ कौन हैं और कहाँ की रहने वाली हैं?
आश्वी वशिष्ठ रांची के अपर बाज़ार निवासी राहुल वशिष्ठ और कविता वशिष्ठ की 11 वर्षीया पुत्री हैं, जिनका जन्म 23 सितंबर 2015 को हुआ था। वह डीएवी कपिलदेव स्कूल में कक्षा छह की छात्रा हैं।
क्या आश्वी के नाम गिनीज के अलावा और भी रिकॉर्ड हैं?
हाँ, आश्वी ने इनलाइन स्केट्स पहनकर नाक पर 6 मिनट 40 सेकंड में 397 बार हूला हूप घुमाकर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराया है। इसके अलावा स्केट्स पर 3 मिनट 46 सेकंड में 226 बार हूला हूप घुमाने का रिकॉर्ड इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी उनके नाम है।
आश्वी ने हूला हूप की प्रैक्टिस कब से शुरू की?
आश्वी ने करीब चार-पाँच साल पहले हूला हूप को खेल के रूप में घुमाना शुरू किया था। लगभग छह महीने पहले रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य तय कर उन्होंने गंभीर अभ्यास शुरू किया।
आश्वी की सफलता में परिवार का क्या योगदान रहा?
आश्वी अपनी सफलता का पूरा श्रेय परिवार को देती हैं। उन्होंने विशेष रूप से दादा अशोक शर्मा का उल्लेख किया, जो हमेशा उनका हौसला बढ़ाते रहे। आश्वी ने यह रिकॉर्ड अपने दादा, माँ और पिता को समर्पित किया है।
राष्ट्र प्रेस
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