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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: परमार्थ निकेतन में 25 देशों के राजनयिकों ने गंगा तट पर किया योग, स्वामी चिदानंद ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: परमार्थ निकेतन में 25 देशों के राजनयिकों ने गंगा तट पर किया योग, स्वामी चिदानंद ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

सारांश

ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में 25 से अधिक देशों के राजनयिक गंगा तट पर एकजुट हुए — यह सिर्फ योगाभ्यास नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का जीवंत प्रदर्शन था। स्वामी चिदानंद ने योग के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश जोड़कर इस आयोजन को एक व्यापक सामाजिक अभियान का रूप दिया।

मुख्य बातें

21 जून 2026 को ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया।
25 से अधिक देशों के राजदूत, उच्चायुक्त और वरिष्ठ राजनयिक अधिकारियों ने गंगा तट पर योगाभ्यास किया।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने योग को 'जीवन जीने की कला' बताते हुए इसे वैश्विक जनआंदोलन करार दिया।
स्वामी चिदानंद ने प्रधानमंत्री मोदी के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान का समर्थन किया और नदियों को प्रदूषणमुक्त रखने की अपील की।
कार्यक्रम में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सहित सभी आयु वर्ग के देशी-विदेशी प्रतिभागियों ने भाग लिया।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर 21 जून 2026 को उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में 25 से अधिक देशों के राजदूत, उच्चायुक्त और वरिष्ठ राजनयिक अधिकारियों ने गंगा तट पर एकजुट होकर योगाभ्यास किया। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने इस अवसर पर योग को वैश्विक जनआंदोलन बताते हुए पर्यावरण संरक्षण का भी आह्वान किया।

गंगा तट पर वैश्विक योग का दृश्य

पवित्र गंगा के तट पर विभिन्न देशों के राजनयिकों को एक साथ योगासन करते देखना इस आयोजन की सबसे उल्लेखनीय विशेषता रही। कार्यक्रम में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सहित सभी आयु वर्ग के देशी-विदेशी प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दृश्य ने यह प्रमाणित किया कि योग अब किसी एक देश या संस्कृति की सीमा में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को जोड़ने का सेतु बन चुका है।

स्वामी चिदानंद का योग पर संदेश

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा, 'योग भारत की प्राचीन ऋषि-मुनि परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जो हजारों वर्षों से चली आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विरासत को हिमालय की गुफाओं और साधना स्थलों से निकालकर आम जनजीवन का हिस्सा बना दिया है।' उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र में सबसे पहले योग का विषय उठाकर प्रधानमंत्री मोदी ने इसे वैश्विक मंच पर स्थापित किया, जिसके परिणामस्वरूप आज दुनिया भर के लोग योग को अपनाकर स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ रहे हैं।

स्वामी चिदानंद ने योग को महज शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि 'जीवन जीने की कला' बताया। उनके अनुसार, 'योग व्यक्ति को स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन प्रदान करता है — यह जीवन को उत्सव में बदल देता है और व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।' उनका मानना है कि नियमित योगाभ्यास से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि मानसिक तनाव से भी मुक्ति मिलती है।

पर्यावरण संरक्षण का आह्वान

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने योग दिवस के मंच का उपयोग पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए भी किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा के साथ-साथ धरती और प्रकृति की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने नदियों को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाए रखने की अपील करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान का समर्थन किया। स्वामी चिदानंद ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए।

विदेशी प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया

कार्यक्रम में शामिल एक विदेशी महिला प्रतिभागी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि 'योग सभी के लिए है।' उन्होंने कहा कि योग आज वैश्विक पहचान बन चुका है और यह लोगों को स्वास्थ्य, शांति और संतुलन प्रदान कर रहा है। ऋषिकेश का यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि भारत की योग-विरासत अब कूटनीतिक सीमाओं को भी पार कर चुकी है।

आगे की राह

परमार्थ निकेतन में इस तरह के वार्षिक आयोजन योग को एक जीवंत वैश्विक आंदोलन के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। स्वामी चिदानंद सरस्वती के नेतृत्व में यह आश्रम न केवल आध्यात्मिक केंद्र, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य चेतना का वैश्विक मंच भी बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सॉफ्ट पावर की ठोस अभिव्यक्ति है। हालाँकि, यह सवाल उठता है कि वार्षिक उत्सव से आगे बढ़कर योग को स्वास्थ्य नीति में कितना व्यवस्थित रूप से शामिल किया जा रहा है। स्वामी चिदानंद का पर्यावरण संदेश सराहनीय है, लेकिन गंगा की सफाई और वृक्षारोपण अभियानों की ज़मीनी प्रगति की स्वतंत्र समीक्षा ज़रूरी है। योग दिवस का उत्साह तब सार्थक होगा जब यह जन-स्वास्थ्य के मापनीय सुधारों में परिणत हो।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परमार्थ निकेतन में योग दिवस 2026 पर क्या हुआ?
21 जून 2026 को ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 25 से अधिक देशों के राजदूत, उच्चायुक्त और वरिष्ठ राजनयिक अधिकारियों ने गंगा तट पर एकजुट होकर योगाभ्यास किया। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने इस कार्यक्रम का नेतृत्व किया।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने योग दिवस पर क्या संदेश दिया?
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने योग को भारत की प्राचीन ऋषि-मुनि परंपरा की अमूल्य धरोहर बताया और कहा कि यह केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का आह्वान करते हुए नदियों को स्वच्छ रखने और 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान का समर्थन किया।
'एक पेड़ मां के नाम' अभियान क्या है और स्वामी चिदानंद ने इसे क्यों समर्थन दिया?
'एक पेड़ मां के नाम' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वृक्षारोपण अभियान है, जिसमें प्रत्येक नागरिक से अपनी माँ के नाम पर एक पेड़ लगाने का आग्रह किया गया है। स्वामी चिदानंद ने इसे आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए आवश्यक बताते हुए समर्थन दिया।
योग दिवस पर विदेशी राजनयिकों की परमार्थ निकेतन में उपस्थिति का क्या महत्व है?
25 से अधिक देशों के राजनयिकों की उपस्थिति भारत की योग-विरासत की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाती है। यह भारत की सॉफ्ट पावर कूटनीति का प्रतीक है, जहाँ ऋषिकेश जैसा आध्यात्मिक स्थल अंतरराष्ट्रीय संवाद का मंच बन रहा है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस प्रत्येक वर्ष 21 जून को मनाया जाता है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र ने 2014 में इस दिवस की घोषणा की थी, और 2015 से यह वैश्विक स्तर पर मनाया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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