30 जून 2026
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आरएलडी संसदीय बोर्ड पुनर्गठित: केसी त्यागी को अध्यक्षता, 16 सदस्यों की नई टीम

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आरएलडी संसदीय बोर्ड पुनर्गठित: केसी त्यागी को अध्यक्षता, 16 सदस्यों की नई टीम

सारांश

आरएलडी ने 16 सदस्यीय संसदीय बोर्ड का पुनर्गठन किया — अध्यक्षता केसी त्यागी को, जो महज तीन महीने पहले पार्टी में शामिल हुए थे। जयंत सिंह का यह कदम एनडीए में रहते हुए संगठनात्मक ढाँचे को मजबूत करने की कोशिश है।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) ने 30 जून 2026 को 16 सदस्यीय संसदीय बोर्ड के पुनर्गठन की घोषणा की।
बोर्ड की अध्यक्षता वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद केसी त्यागी को सौंपी गई; 4 विशेष आमंत्रित सदस्य भी शामिल।
पार्टी अध्यक्ष जयंत सिंह स्वयं भी संसदीय समिति के सदस्य रहेंगे।
केसी त्यागी 22 मार्च 2026 को आरएलडी में शामिल हुए थे; पूर्व में जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे।
आरएलडी ने लोकसभा 2024 में एनडीए के साथ बिजनौर और बागपत दोनों सीटें जीती थीं।

राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) ने 30 जून 2026 को नई दिल्ली में 16 सदस्यीय संसदीय बोर्ड के पुनर्गठन की घोषणा की, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद केसी त्यागी को सौंपी गई है। बोर्ड में चार विशेष आमंत्रित सदस्य भी शामिल होंगे। पार्टी अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत सिंह ने यह जानकारी एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की।

जयंत सिंह का बयान

जयंत सिंह ने एक्स पर लिखा, 'मुझे आरएलडी संसदीय बोर्ड के गठन की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है, जिसकी अध्यक्षता पूर्व सांसद के.सी. त्यागी करेंगे। मैं स्वयं भी इस समिति का सदस्य रहूंगा। इस समिति में पार्टी संगठन के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, पार्टी के पुराने और समर्पित कार्यकर्ता तथा कुछ प्रतिष्ठित नागरिक भी शामिल होंगे।' पार्टी के अनुसार यह कदम संगठन को मजबूत करने और संसदीय रणनीति को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

बोर्ड की संरचना

नवगठित संसदीय बोर्ड में पूर्व सांसदों, पूर्व मंत्रियों और विधायकों को प्रमुखता से जगह दी गई है। 16 नियमित सदस्यों के अतिरिक्त चार विशेष आमंत्रित सदस्य भी बोर्ड की बैठकों में भाग लेंगे। जयंत सिंह स्वयं इस समिति में शामिल रहेंगे, जो पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी का संकेत है।

केसी त्यागी: राजनीतिक सफर

गाजियाबाद के मोरटा गाँव में 1950 में एक किसान परिवार में जन्मे केसी त्यागी ने छात्र राजनीति से अपना सार्वजनिक जीवन शुरू किया। वे समाजवादी आंदोलन से राजनीति में आए और आपातकाल के दौरान संजय गांधी के विरोध में आवाज उठाने वाले नेताओं में उनकी गिनती होती है। 1989 से 1991 तक वे हापुड़ लोकसभा सीट से सांसद रहे और 2013 से 2016 तक बिहार से राज्यसभा सदस्य। वे जनता दल तथा जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख प्रवक्ता भी रहे। 2024 में व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दिया और 22 मार्च 2026 को आरएलडी में शामिल हो गए।

आरएलडी की पृष्ठभूमि

राष्ट्रीय लोक दल की स्थापना पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पुत्र चौधरी अजीत सिंह ने जनता दल से अलग होकर की थी। अजीत सिंह पहले कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुए, फिर भारतीय किसान कामगार पार्टी बनाई, जो 1999 में आरएलडी के रूप में पुनर्स्थापित हुई। अजीत सिंह 2001 से 2003 तक कृषि मंत्री और 2011 से 2014 तक नागरिक उड्डयन मंत्री रहे। पार्टी किसानों, मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के हितों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करती है और खुद को समाजवादी व धर्मनिरपेक्ष विचारधारा पर आधारित बताती है।

लोकसभा 2024 और आगे की राह

लोकसभा चुनाव 2024 में आरएलडी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ चुनाव लड़ा और उत्तर प्रदेश की बिजनौरबागपत दोनों सीटों पर जीत दर्ज की। नए संसदीय बोर्ड का गठन पार्टी की संसदीय उपस्थिति को और अधिक संगठित व रणनीतिक रूप से सक्रिय बनाने की दिशा में अगला कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पार्टी की तत्काल विश्वसनीयता की ज़रूरत को दर्शाता है। जयंत सिंह एनडीए में रहते हुए संगठनात्मक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह बोर्ड केवल प्रतीकात्मक है या इसे वास्तविक रणनीतिक स्वायत्तता मिलेगी। आरएलडी का पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आधार उसकी असली ताकत है — बोर्ड की परीक्षा इस आधार को संसद में कितनी प्रभावी आवाज दे पाती है, उससे होगी।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरएलडी के नए संसदीय बोर्ड में कौन-कौन शामिल हैं?
आरएलडी के नए 16 सदस्यीय संसदीय बोर्ड की अध्यक्षता पूर्व सांसद केसी त्यागी करेंगे और पार्टी अध्यक्ष जयंत सिंह भी इसके सदस्य रहेंगे। बोर्ड में पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री, विधायक, पार्टी पदाधिकारी और प्रतिष्ठित नागरिक शामिल हैं, साथ ही चार विशेष आमंत्रित सदस्य भी होंगे।
केसी त्यागी कौन हैं और आरएलडी से उनका क्या संबंध है?
केसी त्यागी 1950 में गाजियाबाद के मोरटा गाँव में जन्मे वरिष्ठ राजनेता हैं, जो 1989-91 में हापुड़ से लोकसभा और 2013-16 में बिहार से राज्यसभा सदस्य रहे। वे जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहने के बाद 22 मार्च 2026 को आरएलडी में शामिल हुए और अब संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं।
आरएलडी ने संसदीय बोर्ड का पुनर्गठन क्यों किया?
पार्टी के अनुसार यह पुनर्गठन संगठन को मजबूत करने और संसदीय रणनीति को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया गया है। लोकसभा 2024 में दो सीटें जीतने के बाद आरएलडी एनडीए में अपनी भूमिका को और सुदृढ़ करना चाहती है।
राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) की स्थापना कब और कैसे हुई?
आरएलडी की स्थापना चौधरी अजीत सिंह ने जनता दल से अलग होकर की थी। उन्होंने पहले भारतीय किसान कामगार पार्टी बनाई, जो 1999 में राष्ट्रीय लोक दल के रूप में पुनर्स्थापित हुई। अजीत सिंह पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पुत्र थे।
लोकसभा 2024 में आरएलडी का प्रदर्शन कैसा रहा?
लोकसभा चुनाव 2024 में आरएलडी ने BJP नेतृत्व वाले एनडीए के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और उत्तर प्रदेश की बिजनौर और बागपत दोनों सीटों पर जीत दर्ज की। यह पार्टी की एनडीए गठबंधन में मजबूत उपस्थिति का संकेत माना गया।
राष्ट्र प्रेस
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