आरएसएस ने पश्चिम एशिया में शांति की पुकार की, कहा- 'सरकार राष्ट्र के सर्वोच्च हित में कार्यरत'
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पानीपत, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। रविवार को पानीपत के समालखा में आयोजित अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच शांति की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संगठन की देश भर में उपस्थिति को और भी बढ़ाने की योजनाओं का भी उल्लेख किया।
होसबले ने कहा कि आरएसएस का मानना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष जल्द समाप्त होंगे। उन्होंने कहा, "जिस देश में आप निवास करते हैं, वहां के लिए आपको अच्छा करना चाहिए। युद्ध के कई कारण होते हैं, लेकिन हम शांति की कामना करते हैं।"
उन्होंने भारत सरकार के प्रयासों की सराहना की और कहा, "सरकार राष्ट्र के सर्वोच्च हित में सभी आवश्यक कदम उठा रही है।"
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई की मृत्यु पर होसबले ने कहा, "अगर लोग शोक व्यक्त करना चाहते हैं, तो यह शांति से होना चाहिए। भारत की परंपरा है कि मृत्यु के बाद कोई शत्रु नहीं रहता।"
संघ की संगठनात्मक योजनाओं पर चर्चा करते हुए होसबले ने बताया कि संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पूरे देश में आरएसएस की शाखाओं और साप्ताहिक बैठकों को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान में, 55,683 स्थानों पर 88,949 शाखाएं कार्यरत हैं।
उन्होंने अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के सदस्यों के चयन की प्रक्रिया का भी वर्णन किया। होसबले ने कहा, "यह खुशी की बात है कि यह अधिवेशन दूसरी बार इसी परिसर में हो रहा है।"
संघ के संचालन क्षेत्रों की पहचान पर होसबले ने कहा कि संगठन के पास ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए विशिष्ट परिभाषाएं हैं। वर्तमान में, ग्रामीण क्षेत्रों में 55 स्थानों की पहचान की गई है।
संघ के संगठनात्मक पुनर्गठन की संभावना पर उन्होंने कहा कि किसी भी बदलाव की औपचारिक घोषणा की जाएगी।
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को हरियाणा के समालखा में शुरू हुई, जहां वरिष्ठ नेताओं ने पिछले वर्ष के कार्यों की समीक्षा की और योजनाओं पर चर्चा की।