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आरटीआई देरी मामला: राजस्थान के आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी ने यूपीएससी को बनाया पक्षकार, 17 नवंबर को सीआईसी में सुनवाई

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आरटीआई देरी मामला: राजस्थान के आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी ने यूपीएससी को बनाया पक्षकार, 17 नवंबर को सीआईसी में सुनवाई

सारांश

राजस्थान के आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी ने आरटीआई सूचना देरी के मामले में यूपीएससी को केंद्रीय सूचना आयोग की कार्यवाही में पक्षकार बनाया है। 17 नवंबर को सीआईसी में सुनवाई होगी — जो देश के शीर्ष भर्ती संस्थान की जवाबदेही पर एक असामान्य लेकिन अहम कानूनी परीक्षण है।

मुख्य बातें

राजस्थान कैडर के आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी ने 21 अक्टूबर 2026 को आरटीआई देरी मामले में यूपीएससी को पक्षकार बनाया।
मामला 17 नवंबर 2026 को केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) , नई दिल्ली में सुनवाई के लिए निर्धारित।
आरटीआई अधिनियम के तहत सरकारी प्राधिकरणों को 30 दिनों के भीतर जानकारी देना अनिवार्य है।
राजस्थान सूचना आयोग (आरआईसी) ने एक अलग मामले में आईएएस अधिकारी अर्चना सिंह को भी नोटिस जारी किया है।
दोनों मामले राजस्थान में सरकारी पारदर्शिता और आरटीआई क्रियान्वयन पर बढ़ते दबाव को दर्शाते हैं।

राजस्थान कैडर के आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को 'सूचना का अधिकार' (आरटीआई) अधिनियम के तहत तय समय सीमा में जानकारी न मिलने से जुड़े एक मामले में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को औपचारिक रूप से पक्षकार बनाया। यह मामला अब 17 नवंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के समक्ष सुनवाई के लिए निर्धारित है।

मामले का मूल विवाद

आरटीआई अधिनियम के अंतर्गत किसी भी सरकारी प्राधिकरण को आवेदन प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर सूचना देना अनिवार्य है। चौधरी का आरोप है कि यूपीएससी ने इस निर्धारित समय सीमा का पालन नहीं किया। यूपीएससी को पक्षकार बनाए जाने के बाद अब आयोग को सीआईसी की कार्यवाही में अपना पक्ष रखना होगा।

गौरतलब है कि आरटीआई अधिनियम सार्वजनिक प्राधिकरणों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण कानूनी साधन है। किसी आईपीएस अधिकारी द्वारा देश के शीर्ष भर्ती संस्थान को सीधे पक्षकार बनाना इस मामले को असामान्य बनाता है।

केंद्रीय सूचना आयोग की भूमिका

सीआईसी आरटीआई अधिनियम के क्रियान्वयन से जुड़ी शिकायतों और द्वितीय अपीलों की सुनवाई के लिए सर्वोच्च वैधानिक निकाय है। 17 नवंबर की सुनवाई में आयोग यह तय करेगा कि देरी के लिए कोई दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए या नहीं, और क्या मांगी गई जानकारी तुरंत उपलब्ध कराई जाए।

आगामी सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी और इससे मामले की वास्तविक परिस्थितियों पर अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है।

राजस्थान में एक अन्य आरटीआई मामला

इसी बीच, राजस्थान सूचना आयोग (आरआईसी) ने आरटीआई प्रक्रिया से जुड़े एक अलग मामले में कार्मिक विभाग की सचिव एवं आईएएस अधिकारी अर्चना सिंह को नोटिस जारी किया है। रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में भी जल्द सुनवाई होने की संभावना है, हालांकि नोटिस से जुड़े विशिष्ट आरोपों और संबंधित अधिकारी की प्रतिक्रिया के बारे में अभी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में आरटीआई के क्रियान्वयन पर अलग-अलग मोर्चों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

आम जनता पर असर

ये दोनों मामले सरकारी जवाबदेही की व्यापक बहस का हिस्सा हैं। आलोचकों का कहना है कि जब स्वयं सरकारी अधिकारी सूचना पाने में देरी का सामना करते हैं, तो आम नागरिकों की स्थिति और भी कठिन हो जाती है। आरटीआई कार्यकर्ता लंबे समय से यह माँग करते आए हैं कि समय सीमा उल्लंघन पर दंड को अधिक कठोर बनाया जाए।

आगे क्या होगा

17 नवंबर 2026 को सीआईसी की सुनवाई यह निर्धारित करने में निर्णायक होगी कि पंकज चौधरी और यूपीएससी से जुड़ा यह मामला किस दिशा में जाता है। दोनों आरटीआई मामलों के नतीजे सरकारी प्राधिकरणों में पारदर्शिता के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो आम आवेदक की स्थिति क्या होगी। राजस्थान में एक साथ दो आरटीआई मामलों का सामने आना संकेत देता है कि सूचना के अधिकार के क्रियान्वयन में व्यवस्थागत खामियाँ बनी हुई हैं। 17 नवंबर की सीआईसी सुनवाई के नतीजे भविष्य में यूपीएससी जैसे संस्थानों की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकते हैं।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंकज चौधरी का आरटीआई मामला क्या है?
राजस्थान कैडर के आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी ने आरटीआई अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी समय सीमा में न मिलने पर यूपीएससी को केंद्रीय सूचना आयोग की कार्यवाही में पक्षकार बनाया है। यह मामला 17 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में सीआईसी के सामने सुनवाई के लिए है।
यूपीएससी को इस मामले में पक्षकार क्यों बनाया गया?
आरटीआई अधिनियम के अनुसार सरकारी प्राधिकरणों को 30 दिनों के भीतर जानकारी देना अनिवार्य है। आरोप है कि यूपीएससी ने इस समय सीमा का पालन नहीं किया, जिसके चलते चौधरी ने आयोग को सीआईसी की कार्यवाही में पक्षकार बनाकर उसे जवाबदेह ठहराने की कोशिश की है।
केंद्रीय सूचना आयोग इस मामले में क्या कर सकता है?
सीआईसी आरटीआई अपीलों और शिकायतों की सुनवाई का सर्वोच्च वैधानिक निकाय है। यह सूचना जारी करने का आदेश दे सकता है, देरी के लिए जुर्माना लगा सकता है और अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है।
राजस्थान में आईएएस अधिकारी अर्चना सिंह को नोटिस क्यों जारी किया गया?
रिपोर्टों के अनुसार, राजस्थान सूचना आयोग ने कार्मिक विभाग की सचिव एवं आईएएस अधिकारी अर्चना सिंह को आरटीआई प्रक्रिया से जुड़े एक अन्य मामले में नोटिस जारी किया है। नोटिस के विशिष्ट कारणों और अधिकारी की प्रतिक्रिया की जानकारी अभी तक उपलब्ध नहीं है।
इन दोनों मामलों का आम नागरिकों पर क्या असर है?
ये दोनों मामले यह उजागर करते हैं कि सरकारी प्राधिकरण आरटीआई की समय सीमाओं का उल्लंघन कर रहे हैं, जो नागरिकों के सूचना के अधिकार को कमजोर करता है। इन मामलों के नतीजे भविष्य में सरकारी संस्थाओं को समय पर जानकारी देने के लिए अधिक जवाबदेह बनाने में सहायक हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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