भारत में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाना क्यों है बेहद जरूरी?
सारांश
Key Takeaways
- सड़क सुरक्षा हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
- शराब पीकर वाहन चलाना खतरनाक है।
- सीट बेल्ट
- हेलमेट
- यातायात नियमों
नई दिल्ली, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सड़क पर चलते समय हम कई बार सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर देते हैं। जल्दी पहुंचने के लिए तेज रफ्तार में गाड़ी चलाना हो या बिना हेलमेट के सड़क पर निकल जाना, हम अक्सर सोचते हैं कि क्या ही हो जाएगा? लेकिन सच्चाई इससे कहीं अधिक गंभीर है। भारत में सड़क दुर्घटनाएं हर साल लाखों लोगों की जान ले रही हैं। यही कारण है कि हर साल 11 से 17 जनवरी के बीच राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जाता है। यह केवल एक औपचारिक अभियान नहीं है, बल्कि लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने और नियमों का पालन करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
आंकड़ों पर गौर करें तो केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, साल 2024 में भारत में सड़क दुर्घटनाओं में 2.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कुल मिलाकर 177,000 से अधिक लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं, यानी प्रतिदिन लगभग 485 लोग। यह केवल संख्या नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज और परिवारों के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
दुनिया की तुलना में भारत की स्थिति चिंताजनक है। विश्व सड़क सांख्यिकी 2024 के अनुसार, प्रति लाख जनसंख्या मौत की दर चीन में 4.3 और अमेरिका में 12.76 है, जबकि भारत में यह 11.89 है। इसका अर्थ यह है कि दुनिया के बड़े देशों की तुलना में भारत में सड़क हादसों में मौतों का प्रतिशत काफी अधिक है।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह का महत्व बस इसी बात में नहीं है कि लोग जागरूक हों। इस दौरान कई अभियान चलाए जाते हैं, जो सड़क सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं। उदाहरण के लिए, शराब पीकर गाड़ी चलाना सबसे जरूरी संदेश है। शराब के नशे में वाहन चलाना सबसे बड़ा खतरा है और इसी कारण इस सप्ताह इस पर विशेष जोर दिया जाता है।
साथ ही, सीट बेल्ट का उपयोग भी बार-बार याद दिलाया जाता है। कई लोग सोचते हैं कि बस थोड़ी दूरी ही तो जाना है, सीट बेल्ट की आवश्यकता नहीं है, लेकिन छोटी टक्कर में भी सीट बेल्ट कई जानें बचा सकती है। वहीं, दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य बताया जाता है, क्योंकि यह सिर पर चोट लगने से बचाता है और गंभीर दुर्घटनाओं में जीवन बचा सकता है।
तेज रफ्तार से बचना भी अभियान का एक प्रमुख हिस्सा है। सड़क पर तेज गति मौत की दहलीज पर चलने जैसा है। कभी-कभी लोग मिनटों की बचत के लिए अपनी और दूसरों की जान खतरे में डाल देते हैं। इसके अतिरिक्त, यातायात नियमों का पालन करना भी बहुत आवश्यक है। रेड लाइट का इंतजार करना, जेबरा क्रॉसिंग का उपयोग करना और ओवरटेक नियमों का पालन करना छोटी लेकिन जीवनरक्षक आदतें हैं।
सड़क सुरक्षा केवल सरकार या पुलिस का काम नहीं है। यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है। अगर हम खुद सुरक्षित रहेंगे, नियमों का पालन करेंगे और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखेंगे तो दुर्घटनाओं की संख्या में कमी संभव है। सड़क दुर्घटनाएं केवल मृतकों की बात नहीं हैं। घायल होने वाले लोग सालों तक दर्द और परेशानी झेलते हैं और उनके परिवार पर भी भारी आर्थिक और मानसिक बोझ पड़ता है।