क्या सिर्फ सैन्य शक्ति होना पर्याप्त नहीं है, क्या उसे प्रयोग करने की इच्छाशक्ति भी आवश्यक है?
सारांश
Key Takeaways
- सैन्य शक्ति का होना आवश्यक है।
- इच्छाशक्ति के बिना सैन्य शक्ति बेकार है।
- हवाई शक्ति आधुनिक सैन्य रणनीति का एक महत्वपूर्ण घटक है।
- भारत को सशक्त और आधुनिक बनाना आवश्यक है।
नई दिल्ली, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने स्पष्टता से कहा कि वही देश सुरक्षित होता है जिसके पास मजबूत और सक्षम सैन्य शक्ति होती है। उनके अनुसार, आर्थिक, कूटनीतिक या तकनीकी शक्ति कितनी भी मजबूत क्यों न हो, यदि उसके पीछे सशक्त सैन्य बल नहीं है, तो कोई भी राष्ट्र दूसरे देशों के दबाव में आ सकता है। उन्होंने वेनेजुएला और इराक के उदाहरण दिए।
एपी सिंह ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित 22वें सुब्रतो मुखर्जी सेमिनार में कहा कि सैन्य शक्ति राष्ट्रीय शक्ति का अंतिम निर्णायक तत्व होती है। इसके बिना कोई भी देश सुरक्षित नहीं रह सकता।
सेमिनार के दौरान, उन्होंने उदाहरण दिया कि वेनेजुएला और इराक में कमजोर सैन्य स्थिति के कारण बाहरी दबाव देखा गया। उन्होंने कहा कि अंततः वही देश सुरक्षित रहता है जिसका सैन्य बल मजबूत और सक्षम है।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि केवल सैन्य शक्ति होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे प्रयोग करने की इच्छाशक्ति भी आवश्यक है। यदि कोई देश केवल संयम दिखाता है, लेकिन उसकी शक्ति स्पष्ट नहीं है, तो उसे कमजोरी के रूप में देखा जाता है। जबकि जब कोई देश मजबूत होकर संयम दिखाता है, तब वह संयम क्षमता और आत्मविश्वास के रूप में स्वीकार किया जाता है।
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि हाल के वर्षों में जो सैन्य शक्ति ने अपेक्षित परिणाम दिए हैं, वह हवाई शक्ति है। चाहे संघर्ष वाले क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान हो, आतंकवादी ढांचों पर सटीक प्रहार करना हो, या फिर पाकिस्तान के ठिकानों पर कार्रवाई कर स्पष्ट संदेश देना हो, इन सभी मामलों में हवाई शक्ति ने निर्णायक भूमिका निभाई है।
उन्होंने हवाई शक्ति की विशेषताओं का उल्लेख किया, जिसमें तेज, सटीक और प्रभावी कार्रवाई करने की क्षमता शामिल है। इसी कारण हवाई शक्ति आधुनिक सैन्य रणनीति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक बन चुकी है।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यदि भारत को एक प्रभावशाली और विश्वसनीय शक्ति के रूप में स्थापित रहना है, तो हवाई शक्ति पर निरंतर ध्यान और निवेश आवश्यक है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भारतीय वायुसेना के संस्थापक एयर मार्शल सुब्रतो मुखर्जी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सीमित संसाधनों में भी वायुसेना की मजबूत नींव रखी।
उन्होंने कहा कि सुब्रतो मुखर्जी की दूरदृष्टि ने भारतीय वायुसेना को सही दिशा दी और जैसा कहा जाता है कि अच्छी शुरुआत आधी सफलता होती है।
वायुसेना प्रमुख ने बताया कि आज भारतीय वायुसेना पहले से कहीं बेहतर स्थिति में है और संसाधन भी लगातार बेहतर हो रहे हैं। वर्तमान परिस्थितियों में वे पूर्ववर्ती वायुसेना प्रमुखों की तुलना में अधिक सक्षम वातावरण में कार्य कर रहे हैं, लेकिन आत्मसंतोष से बचना जरूरी है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय वायुसेना को पिछली सफलताओं पर नहीं रुकना चाहिए, बल्कि भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए खुद को और अधिक सशक्त, आधुनिक और तैयार बनाना होगा। यह आयोजन सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज द्वारा ‘राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यताओं’ पर मंथन किया गया था।