क्या समुद्र प्रदूषण नियंत्रण में ‘समुद्र प्रताप’ करेगा प्रभावी भूमिका?

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क्या समुद्र प्रदूषण नियंत्रण में ‘समुद्र प्रताप’ करेगा प्रभावी भूमिका?

सारांश

क्या आपको पता है कि भारतीय तटरक्षक बल में एक नया प्रदूषण नियंत्रण पोत शामिल होने जा रहा है? ‘समुद्र प्रताप’ देश में समुद्री प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। जानें इस पोत की ख़ासियतें और यह कैसे समुद्र की सुरक्षा में मदद करेगा।

Key Takeaways

  • ‘समुद्र प्रताप’ प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • यह पोत उच्च तकनीक और सेंसर से लैस है।
  • गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित।
  • आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम।
  • 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से बना।

नई दिल्ली, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ भारतीय तटरक्षक बल के बेड़े में शामिल होने जा रहा है। तटरक्षक बल का यह अत्याधुनिक पोत प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण योगदान देगा, साथ ही यह नवीनतम हथियारों से भी सुसज्जित है। इस पोत में अनेक उन्नत तकनीकें और सेंसर भी लगाए गए हैं। यह जहाज इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम, इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम और ऑटोमेटेड पावर मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है। इसके अतिरिक्त, इसमें एक उच्च क्षमता वाली बाहरी अग्निशामक प्रणाली भी मौजूद है।

भारतीय तटरक्षक बल के अनुसार, यह पोत गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित है। प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 5 जनवरी को गोवा में तटरक्षक बल के बेड़े में शामिल करेंगे। यह 114.5 मीटर लंबा और लगभग 4,200 टन वजनी है, और इसे 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक से बनाया गया है। ‘समुद्र प्रताप’ की गति 22 नॉट से अधिक है, जिससे यह लंबी दूरी के परिचालनों के लिए अत्यंत सक्षम है।

नए पोत के शामिल होने से भारतीय तटरक्षक बल की समुद्री प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में क्षमता में वृद्धि होगी। साथ ही, अग्निशामक और समुद्री सुरक्षा में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। यह पोत तेल रिसाव नियंत्रण, समुद्री आपदाओं में त्वरित प्रतिक्रिया और संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह दो पोतों की परियोजना का पहला पोत है, जिसे 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से तैयार किया गया है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह जहाज तेल रिसाव का पता लगाने और गाढ़े तेल से प्रदूषक निकालने में सक्षम है। यह समुद्र में दूषित पानी से तेल को अलग करने और व्यापक प्रदूषण नियंत्रण अभियानों में भी सहायता कर सकता है।

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि ‘समुद्र प्रताप’ के निर्माण ने आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के लक्ष्यों को मजबूत किया है। इसे विशेष रूप से समुद्री प्रदूषण नियंत्रण और आपदा प्रतिक्रिया के लिए विकसित किया गया है। यह भारतीय तटरक्षक का पहला जहाज है, जिसमें डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम (डीपी-1) लगा है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए इसमें अत्याधुनिक उपकरण शामिल हैं।

ऑयल फिंगर प्रिंटिंग मशीन, रासायनिक पदार्थों का पता लगाने वाला जाइरो-स्टेबलाइज्ड डिटेक्टर और प्रदूषण विश्लेषण की प्रयोगशाला सुविधा इस जहाज में शामिल हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ‘समुद्र प्रताप’ के शामिल होने से भारतीय तटरक्षक बल की समुद्री सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी।

Point of View

बल्कि आपातकालीन स्थितियों में त्वरित कार्रवाई भी सुनिश्चित करेगा। एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में यह कदम महत्वपूर्ण है, जो देश की समुद्री सुरक्षा को और मजबूती प्रदान करेगा।
NationPress
21/02/2026
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