संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जे से भारत बर्बाद: RSS प्रमुख के बयान पर कांग्रेस नेता अनिल जयहिंद का तीखा पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष अनिल जयहिंद ने 20 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आरएसएस प्रमुख के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संघ संचालक अपने ही बयानों से महज दो महीने में पलट गए हैं। उनके अनुसार, 6 अगस्त को आरएसएस प्रमुख ने युवा आंदोलनों को 'राष्ट्रवादी' करार देते हुए सरकार से संवाद की अपील की थी, लेकिन अब वे बिल्कुल विपरीत रुख अपना रहे हैं। जयहिंद ने आरोप लगाया कि देश की संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जे से भारत को गंभीर नुकसान हो रहा है।
मुख्य आरोप: बयान से पलटे संघ संचालक
जयहिंद ने कहा, 'संघ संचालक ने 6 अगस्त को खुद कहा था कि युवाओं के जो आंदोलन हैं, वे हमारे राष्ट्रवादी बच्चे हैं और सरकार को उनसे संवाद करना चाहिए, उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए। अब पता नहीं दो महीने में ऐसी क्या बात हो गई कि वे अपने उसी बयान से बिल्कुल पलट चुके हैं।' कांग्रेस नेता ने इसे विरोधाभासी रवैया बताया और इस पर गंभीर सवाल उठाए।
अल्बानिया का उदाहरण और संवैधानिक संस्थाएं
जयहिंद ने कहा कि आरएसएस प्रमुख जिन देशों — अल्बानिया, फ्रांस, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका — का उदाहरण दे रहे हैं, वे वही देश हैं जहाँ संवैधानिक संस्थाओं को तहस-नहस किया गया। उन्होंने कहा, 'अल्बानिया का सुप्रीम कोर्ट सरकार की इच्छा के अनुरूप फैसले देता था और उन फैसलों में न्याय नहीं था।' उनके अनुसार, चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय, सीबीआई और ईडी पर कथित कब्जे से भारत भी उसी राह पर जा रहा है।
'व्हाय नेशंस फेल' का संदर्भ
कांग्रेस नेता ने नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्रियों डैरोन एसेमोग्लू और जेम्स रॉबिन्सन की पुस्तक 'व्हाय नेशंस फेल' का हवाला देते हुए कहा कि इस शोध में स्पष्ट किया गया है कि जिन देशों में अभिजात वर्ग कानून को अपने हिसाब से तोड़-मरोड़कर संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा करता है, वे देश बर्बाद हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि हर राजनेता को यह पुस्तक पढ़नी चाहिए। गौरतलब है कि एसेमोग्लू और रॉबिन्सन को इस शोध के लिए नोबेल पुरस्कार मिल चुका है।
बेरोज़गारी और युवा आंदोलन
फ्रांस के आंदोलन का संदर्भ देते हुए जयहिंद ने कहा कि भारत में भी महंगाई और बेरोज़गारी की स्थितियां वैसी ही हैं। उन्होंने नीति आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 8 करोड़ 70 लाख युवा — जो जर्मनी की आबादी से भी अधिक हैं — न रोज़गार में हैं, न शिक्षा में और न ही किसी प्रशिक्षण में। उनके अनुसार, यह आंकड़ा मोदी सरकार के नीति आयोग का ही है।
भारत में हिंसक भीड़तंत्र नहीं होगा
इन सब आरोपों के बावजूद जयहिंद ने कहा कि भारत बुद्ध और महात्मा गांधी का देश है, जो शांति में विश्वास करता है, इसलिए यहाँ हिंसक भीड़तंत्र नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जो हिंसा हो रही है वह — उनके कथन के अनुसार — राज्य और पुलिस द्वारा, या ऐसे लोगों द्वारा हो रही है जो खुद को हिंदू बताकर बाहर से आते हैं। उन्होंने नवरात्रि के दौरान छोटी बच्चियों पर हुई कथित हिंसा का उल्लेख करते हुए इसकी कड़ी निंदा की। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में युवा आंदोलन चर्चा में हैं और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर बहस जारी है।