20 अक्टूबर 2026
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संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जे से भारत बर्बाद: RSS प्रमुख के बयान पर कांग्रेस नेता अनिल जयहिंद का तीखा पलटवार

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संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जे से भारत बर्बाद: RSS प्रमुख के बयान पर कांग्रेस नेता अनिल जयहिंद का तीखा पलटवार

सारांश

कांग्रेस ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष अनिल जयहिंद ने RSS प्रमुख पर सीधा हमला बोला — आरोप लगाया कि 6 अगस्त के बयान से पलटकर अब विपरीत राग अलापा जा रहा है। चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और जांच एजेंसियों पर कब्जे का दावा, नोबेल विजेताओं की किताब का हवाला, और 8.7 करोड़ बेरोज़गार युवाओं का नीति आयोग डेटा — यह पलटवार कई मोर्चों पर एक साथ।

मुख्य बातें

कांग्रेस ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष अनिल जयहिंद ने 20 अक्टूबर 2026 को RSS प्रमुख के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
जयहिंद का आरोप — RSS प्रमुख ने 6 अगस्त को युवा आंदोलनों को 'राष्ट्रवादी' बताया था, अब दो महीने में बिल्कुल उल्टा रुख अपनाया।
कांग्रेस नेता ने चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय, CBI और ED पर कब्जे का आरोप लगाया।
नोबेल विजेता लेखकों डैरोन एसेमोग्लू और जेम्स रॉबिन्सन की पुस्तक 'व्हाय नेशंस फेल' का हवाला देते हुए संवैधानिक संस्थाओं के क्षरण को देश के पतन से जोड़ा।
नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार 15 से 29 वर्ष आयु के 8 करोड़ 70 लाख युवा न रोज़गार में, न शिक्षा में और न प्रशिक्षण में हैं।
जयहिंद ने कहा कि भारत बुद्ध और गांधी का देश है, इसलिए हिंसक भीड़तंत्र की आशंका नहीं, लेकिन मौजूदा स्थितियाँ गंभीर हैं।

कांग्रेस ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष अनिल जयहिंद ने 20 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आरएसएस प्रमुख के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संघ संचालक अपने ही बयानों से महज दो महीने में पलट गए हैं। उनके अनुसार, 6 अगस्त को आरएसएस प्रमुख ने युवा आंदोलनों को 'राष्ट्रवादी' करार देते हुए सरकार से संवाद की अपील की थी, लेकिन अब वे बिल्कुल विपरीत रुख अपना रहे हैं। जयहिंद ने आरोप लगाया कि देश की संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जे से भारत को गंभीर नुकसान हो रहा है।

मुख्य आरोप: बयान से पलटे संघ संचालक

जयहिंद ने कहा, 'संघ संचालक ने 6 अगस्त को खुद कहा था कि युवाओं के जो आंदोलन हैं, वे हमारे राष्ट्रवादी बच्चे हैं और सरकार को उनसे संवाद करना चाहिए, उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए। अब पता नहीं दो महीने में ऐसी क्या बात हो गई कि वे अपने उसी बयान से बिल्कुल पलट चुके हैं।' कांग्रेस नेता ने इसे विरोधाभासी रवैया बताया और इस पर गंभीर सवाल उठाए।

अल्बानिया का उदाहरण और संवैधानिक संस्थाएं

जयहिंद ने कहा कि आरएसएस प्रमुख जिन देशों — अल्बानिया, फ्रांस, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका — का उदाहरण दे रहे हैं, वे वही देश हैं जहाँ संवैधानिक संस्थाओं को तहस-नहस किया गया। उन्होंने कहा, 'अल्बानिया का सुप्रीम कोर्ट सरकार की इच्छा के अनुरूप फैसले देता था और उन फैसलों में न्याय नहीं था।' उनके अनुसार, चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय, सीबीआई और ईडी पर कथित कब्जे से भारत भी उसी राह पर जा रहा है।

'व्हाय नेशंस फेल' का संदर्भ

कांग्रेस नेता ने नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्रियों डैरोन एसेमोग्लू और जेम्स रॉबिन्सन की पुस्तक 'व्हाय नेशंस फेल' का हवाला देते हुए कहा कि इस शोध में स्पष्ट किया गया है कि जिन देशों में अभिजात वर्ग कानून को अपने हिसाब से तोड़-मरोड़कर संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा करता है, वे देश बर्बाद हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि हर राजनेता को यह पुस्तक पढ़नी चाहिए। गौरतलब है कि एसेमोग्लू और रॉबिन्सन को इस शोध के लिए नोबेल पुरस्कार मिल चुका है।

बेरोज़गारी और युवा आंदोलन

फ्रांस के आंदोलन का संदर्भ देते हुए जयहिंद ने कहा कि भारत में भी महंगाई और बेरोज़गारी की स्थितियां वैसी ही हैं। उन्होंने नीति आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 8 करोड़ 70 लाख युवा — जो जर्मनी की आबादी से भी अधिक हैं — न रोज़गार में हैं, न शिक्षा में और न ही किसी प्रशिक्षण में। उनके अनुसार, यह आंकड़ा मोदी सरकार के नीति आयोग का ही है।

भारत में हिंसक भीड़तंत्र नहीं होगा

इन सब आरोपों के बावजूद जयहिंद ने कहा कि भारत बुद्ध और महात्मा गांधी का देश है, जो शांति में विश्वास करता है, इसलिए यहाँ हिंसक भीड़तंत्र नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जो हिंसा हो रही है वह — उनके कथन के अनुसार — राज्य और पुलिस द्वारा, या ऐसे लोगों द्वारा हो रही है जो खुद को हिंदू बताकर बाहर से आते हैं। उन्होंने नवरात्रि के दौरान छोटी बच्चियों पर हुई कथित हिंसा का उल्लेख करते हुए इसकी कड़ी निंदा की। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में युवा आंदोलन चर्चा में हैं और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर बहस जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित बहुआयामी हमला है — जिसमें RSS की आंतरिक असंगति, संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और युवा बेरोज़गारी तीनों को एक सूत्र में पिरोया गया है। दिलचस्प बात यह है कि जिस नीति आयोग के बेरोज़गारी आंकड़े उन्होंने उद्धृत किए, वे सरकार की ही संस्था के हैं — इससे उनके तर्क को एक खास विश्वसनीयता मिलती है जिसे सरकार आसानी से नकार नहीं सकती। हालांकि, चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय पर 'कब्जे' के गंभीर आरोप बिना ठोस दस्तावेजी साक्ष्य के केवल राजनीतिक बयानबाजी की श्रेणी में रह जाते हैं। असली सवाल यह है कि क्या विपक्ष इन दावों को अदालत या संसद में साबित करने की स्थिति में है — जब तक नहीं, यह बहस जनमत के मैदान तक ही सीमित रहेगी।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस नेता अनिल जयहिंद ने RSS प्रमुख के किस बयान पर पलटवार किया?
जयहिंद ने आरोप लगाया कि RSS प्रमुख ने 6 अगस्त को युवा आंदोलनों को 'राष्ट्रवादी' बताते हुए सरकार से संवाद की अपील की थी, लेकिन दो महीने बाद वे बिल्कुल विपरीत रुख अपना रहे हैं। उन्होंने इसे संघ संचालक का स्पष्ट विरोधाभास बताया।
जयहिंद ने 'व्हाय नेशंस फेल' किताब का संदर्भ क्यों दिया?
नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्रियों डैरोन एसेमोग्लू और जेम्स रॉबिन्सन की इस पुस्तक में बताया गया है कि जब अभिजात वर्ग संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा करता है तो देश बर्बाद होते हैं। जयहिंद ने इसे भारत की मौजूदा स्थिति से जोड़ते हुए हर राजनेता को यह पुस्तक पढ़ने की सलाह दी।
नीति आयोग के वे आंकड़े क्या हैं जिनका जयहिंद ने उल्लेख किया?
जयहिंद के अनुसार नीति आयोग के आंकड़े बताते हैं कि 15 से 29 वर्ष आयु के लगभग 8 करोड़ 70 लाख युवा न रोज़गार में हैं, न शिक्षा में और न किसी प्रशिक्षण में। यह संख्या जर्मनी की कुल आबादी से भी अधिक है।
जयहिंद ने चल रहे आंदोलनों में हिंसा को लेकर क्या कहा?
उनका कहना है कि चल रहे आंदोलन अहिंसक हैं और जो हिंसा हो रही है वह कथित तौर पर राज्य, पुलिस, या बाहर से आए कुछ तत्वों द्वारा की जा रही है। उन्होंने नवरात्रि के दौरान छोटी बच्चियों पर हुई कथित हिंसा की कड़ी निंदा की।
कांग्रेस ने किन संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जे का आरोप लगाया?
जयहिंद ने चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर कथित कब्जे का आरोप लगाया। उन्होंने अल्बानिया का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ भी सुप्रीम कोर्ट सरकार की इच्छा के अनुरूप फैसले देता था।
राष्ट्र प्रेस
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