कांग्रेस नेता जयप्रकाश सिंह का आरोप: जनादेश BJP को, सरकार RSS चला रही है
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता जयप्रकाश सिंह ने 20 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और केंद्र सरकार पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जनता ने जनादेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) को दिया, लेकिन सरकार का वास्तविक संचालन RSS के हाथों में है। साथ ही उन्होंने RSS प्रमुख मोहन भागवत की चुप्पी और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को संसद में न बोलने देने पर सवाल खड़े किए।
आरएसएस और सरकार पर सीधा निशाना
कांग्रेस सांसद ने कहा, 'सरकार को पूरी तरह आरएसएस के लोग चला रहे हैं। जनता ने जनादेश भाजपा को दिया है, लेकिन सरकार का संचालन आरएसएस कर रहा है।' उन्होंने यह भी पूछा कि लोकतंत्र में मोहन भागवत एक संस्था चलाते हैं, तो देश को कौन चला रहा है — यह जनता के सामने स्पष्ट होना चाहिए। उनके अनुसार प्रधानमंत्री ने जो वादे जनता से किए, उन पर भागवत की खामोशी सवाल उठाती है।
छात्रों पर बल-प्रयोग का मुद्दा
जयप्रकाश सिंह ने छात्र-आंदोलनों पर कथित बल-प्रयोग की तीखी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र-छात्राओं पर पैलेट गन, आंसू गैस, वाटर कैनन और लाठीचार्ज का उपयोग किया गया। उनका कहना था, 'हमारे यहां लोहे की सलाखें तक इस्तेमाल की गईं, उनके शरीर पर प्रहार किए गए। क्या यही लोकतंत्र है?' उन्होंने पूछा कि क्या यही भाजपा और आरएसएस का आदर्श है।
संसद और विपक्ष की भूमिका
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को सदन में बोलने नहीं दिया जाता, जो लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पूरे सत्र सदन में उपस्थित नहीं रहे। उनके अनुसार यह कहा गया कि '75 साल में पहली बार प्रधानमंत्री को सदन के अंदर सांसदों से खतरा है' — जो उन्होंने अत्यंत चिंताजनक स्थिति बताई।
हरियाणा चुनाव में 'वोट चोरी' का आरोप
जयप्रकाश सिंह ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में कथित गड़बड़ी का मुद्दा फिर उठाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पहले ही आरोप लगा चुके हैं कि बूथ स्तर पर पाँच-पाँच सौ वोट बढ़ाए गए और मतदाता सूची में गड़बड़ियाँ थीं। उनका सवाल था कि आज तक चुनाव आयोग (ECI) ने हरियाणा विधानसभा चुनाव का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया।
NEET और एनटीए विवाद
कांग्रेस सांसद ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और NEET पेपर लीक का मामला भी उठाया। उनका आरोप था कि जिनके कार्यकाल में लगातार पेपर लीक हुए, उन्हें आज तक दंडित नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि NTA में कोई बड़ा संस्थागत बदलाव नहीं हुआ — केवल एक मंत्री का इस्तीफा हुआ, जो उनके अनुसार पर्याप्त जवाबदेही नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब परीक्षा-प्रणाली पर सवाल उठाने वाले आंदोलन अभी भी राजनीतिक विमर्श के केंद्र में हैं।