18 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

संगरूर में मनरेगा मजदूरों पर तेज रफ्तार वाहन चढ़ा, 9 महिलाओं की मौत; सुरक्षा इंतजाम पर उठे सवाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
संगरूर में मनरेगा मजदूरों पर तेज रफ्तार वाहन चढ़ा, 9 महिलाओं की मौत; सुरक्षा इंतजाम पर उठे सवाल

सारांश

पंजाब के संगरूर में 18 अक्टूबर को तेज रफ्तार वाहन ने मनरेगा की 20-25 महिला मजदूरों को रौंद दिया — 9 की मौत, कई घायल। न चेतावनी बोर्ड, न सेफ्टी जैकेट, न बैरिकेड: यह हादसा सड़क किनारे काम करने वाले ग्रामीण श्रमिकों की सुरक्षा की भयावह अनदेखी की कहानी है।

मुख्य बातें

संगरूर के लहरागागा इलाके में 18 अक्टूबर 2026 को तेज रफ्तार वाहन ने मनरेगा महिला मजदूरों को कुचला।
हादसे में 9 महिला मजदूरों की मौत हो गई; अलीशेर गाँव की करीब 20-25 महिलाएँ उस वक्त कार्यरत थीं।
पूनम धीर के अनुसार संगरूर सरकारी अस्पताल में 7-8 मरीज भर्ती हुए; 2-3 गंभीर को अन्य अस्पतालों में रेफर किया गया।
घायल महिलाओं ने आरोप लगाया — कार्यस्थल पर चेतावनी बोर्ड , रिफ्लेक्टर , बैरिकेड और सेफ्टी जैकेट में से कुछ भी नहीं था।
पुलिस ने मामला दर्ज कर वाहन चालक की तलाश शुरू की; प्रशासनिक जाँच की भी माँग उठी।

पंजाब के संगरूर जिले के लहरागागा इलाके में 18 अक्टूबर 2026 को एक भीषण सड़क दुर्घटना में मनरेगा योजना के तहत कार्यरत 9 महिला मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसा तब हुआ जब सड़क किनारे घास काटने और सफाई का काम कर रही महिलाओं को एक तेज रफ्तार वाहन ने रौंद दिया। घायलों को संगरूर सरकारी अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका उपचार जारी है।

हादसे का घटनाक्रम

जानकारी के अनुसार, हादसे के वक्त अलीशेर गाँव की करीब 20 से 25 महिला मजदूर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी) योजना के अंतर्गत सड़क किनारे काम में जुटी थीं। इसी दौरान तेज गति से आए एक वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे मौके पर ही कई मजदूरें गंभीर रूप से जख्मी हो गईं। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुँची।

अस्पताल में इलाज की स्थिति

संगरूर सरकारी अस्पताल में घायलों का उपचार कर रहीं डॉक्टर पूनम धीर ने बताया कि लहरागागा से 7-8 मरीज अस्पताल पहुँचे। इनमें से 1 मरीज की मौत अस्पताल में हो गई, जबकि 2-3 गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए अन्य अस्पतालों में रेफर किया गया। शेष घायलों की जाँच और उपचार जारी है।

सुरक्षा इंतजामों की घोर अनदेखी

घायल महिला मजदूरों ने आरोप लगाया कि काम वाली जगह पर कोई चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया था और न ही रिफ्लेक्टर या बैरिकेड की कोई व्यवस्था थी। इसके अतिरिक्त, मजदूरों को सेफ्टी जैकेट भी नहीं दी गई थी। पीड़ितों का कहना है कि यदि बुनियादी सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए गए होते, तो इतने बड़े हादसे से बचा जा सकता था।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हुआ है जब सड़क किनारे काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार से बार-बार पुख्ता इंतजाम करने की माँग उठती रही है। सड़क पर बिना किसी सुरक्षा घेरे के कार्यरत मजदूरों की यह स्थिति मनरेगा परियोजनाओं में श्रमिक सुरक्षा के व्यापक सवाल खड़े करती है।

आम जनता और मजदूरों पर असर

इस हादसे ने पंजाब के ग्रामीण इलाकों में सड़क किनारे काम करने वाले मनरेगा मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। मृतक और घायल सभी महिलाएँ अलीशेर गाँव की निवासी हैं, जो रोज़ी-रोटी के लिए इस योजना पर निर्भर हैं। परिवारों में शोक का माहौल है और स्थानीय लोगों में रोष भी देखा जा रहा है।

आगे क्या होगा

फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर तेज रफ्तार वाहन की पहचान और चालक की तलाश शुरू कर दी है। प्रशासनिक स्तर पर यह जाँच भी होगी कि कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया। विशेषज्ञों और श्रमिक संगठनों ने माँग की है कि सरकार तत्काल सभी मनरेगा कार्यस्थलों पर सुरक्षा ऑडिट कराए और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बिना रिफ्लेक्टर और बिना सेफ्टी जैकेट के काम पर भेजी गई महिलाएँ एक व्यवस्थागत लापरवाही की शिकार हुई हैं। मनरेगा कार्यस्थलों पर श्रमिक सुरक्षा के न्यूनतम मानकों का पालन सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है — और यह जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से निभाई नहीं गई। असली सवाल यह है कि मुआवजे और जाँच की घोषणाओं के बाद क्या यह सुनिश्चित होगा कि अगली बार काम पर जाने वाली महिला मजदूर के हाथ में सेफ्टी जैकेट होगी — या फिर यह चक्र दोहराएगा।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संगरूर में मनरेगा मजदूरों का हादसा कैसे हुआ?
18 अक्टूबर 2026 को पंजाब के संगरूर जिले के लहरागागा इलाके में अलीशेर गाँव की करीब 20-25 महिला मजदूर मनरेगा योजना के तहत सड़क किनारे काम कर रही थीं, तभी एक तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। इस हादसे में 9 महिलाओं की मौत हो गई और कई घायल हो गईं।
हादसे में कितनी मौतें हुईं और घायलों का इलाज कहाँ हो रहा है?
हादसे में 9 महिला मजदूरों की मौत हुई। घायलों को संगरूर सरकारी अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। डॉ. पूनम धीर के अनुसार संगरूर सरकारी अस्पताल में 7-8 मरीज भर्ती हुए और 2-3 गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया।
कार्यस्थल पर सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं थे?
घायल महिलाओं के अनुसार कार्यस्थल पर न कोई चेतावनी बोर्ड था, न रिफ्लेक्टर, न बैरिकेड और न ही सेफ्टी जैकेट मुहैया कराई गई थी। यह मनरेगा कार्यस्थलों पर अनिवार्य सुरक्षा मानकों की सीधी अनदेखी है, जिसकी जाँच की माँग अब उठ रही है।
इस हादसे के बाद प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
पुलिस ने मामला दर्ज कर तेज रफ्तार वाहन चालक की तलाश शुरू कर दी है। प्रशासनिक जाँच भी अपेक्षित है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया। श्रमिक संगठनों ने सभी मनरेगा कार्यस्थलों पर तत्काल सुरक्षा ऑडिट की माँग की है।
मनरेगा मजदूरों को सड़क किनारे काम करते वक्त कौन-से सुरक्षा उपाय मिलने चाहिए?
सड़क किनारे काम करने वाले मजदूरों को सेफ्टी जैकेट, चेतावनी बोर्ड, रिफ्लेक्टर और बैरिकेड जैसी बुनियादी सुरक्षा सुविधाएँ अनिवार्य रूप से मिलनी चाहिए। संगरूर हादसे में इनमें से कोई भी व्यवस्था मौजूद नहीं थी, जो मनरेगा दिशानिर्देशों के संभावित उल्लंघन की ओर इशारा करती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले