संगरूर में मनरेगा मजदूरों पर तेज रफ्तार वाहन चढ़ा, 9 महिलाओं की मौत; सुरक्षा इंतजाम पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के संगरूर जिले के लहरागागा इलाके में 18 अक्टूबर 2026 को एक भीषण सड़क दुर्घटना में मनरेगा योजना के तहत कार्यरत 9 महिला मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसा तब हुआ जब सड़क किनारे घास काटने और सफाई का काम कर रही महिलाओं को एक तेज रफ्तार वाहन ने रौंद दिया। घायलों को संगरूर सरकारी अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका उपचार जारी है।
हादसे का घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार, हादसे के वक्त अलीशेर गाँव की करीब 20 से 25 महिला मजदूर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी) योजना के अंतर्गत सड़क किनारे काम में जुटी थीं। इसी दौरान तेज गति से आए एक वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे मौके पर ही कई मजदूरें गंभीर रूप से जख्मी हो गईं। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुँची।
अस्पताल में इलाज की स्थिति
संगरूर सरकारी अस्पताल में घायलों का उपचार कर रहीं डॉक्टर पूनम धीर ने बताया कि लहरागागा से 7-8 मरीज अस्पताल पहुँचे। इनमें से 1 मरीज की मौत अस्पताल में हो गई, जबकि 2-3 गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए अन्य अस्पतालों में रेफर किया गया। शेष घायलों की जाँच और उपचार जारी है।
सुरक्षा इंतजामों की घोर अनदेखी
घायल महिला मजदूरों ने आरोप लगाया कि काम वाली जगह पर कोई चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया था और न ही रिफ्लेक्टर या बैरिकेड की कोई व्यवस्था थी। इसके अतिरिक्त, मजदूरों को सेफ्टी जैकेट भी नहीं दी गई थी। पीड़ितों का कहना है कि यदि बुनियादी सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए गए होते, तो इतने बड़े हादसे से बचा जा सकता था।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हुआ है जब सड़क किनारे काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार से बार-बार पुख्ता इंतजाम करने की माँग उठती रही है। सड़क पर बिना किसी सुरक्षा घेरे के कार्यरत मजदूरों की यह स्थिति मनरेगा परियोजनाओं में श्रमिक सुरक्षा के व्यापक सवाल खड़े करती है।
आम जनता और मजदूरों पर असर
इस हादसे ने पंजाब के ग्रामीण इलाकों में सड़क किनारे काम करने वाले मनरेगा मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। मृतक और घायल सभी महिलाएँ अलीशेर गाँव की निवासी हैं, जो रोज़ी-रोटी के लिए इस योजना पर निर्भर हैं। परिवारों में शोक का माहौल है और स्थानीय लोगों में रोष भी देखा जा रहा है।
आगे क्या होगा
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर तेज रफ्तार वाहन की पहचान और चालक की तलाश शुरू कर दी है। प्रशासनिक स्तर पर यह जाँच भी होगी कि कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया। विशेषज्ञों और श्रमिक संगठनों ने माँग की है कि सरकार तत्काल सभी मनरेगा कार्यस्थलों पर सुरक्षा ऑडिट कराए और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे।