संगरूर हादसा: मनरेगा की 8 महिला मजदूरों की मौत, CM भगवंत मान ने ₹2 लाख मुआवजे का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के संगरूर जिले के लहरागागा क्षेत्र में 18 अक्टूबर 2026 को एक भीषण सड़क हादसे में मनरेगा के तहत कार्यरत 8 महिला मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गईं। अलीशेर गांव में हुई इस दुर्घटना में एक तेज रफ्तार वाहन ने सड़क किनारे काम कर रही महिलाओं को कुचल दिया। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए प्रत्येक मृतक परिवार को ₹2 लाख मुआवजे और घायलों के निःशुल्क इलाज का वादा किया है।
मुख्य घटनाक्रम
घटना के अनुसार, अलीशेर गांव में 20 से 25 महिला मजदूर सड़क किनारे घास काटने और सफाई का काम कर रही थीं। इसी दौरान तेज रफ्तार से आए एक वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कई महिलाओं ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घायलों को संगरूर के सरकारी अस्पताल सहित आसपास के कई अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका उपचार जारी है।
सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
घायल महिला मजदूरों ने आरोप लगाया है कि काम वाली जगह पर सुरक्षा के कोई पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। उनके अनुसार, न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया था, न रिफ्लेक्टर और न ही बैरिकेड की व्यवस्था की गई थी। इसके अतिरिक्त, मजदूरों को सेफ्टी जैकेट भी उपलब्ध नहीं कराई गई थी। यह आरोप मनरेगा परियोजनाओं में श्रमिक सुरक्षा मानकों के पालन पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'संगरूर के अलीशेर गांव में हुए भीषण सड़क हादसे की खबर अत्यंत दुखद है। इस हादसे में मनरेगा कर्मियों सहित 8 लोगों की जान जाना एक बहुत बड़ी क्षति है। दुख की इस कठिन घड़ी में, पंजाब सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। सरकार मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपए का मुआवजा देगी, और घायलों का पूरा इलाज भी पंजाब सरकार द्वारा बिल्कुल मुफ्त कराया जाएगा।' उन्होंने यह भी कहा कि फरार चालक को शीघ्र पकड़ा जाएगा और उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी हादसे पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'पंजाब के संगरूर जिले में एक सड़क हादसे में कई श्रमिकों की मृत्यु अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और हृदयविदारक है। इस कठिन घड़ी में मेरी संवेदनाएं शोकसंतप्त परिवारों के साथ हैं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।'
आम जनता और मजदूर वर्ग पर असर
यह हादसा ऐसे समय में आया है जब देश में सड़क सुरक्षा और मनरेगा श्रमिकों की कार्यस्थल सुरक्षा को लेकर पहले से ही चिंताएँ व्यक्त की जाती रही हैं। गौरतलब है कि मनरेगा योजना के तहत काम करने वाले मजदूर अधिकतर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं, जो अपनी आजीविका के लिए इन परियोजनाओं पर निर्भर रहते हैं।
क्या होगा आगे
पुलिस ने मामला दर्ज कर फरार चालक की तलाश शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री के बयान के अनुसार, मुआवजा राशि और निःशुल्क चिकित्सा सुविधा शीघ्र सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, सुरक्षा उपकरणों की अनुपस्थिति को लेकर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाने की संभावना है। इस घटना से उम्मीद है कि राज्य सरकार मनरेगा कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों की समीक्षा करेगी।