संस्कृति संसद 2026: काशी में 3 5 नवंबर को जुटेंगे 3,000 संत, जेन जी को मिलेगा स्वतंत्र बोलने का मंच
सारांश
मुख्य बातें
गंगा महासभा ने वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में 3 से 5 नवंबर 2026 तक संस्कृति संसद 2026 के आयोजन की घोषणा की है, जिसमें देशभर से लगभग 3,000 संत, विद्वान और कलाकार भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय पहचान और युवाओं के मुद्दों पर विचार विमर्श करने के लिए एकत्रित होंगे। इस बार के आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जेन जी (Gen Z) के लिए पहली बार एक स्वतंत्र मंच तैयार किया गया है जहाँ युवा सिर्फ सुनेंगे नहीं, बल्कि अपनी बात कहेंगे।
मुख्य घटनाक्रम
काशी विद्वत परिषद के महासचिव रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि इस संसद में मनुस्मृति पर चल रहे विमर्श को लेकर एक अखिल भारतीय समिति के गठन पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा, "विलियम जोन्स द्वारा अनूदित मनुस्मृति के पूर्वापर ग्रंथों के अध्ययन के बाद कई प्रश्न खड़े हो रहे हैं। इन प्रश्नों के समाधान के लिए हमें मूल पांडुलिपि का अन्वेषण और शोध करना है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि देश विदेश के विश्वविद्यालयों में मौजूद पांडुलिपियों को भारत लाकर वास्तविक ग्रंथ स्वरूप तैयार करने पर विचार होगा।
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि संस्कृति संसद से पूर्व 31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक एक अंतरराष्ट्रीय चित्रकला और फोटोग्राफी कार्यशाला का आयोजन होगा, जिसमें भारत — विशेषकर उत्तर प्रदेश — की धार्मिक धरोहरों को केंद्र में रखा जाएगा। उन्होंने इसे अपनी तरह का पहला प्रयोग बताया, जिसमें धर्माचार्यों से लेकर पद्म पुरस्कार विजेता विद्वान और चित्रकार सभी एक साथ भाग लेंगे।
जेन जी को बोलने का मंच
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा, "अभी देश में जेन जी के नाम पर युवाओं को बिठाकर बड़े बड़े लोगों द्वारा संबोधित किया जा रहा है, लेकिन जेन जी सिर्फ सुनना नहीं, बोलना चाहता है।" उन्होंने बताया कि इस प्रयोग के तहत पहली बार काशी में तीन दिन लगातार जेन जी को ही बोलने के लिए अलग मंच दिया जाएगा। हालाँकि, उन्होंने स्वीकार किया कि सभागार की क्षमता सीमित होने के कारण — छोटे सभागार में 150 से अधिक प्रतिभागी नहीं बैठ सकते — केवल चिन्हित युवाओं को ही शामिल किया जाएगा।
संतों का दृष्टिकोण
पातालपुरी मठ के जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज ने संस्कृति संसद को एक व्यापक मंच बताया। उन्होंने कहा, "संस्कृति संसद एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो सभी को मौका देता है।" उन्होंने यह भी कहा कि जेन जी के नाम पर भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुँचाने के कथित प्रयासों को यह आयोजन बेनकाब करेगा। उनके वक्तव्य में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी शामिल थी — उन्होंने विपक्ष पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया, जो एक विवादास्पद राजनीतिक टिप्पणी है।
आगे क्या होगा
आयोजकों के अनुसार तीन चार दिनों के इस महाआयोजन में सनातन हिंदू धर्म से जुड़े विषयों पर व्यापक विमर्श होगा। मनुस्मृति की मूल पांडुलिपि पर शोध के लिए गठित होने वाली अखिल भारतीय समिति की संरचना पर निर्णय सभी प्रतिभागियों के परामर्श के बाद सार्वजनिक किया जाएगा। यह आयोजन यह भी तय करेगा कि वैश्विक स्तर पर विदेशों में मौजूद पांडुलिपियों को काशी कैसे लाया जाए।