5 नवंबर 2026
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काशी संस्कृत संसद 2026: एकनाथ शिंदे को 'सनातन मार्तंड' सम्मान, आनंद दुबे बोले — धर्म सबसे बड़ा

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काशी संस्कृत संसद 2026: एकनाथ शिंदे को 'सनातन मार्तंड' सम्मान, आनंद दुबे बोले — धर्म सबसे बड़ा

सारांश

काशी की संस्कृत संसद 2026 में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को 'सनातन मार्तंड' की उपाधि मिलना महज़ एक पुरस्कार नहीं — यह महाराष्ट्र की हिंदुत्व राजनीति का काशी में प्रतीकात्मक विस्तार है। शिवसेना नेता आनंद दुबे के तीखे बोल बताते हैं कि धर्म-आधारित पहचान की राजनीति अभी और तेज़ होगी।

मुख्य बातें

संस्कृत संसद 2026 का आयोजन 3 से 5 नवंबर को काशी (वाराणसी) में हुआ।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को 4 नवंबर 2026 को 'धर्मध्वज धारक' और 'सनातन मार्तंड' की उपाधि से नवाज़ा गया।
शिवसेना नेता आनंद दुबे ने इसे महाराष्ट्र की 13 करोड़ जनता और विश्वभर के सनातनियों का सम्मान बताया।
दुबे ने सनातन को 'डेंगू' कहने वालों पर निशाना साधते हुए DMK के उदाहरण से धर्म की श्रेष्ठता का दावा किया।
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के कथित बयान पर दुबे ने कड़ा पलटवार किया।

वाराणसी की पावन काशी नगरी में आयोजित संस्कृत संसद 2026 के दौरान 4 नवंबर 2026 को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को 'धर्मध्वज धारक' और 'सनातन मार्तंड' की उपाधियों से सम्मानित किया गया। इस सम्मान पर शिवसेना नेता आनंद दुबे ने कहा कि यह केवल शिंदे का नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की 13 करोड़ जनता और विश्वभर के सनातनियों का सम्मान है।

संस्कृत संसद 2026 का आयोजन

संस्कृत संसद 2026 का आयोजन 3, 4 और 5 नवंबर को काशी (वाराणसी) में हुआ। आनंद दुबे ने इसे सनातनियों के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को उजागर करने वाला धार्मिक समागम बताया। उन्होंने कहा, काशी विश्वनाथ की पावन धरती पर दिया गया यह सम्मान भारत के करोड़ों हिंदुओं के लिए भी गर्व का क्षण है।

आनंद दुबे की प्रतिक्रिया

दुबे ने कहा कि सनातन धर्म की विरासत इतनी गहरी और प्राचीन है कि इसे हर कोई नहीं समझ सकता — केवल वही नेता इसे सही मायनों में समझ सकता है जो सनातन धर्म का सम्मान करता हो। उन्होंने कहा, 'सत्ता आएगी, जाएगी; राजनीतिक पार्टियां बनेंगी और बिगड़ेंगी, लेकिन अगर मेरा धर्म नहीं बचा, तो मैं छत्रपति शिवाजी महाराज को क्या मुंह दिखाऊंगा?'

सनातन विरोधियों पर निशाना

दुबे ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि जो लोग सनातन को 'डेंगू' कहते हैं, उन्हें ईश्वर दंड देंगे। उन्होंने तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के बाद विजय थलपति की सरकार का आना यह प्रमाण है कि धर्म सबसे बड़ा है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सनातन धर्म पर बयानबाज़ी राष्ट्रीय राजनीति में एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है।

इरफान अंसारी के बयान पर पलटवार

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के कथित बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए दुबे ने कहा, 'कसाई के चाहने से गाय नहीं मरती।' उन्होंने स्पष्ट किया कि देश अपने लोकतंत्र और संविधान के अनुसार ही चलेगा और कोई भी अराजक तत्व अपने इरादों में सफल नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो कोई पड़ोसी देशों की भाषा बोलेगा, उसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

आगे का संदर्भ

गौरतलब है कि संस्कृत संसद जैसे आयोजन धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान की राजनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं, विशेष रूप से महाराष्ट्र जैसे राज्यों में जहाँ शिवसेना की राजनीतिक जड़ें हिंदुत्व और मराठा अस्मिता में गहरी हैं। एकनाथ शिंदे को इस तरह के धार्मिक मंच पर सम्मान मिलना उनकी राजनीतिक छवि को मज़बूत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

चुनावी मौसम की राजनीति है। महाराष्ट्र में सत्ता की जड़ें मज़बूत करने के लिए धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल नई बात नहीं, लेकिन इसका काशी तक विस्तार और DMK-विजय थलपति प्रकरण का संदर्भ देना बताता है कि पार्टी उत्तर भारतीय हिंदुत्व मतदाता को भी संदेश दे रही है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं, जबकि समर्थक इसे सांस्कृतिक पहचान की रक्षा बताते हैं।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संस्कृत संसद 2026 क्या है और यह कहाँ आयोजित हुई?
संस्कृत संसद 2026 एक धार्मिक-सांस्कृतिक समागम है जो 3, 4 और 5 नवंबर 2026 को काशी (वाराणसी) में आयोजित हुआ। इसका उद्देश्य सनातन धर्म की सांस्कृतिक विरासत और संस्कृत भाषा को सम्मान देना बताया गया।
एकनाथ शिंदे को 'सनातन मार्तंड' सम्मान क्यों दिया गया?
संस्कृत संसद 2026 के आयोजकों ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को 4 नवंबर 2026 को 'धर्मध्वज धारक' और 'सनातन मार्तंड' की उपाधियों से नवाज़ा। शिवसेना नेता आनंद दुबे के अनुसार यह सम्मान सनातन धर्म के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को मान्यता देता है।
आनंद दुबे ने इरफान अंसारी के बयान पर क्या कहा?
शिवसेना नेता आनंद दुबे ने झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के कथित बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि 'कसाई के चाहने से गाय नहीं मरती।' उन्होंने कहा कि देश संविधान और लोकतंत्र के अनुसार ही चलेगा और कोई अराजकता बर्दाश्त नहीं होगी।
दुबे ने DMK और विजय थलपति का ज़िक्र क्यों किया?
आनंद दुबे ने तमिलनाडु में DMK के बाद विजय थलपति की सरकार आने का उदाहरण यह कहने के लिए दिया कि जो लोग सनातन धर्म का विरोध करते हैं, उन्हें ईश्वर दंड देते हैं। यह बयान उन लोगों पर निशाना था जिन्होंने कथित तौर पर सनातन को 'डेंगू' कहा था।
इस सम्मान का महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर होगा?
विश्लेषकों के अनुसार काशी जैसे धार्मिक केंद्र में एकनाथ शिंदे को यह उपाधि मिलना महाराष्ट्र में शिवसेना की हिंदुत्व छवि को और मज़बूत करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब राज्य में धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान की राजनीति तेज़ हो रही है।
राष्ट्र प्रेस
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