राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 'सौश्रुतम् 2026' का उद्घाटन किया, आयुर्वेद में जैव विविधता संरक्षण और महिला सशक्तीकरण पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 15 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) में आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा पर केंद्रित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 'सौश्रुतम् 2026' का उद्घाटन किया। सुश्रुत जयंती के अवसर पर आयोजित इस संगोष्ठी में भारत सहित नौ देशों — थाईलैंड, इज़राइल, ऑस्ट्रिया, यूनाइटेड किंगडम, श्रीलंका, इंडोनेशिया, नेपाल और ग्रीस — के प्रख्यात शल्य चिकित्सक, शोधकर्ता, शिक्षाविद् और नीति-निर्माता भाग ले रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति मुर्मु ने एआईआईए में नवस्थापित एआई-सक्षम 3 टेस्ला हाई-फील्ड एमआरआई सुविधा का लोकार्पण किया। यह अत्याधुनिक तकनीक संस्थान की नैदानिक सेवाओं को सुदृढ़ करेगी, आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के बीच एकीकृत अनुसंधान को गति देगी, और रोगियों को किफायती इमेजिंग सेवाएँ उपलब्ध कराएगी। इसके अतिरिक्त उन्होंने भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) द्वारा प्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट — 'आयुर्वेद की महिला स्नातकों के व्यावसायिक जीवन का मूल्यांकन: एक अवलोकनात्मक एवं अन्वेषणात्मक अध्ययन' — का विमोचन भी किया।
राष्ट्रपति का संबोधन
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आचार्य सुश्रुत के अद्वितीय योगदान ने विश्व में वैज्ञानिक और व्यवस्थित शल्य चिकित्सा की नींव रखी थी, और स्वास्थ्य के प्रति आयुर्वेद का समग्र दृष्टिकोण आज भी आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में पूरी तरह प्रासंगिक है। उन्होंने रेखांकित किया कि आयुर्वेद के सतत विकास के लिए जैव विविधता का संरक्षण अनिवार्य है और औषधीय पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाणीकरण किया जाना चाहिए।
राष्ट्रपति ने आयुर्वेद के क्षेत्र में महिला पेशेवरों के सशक्तीकरण का आह्वान करते हुए कहा कि उनके दीर्घकालिक कैरियर विकास में आने वाली चुनौतियों का समाधान सामूहिक प्रयासों से होना चाहिए। उन्होंने आयुष मंत्रालय द्वारा वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार की सराहना करते हुए कहा कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक प्रौद्योगिकी के समन्वय से आयुर्वेद की विश्वसनीयता निरंतर बढ़ रही है।
विशिष्ट अतिथियों की प्रतिक्रिया
दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने कहा कि भारत की सभ्यतागत शक्ति उसकी समृद्ध ज्ञान परंपराओं में निहित है, जिनमें आयुर्वेद एक अमूल्य एवं स्थायी योगदान है। उन्होंने आयुर्वेद की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, साक्ष्य-आधारित अध्ययन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने पर जोर दिया।
आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर अभूतपूर्व पहचान मिली है। एनसीआईएसएम अध्ययन का उल्लेख करते हुए उन्होंने महिला आयुर्वेद स्नातकों के कैरियर विकास में आने वाली बाधाओं पर प्रकाश डाला और नेतृत्व, अनुसंधान तथा नैदानिक सेवाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया।
एआईआईए के निदेशक प्रो. (वैद्य) पीके प्रजापति ने कहा कि 'सौश्रुतम् 2026' शास्त्रीय आयुर्वेदिक शल्य ज्ञान और समकालीन वैज्ञानिक प्रगति के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
संगोष्ठी का वैज्ञानिक कार्यक्रम
तीन दिवसीय इस संगोष्ठी के वैज्ञानिक कार्यक्रम में मुख्य व्याख्यान, पैनल चर्चाएँ, कार्यशालाएँ तथा शल्य तंत्र, क्षारसूत्र, अग्निकर्म, रोबोटिक सर्जरी, एकीकृत ऑन्कोलॉजी और अनुसंधान के अन्य उभरते क्षेत्रों पर तकनीकी सत्र शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियाँ निवारक और समग्र चिकित्सा दृष्टिकोणों को तेज़ी से अपना रही हैं।
आगे की राह
'सौश्रुतम् 2026' का उद्देश्य साक्ष्य-आधारित संवाद को बढ़ावा देना, नवाचार को प्रोत्साहित करना और आयुर्वेदिक शल्य विज्ञान में वैश्विक सहयोग को सुदृढ़ करना है। गौरतलब है कि एआईआईए में एआई-सक्षम एमआरआई जैसी आधुनिक सुविधाओं का समावेश पारंपरिक चिकित्सा और अत्याधुनिक तकनीक के एकीकरण की दिशा में एक ठोस कदम है, जो आयुर्वेद की वैश्विक साख को और मज़बूत कर सकता है।