क्या देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती पर पीएम मोदी समेत कई प्रमुख नेताओं ने नमन किया?
सारांश
Key Takeaways
- सावित्रीबाई फुले ने नारी सशक्तीकरण को नई दिशा दी।
- उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझाया।
- सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष किया।
- उनका जीवन राष्ट्र निर्माण में प्रेरणा का स्रोत रहा।
- महिला अधिकारों के लिए उनका योगदान अतुलनीय है।
नई दिल्ली, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। नारी सशक्तीकरण की प्रतीक और देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की आज जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अनेक वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शिक्षा, समानता और महिला अधिकारों के लिए सावित्रीबाई फुले के योगदान को स्मरण किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर हम उस अग्रणी समाज सुधारक को याद करते हैं जिन्होंने सेवा और शिक्षा के माध्यम से सामाजिक बदलाव के लिए अपना जीवन समर्पित किया। वे समानता, न्याय और करुणा के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध थीं। उनका मानना था कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे शक्तिशाली साधन है। उन्होंने ज्ञान और अध्ययन के माध्यम से जीवन में परिवर्तन लाने पर जोर दिया। जरूरतमंदों के लिए उनका कार्य भी सराहनीय है।"
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए कहा, "सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं को शिक्षा के मूल अधिकार से जोड़कर नारी सशक्तीकरण को नई दिशा दी। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष करते हुए देश का पहला बालिका विद्यालय स्थापित किया और समाज सुधार की अलख जगाई। उनका प्रेरणादायी जीवन राष्ट्र निर्माण में सदैव मार्गदर्शक बना रहेगा।"
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, "नारी शिक्षा और सशक्तीकरण के लिए जीवनभर संघर्ष करने वाली महान समाज सुधारिका, भारत की पहली महिला शिक्षिका, श्रद्धेय माता सावित्रीबाई फुले जी की जयंती पर उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन करता हूं। शोषितों और वंचितों के उत्थान के लिए आपके द्वारा किए गए अभूतपूर्व कार्य सदैव समाज के नवनिर्माण के लिए प्रेरित करते रहेंगे।"
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "'क्रांतिज्योति' सावित्रीबाई फुले ने अपने साहस, संघर्ष और दूरदर्शिता से समाज में शिक्षा, समानता और महिला अधिकारों की अलख जगाई। उनका जीवन सामाजिक परिवर्तन और मानवीय गरिमा का प्रतीक है। नारी सशक्तीकरण के लिए आजीवन संघर्षरत रहीं सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।"