13 अक्टूबर 2026
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सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने CJI इस्तीफे की मांग की निंदा की, सोशल मीडिया बयानों को न्यायपालिका पर हमला बताया

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सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने CJI इस्तीफे की मांग की निंदा की, सोशल मीडिया बयानों को न्यायपालिका पर हमला बताया

सारांश

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने CJI के इस्तीफे की मांग वाले सोशल मीडिया बयानों की निंदा करते हुए औपचारिक प्रस्ताव पारित किया। यह विवाद 'इंडिया' ब्लॉक की चुनाव आयोग विरोधी याचिका के रजिस्ट्री द्वारा सूचीबद्ध न किए जाने के बाद भड़का। SCBA ने स्पष्ट किया कि आपत्ति के लिए वैध कानूनी रास्ते उपलब्ध हैं।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने 12 अक्टूबर 2026 को CJI के इस्तीफे की मांग वाले सोशल मीडिया बयानों के खिलाफ औपचारिक प्रस्ताव पारित किया।
SCBA ने इन बयानों को न्यायपालिका की संस्था को 'छोटा करने' और न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप का प्रयास बताया।
विवाद 'इंडिया' ब्लॉक के नेताओं द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ दायर याचिका के तकनीकी खामियों के कारण सूचीबद्ध न होने के बाद उभरा।
प्रस्ताव मानद सचिव प्रज्ञा बघेल द्वारा जारी किया गया; SCBA अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप कुमार राय हैं।
SCBA ने स्पष्ट किया कि न्यायिक फैसलों से असहमति के लिए कानून में वैध रास्ता उपलब्ध है, सार्वजनिक दबाव नहीं।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने 12 अक्टूबर 2026 को एक औपचारिक प्रस्ताव पारित कर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के इस्तीफे की मांग करने वाले सोशल मीडिया बयानों की कड़ी भर्त्सना की। एसोसिएशन ने इन बयानों को न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा हमला और न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप का सुनियोजित प्रयास करार दिया है।

SCBA का प्रस्ताव — क्या कहा गया

एसोसिएशन की ओर से जारी प्रस्ताव में स्पष्ट शब्दों में कहा गया: 'सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन सोशल मीडिया पर प्रसारित उन बयानों की निंदा करता है, जिनमें भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश से इस्तीफे की मांग की जा रही है।' प्रस्ताव में जोड़ा गया कि हर व्यक्ति को कानून के अनुसार अदालतों का दरवाज़ा खटखटाने और उचित उपचार प्राप्त करने का वैध अधिकार है।

प्रस्ताव में कहा गया कि इस तरह के बयान न्यायपालिका की संस्था को कमज़ोर करते हैं। यह प्रस्ताव SCBA की मानद सचिव प्रज्ञा बघेल द्वारा 12 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से जारी किया गया।

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर CJI के इस्तीफे की मांग को लेकर पोस्टें प्रसारित हो रही थीं। यह मामला तब सामने आया जब विपक्षी 'इंडिया' ब्लॉक के नेताओं द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी।

रिपोर्टों के अनुसार, याचिका में तकनीकी खामियाँ पाए जाने के बाद रजिस्ट्री ने उसे सूचीबद्ध नहीं किया। इसके बाद से सोशल मीडिया पर न्यायपालिका को लक्ष्य करते हुए विभिन्न टिप्पणियाँ और माँगें सामने आने लगीं।

SCBA की स्थिति और वैध रास्ते का आह्वान

SCBA ने अपने प्रस्ताव में सभी सदस्यों और आम नागरिकों से सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा और मर्यादा बनाए रखने की अपील की। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यदि किसी को किसी न्यायिक फैसले या प्रक्रिया से आपत्ति है, तो उसके लिए कानून में वैध और स्थापित रास्ता उपलब्ध है।

एसोसिएशन का मानना है कि सार्वजनिक मंचों पर इस्तीफे की मांग न केवल अनुचित है, बल्कि यह न्यायिक स्वतंत्रता के मूल सिद्धांत के भी विरुद्ध है।

SCBA — संस्था का महत्व

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन देश की सबसे प्रतिष्ठित विधिक संस्थाओं में से एक है और सर्वोच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों का प्रतिनिधित्व करती है। इसके वर्तमान अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप कुमार राय हैं।

आगे क्या होगा

यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया के ज़रिए न्यायिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार की प्रवृत्ति पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो यह न्यायपालिका की स्वायत्तता और जनविश्वास दोनों के लिए दीर्घकालिक खतरा बन सकती है। SCBA के इस कदम से यह संकेत मिलता है कि विधिक बिरादरी सोशल मीडिया के ज़रिए न्यायिक दबाव की किसी भी कोशिश को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या बार एसोसिएशन की निंदा इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए पर्याप्त है। यह पहली बार नहीं है जब न्यायिक नियुक्तियों या फैसलों के बाद सोशल मीडिया पर न्यायपालिका को निशाना बनाया गया हो — इस बार ट्रिगर एक याचिका का तकनीकी कारणों से सूचीबद्ध न होना था, जो स्वयं में विवादास्पद नहीं है। आलोचक पूछ सकते हैं कि SCBA ने प्रस्ताव तो पारित किया, लेकिन दुरुपयोग की जाँच या जवाबदेही के ठोस तंत्र पर मौन रहा। न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा तभी संभव है जब संस्थाएँ आलोचना को वैध रास्तों की ओर मोड़ें, न कि केवल उसकी निंदा करें।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SCBA ने CJI के इस्तीफे की मांग पर क्या कदम उठाया?
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने 12 अक्टूबर 2026 को एक औपचारिक प्रस्ताव पारित कर CJI के इस्तीफे की मांग करने वाले सोशल मीडिया बयानों की कड़ी निंदा की। प्रस्ताव में इन बयानों को न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला और न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप का प्रयास बताया गया।
यह विवाद क्यों शुरू हुआ?
'इंडिया' ब्लॉक के नेताओं द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका में तकनीकी खामियाँ पाए जाने के बाद रजिस्ट्री ने उसे सूचीबद्ध नहीं किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर CJI के इस्तीफे की मांग वाली पोस्टें तेज़ी से प्रसारित होने लगीं।
SCBA के अनुसार न्यायिक फैसले से असहमति का सही तरीका क्या है?
SCBA ने स्पष्ट किया कि हर व्यक्ति को कानून के अनुसार अदालतों का दरवाज़ा खटखटाने और उचित उपचार पाने का अधिकार है। सार्वजनिक मंचों पर इस्तीफे की मांग करना न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांत के विरुद्ध है।
SCBA क्या है और इसका महत्व क्यों है?
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन देश की सबसे प्रतिष्ठित विधिक संस्थाओं में से एक है, जो सर्वोच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों का प्रतिनिधित्व करती है। इसके अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप कुमार राय हैं और इसके प्रस्ताव विधिक बिरादरी की सामूहिक स्थिति मानी जाती है।
यह प्रस्ताव किसने जारी किया?
यह प्रस्ताव SCBA की मानद सचिव प्रज्ञा बघेल द्वारा 12 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक रूप से जारी किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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