सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने CJI इस्तीफे की मांग की निंदा की, सोशल मीडिया बयानों को न्यायपालिका पर हमला बताया
सारांश
मुख्य बातें
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने 12 अक्टूबर 2026 को एक औपचारिक प्रस्ताव पारित कर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के इस्तीफे की मांग करने वाले सोशल मीडिया बयानों की कड़ी भर्त्सना की। एसोसिएशन ने इन बयानों को न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा हमला और न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप का सुनियोजित प्रयास करार दिया है।
SCBA का प्रस्ताव — क्या कहा गया
एसोसिएशन की ओर से जारी प्रस्ताव में स्पष्ट शब्दों में कहा गया: 'सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन सोशल मीडिया पर प्रसारित उन बयानों की निंदा करता है, जिनमें भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश से इस्तीफे की मांग की जा रही है।' प्रस्ताव में जोड़ा गया कि हर व्यक्ति को कानून के अनुसार अदालतों का दरवाज़ा खटखटाने और उचित उपचार प्राप्त करने का वैध अधिकार है।
प्रस्ताव में कहा गया कि इस तरह के बयान न्यायपालिका की संस्था को कमज़ोर करते हैं। यह प्रस्ताव SCBA की मानद सचिव प्रज्ञा बघेल द्वारा 12 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से जारी किया गया।
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर CJI के इस्तीफे की मांग को लेकर पोस्टें प्रसारित हो रही थीं। यह मामला तब सामने आया जब विपक्षी 'इंडिया' ब्लॉक के नेताओं द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी।
रिपोर्टों के अनुसार, याचिका में तकनीकी खामियाँ पाए जाने के बाद रजिस्ट्री ने उसे सूचीबद्ध नहीं किया। इसके बाद से सोशल मीडिया पर न्यायपालिका को लक्ष्य करते हुए विभिन्न टिप्पणियाँ और माँगें सामने आने लगीं।
SCBA की स्थिति और वैध रास्ते का आह्वान
SCBA ने अपने प्रस्ताव में सभी सदस्यों और आम नागरिकों से सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा और मर्यादा बनाए रखने की अपील की। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यदि किसी को किसी न्यायिक फैसले या प्रक्रिया से आपत्ति है, तो उसके लिए कानून में वैध और स्थापित रास्ता उपलब्ध है।
एसोसिएशन का मानना है कि सार्वजनिक मंचों पर इस्तीफे की मांग न केवल अनुचित है, बल्कि यह न्यायिक स्वतंत्रता के मूल सिद्धांत के भी विरुद्ध है।
SCBA — संस्था का महत्व
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन देश की सबसे प्रतिष्ठित विधिक संस्थाओं में से एक है और सर्वोच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों का प्रतिनिधित्व करती है। इसके वर्तमान अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप कुमार राय हैं।
आगे क्या होगा
यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया के ज़रिए न्यायिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार की प्रवृत्ति पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो यह न्यायपालिका की स्वायत्तता और जनविश्वास दोनों के लिए दीर्घकालिक खतरा बन सकती है। SCBA के इस कदम से यह संकेत मिलता है कि विधिक बिरादरी सोशल मीडिया के ज़रिए न्यायिक दबाव की किसी भी कोशिश को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।