सुप्रीम कोर्ट में वादी के अभद्र व्यवहार पर एससीबीए की कड़ी निंदा, कोर्टरूम वीडियो रिकॉर्डिंग गाइडलाइन की माँग
सारांश
मुख्य बातें
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने 10 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही के दौरान एक वादी द्वारा किए गए कथित अपमानजनक और अभद्र आचरण की कड़ी निंदा की है। एसोसिएशन ने इसे न्यायपालिका की गरिमा और लोकतांत्रिक न्याय प्रणाली की पवित्रता के लिए गंभीर चुनौती करार दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
शुक्रवार को न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान एक पक्षकार का व्यवहार एससीबीए के अनुसार पूरी तरह अस्वीकार्य था। एसोसिएशन ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि अदालत की कार्यवाही के दौरान किसी भी प्रकार की गाली-गलौज, धमकी या व्यवधान न्यायिक प्रक्रिया पर सीधा प्रहार है और कानून के शासन को कमज़ोर करता है।
एससीबीए ने कहा कि न्यायालय की गरिमा और अनुशासन हर परिस्थिति में अक्षुण्ण रहने चाहिए तथा इस प्रकार के आचरण से कानून के अनुसार सख्ती से निपटा जाना आवश्यक है।
वीडियो रिकॉर्डिंग पर नई गाइडलाइन की माँग
इस घटना के बाद एससीबीए ने अदालत की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग, क्लिपिंग, एडिटिंग और सोशल मीडिया पर प्रसार को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार करने की माँग उठाई है। एसोसिएशन का कहना है कि वर्तमान में कोर्टरूम की कार्यवाही के संपादित अंश सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल होते हैं, जिससे तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है और न्यायपालिका की छवि प्रभावित होती है।
एसोसिएशन ने जोर देकर कहा कि ऐसी स्पष्ट व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिससे कोर्टरूम रिकॉर्डिंग का दुरुपयोग रोका जा सके। एससीबीए के अनुसार, अदालत की कार्यवाही को संदर्भ से हटाकर प्रसारित करने से आम जनता में भ्रम की स्थिति पैदा होती है और न्यायपालिका में लोगों का विश्वास डगमगा सकता है।
केंद्र सरकार से हस्तक्षेप का अनुरोध
एससीबीए ने केंद्र सरकार से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। एसोसिएशन ने माँग की है कि ऐसे वीडियो और संपादित क्लिप — जिनका उद्देश्य न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुँचाना या अदालतों के प्रति जनता का विश्वास कमज़ोर करना हो — उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाए जाएँ।
न्यायपालिका की गरिमा पर व्यापक चिंता
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब कोर्टरूम आचरण और न्यायिक कार्यवाही के सोशल मीडिया प्रसार को लेकर चिंता जताई गई हो। डिजिटल युग में अदालती सुनवाई की रिकॉर्डिंग की पहुँच बढ़ने के साथ ही उसके दुरुपयोग की आशंकाएँ भी बढ़ी हैं। एससीबीए का यह कदम ऐसे समय में आया है जब न्यायिक पारदर्शिता और संस्थागत गरिमा के बीच संतुलन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है।
एसोसिएशन ने अंत में दोहराया कि न्यायालय की कार्यवाही की पवित्रता बनाए रखना सभी पक्षों की सामूहिक ज़िम्मेदारी है और न्यायपालिका के सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। आने वाले दिनों में एससीबीए इस मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय प्रशासन और सरकार के साथ औपचारिक संवाद की दिशा में कदम उठा सकती है।