सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने निखिल वागले और संजय राउत के खिलाफ दायर की आपराधिक अवमानना याचिका
सारांश
मुख्य बातें
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने 15 अक्टूबर 2026 को पत्रकार निखिल वागले और शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में आपराधिक अवमानना याचिका दाखिल की। यह याचिका भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के प्रति की गई उनकी कथित टिप्पणियों पर आधारित है। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने इस याचिका पर कार्रवाई के लिए अपनी लिखित सहमति प्रदान कर दी है।
मामले की पृष्ठभूमि
पत्रकार निखिल वागले ने 11 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट की थी, जिसमें उन्होंने 'द हिंदू' की एक रिपोर्ट को उद्धृत करते हुए CJI के प्रति अत्यंत अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। वह रिपोर्ट इंडिया ब्लॉक के नेताओं द्वारा सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च से पूर्व CJI से मुलाकात की माँग को ठुकराए जाने के संदर्भ में थी।
12 अक्टूबर को राज्यसभा सांसद संजय राउत ने मीडिया से बातचीत में दावा किया था कि CJI सहित 60 से 70 न्यायाधीशों को लंदन में भाजपा नेताओं के साथ बैडमिंटन खेलते हुए देखा गया। यह दावा विवाद का केंद्र बन गया।
दिल्ली हाई कोर्ट का पूर्व आदेश और तथ्य-जाँच
SCBA की यह याचिका दिल्ली उच्च न्यायालय के 19 जून के एक महत्वपूर्ण आदेश पर भी आधारित है। उस आदेश में स्पष्ट रूप से पाया गया था कि बैडमिंटन खेलने से संबंधित जो तस्वीरें वायरल हुई थीं, वे लंदन की नहीं, बल्कि नई दिल्ली में नवंबर 2024 में आयोजित एक कार्यक्रम की थीं। इस न्यायिक निष्कर्ष के बावजूद राउत ने उक्त दावा किया, जिसे अटॉर्नी जनरल ने किसी भी तथ्यात्मक आधार से रहित बताया।
अटॉर्नी जनरल की प्रतिक्रिया
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अपने सहमति पत्र में वागले की पोस्ट को 'न केवल अपमानजनक, बल्कि अत्यंत निचले स्तर की' करार दिया। राउत के दावों को उन्होंने 'किसी भी तथ्य पर आधारित नहीं' बताया। एजी ने दोनों बयानों को 'प्रथम दृष्टया निंदनीय' घोषित करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय और CJI की गरिमा को ठेस पहुँचाना था।
वागले की माफी
कानूनी दबाव के बीच निखिल वागले ने विवादित पोस्ट को एक्स से हटा दिया है। 15 अक्टूबर को उन्होंने अटॉर्नी जनरल को एक पत्र लिखकर मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय से बिना शर्त माफी माँगी है। हालाँकि SCBA की याचिका अदालत में लंबित है और कार्यवाही आगे जारी रहेगी।
आगे क्या होगा
यह मामला अब सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचारार्थ है। अदालत की अवमानना कानून के तहत दोषी पाए जाने पर साधारण कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। गौरतलब है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और मीडिया की अभिव्यक्ति स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर यह मामला व्यापक सार्वजनिक बहस का केंद्र बन सकता है।