16 अक्टूबर 2026
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सुप्रीम कोर्ट ने संजय राउत और निखिल वागले को जारी किया नोटिस, न्यायपालिका पर टिप्पणी पड़ी भारी

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सुप्रीम कोर्ट ने संजय राउत और निखिल वागले को जारी किया नोटिस, न्यायपालिका पर टिप्पणी पड़ी भारी

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत और वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले को SCBA की याचिका पर नोटिस जारी किया — न्यायपालिका पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के चलते। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को निर्धारित है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 16 अक्टूबर 2026 को शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत और वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले को नोटिस जारी किया।
यह नोटिस SCBA अध्यक्ष प्रदीप कुमार राय द्वारा दाखिल याचिका के आधार पर जारी हुआ, जिसमें न्यायपालिका की गरिमा के विरुद्ध टिप्पणियों का आरोप है।
ट्विशा शर्मा के पिता की ओर से ट्रायल भोपाल से नई दिल्ली राउज एवेन्यू कोर्ट में ट्रांसफर के लिए अलग याचिका दाखिल की गई।
न्यायालय ने मामले में एक आदेश पारित किया, लेकिन प्रति न प्राप्त होने के कारण कार्यवाही टाली गई।
अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे निर्धारित है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 16 अक्टूबर 2026 को शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत और वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले को नोटिस जारी किया, जो सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष प्रदीप कुमार राय द्वारा दाखिल याचिका पर आधारित है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दोनों की टिप्पणियाँ न्यायपालिका की गरिमा के विरुद्ध थीं।

नोटिस की पृष्ठभूमि

SCBA अध्यक्ष प्रदीप कुमार राय ने कहा कि उन्हें यह याचिका बड़े अफसोस के साथ दाखिल करनी पड़ी। उनके अनुसार, संजय राउत और निखिल वागले दोनों समाज में जिम्मेदार पदों पर हैं, इसलिए उनकी टिप्पणियाँ और भी दुर्भाग्यपूर्ण हैं। राय ने कहा, "मैंने निखिल वागले के लेख कई बार पढ़े हैं और उनके काम को करीब से देखा है। उन दोनों की टिप्पणियाँ बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थीं। मेरा मानना है कि ऐसी बातों की कोई आवश्यकता नहीं थी — तथ्यों की जाँच होनी चाहिए थी और अपशब्दों से बचना चाहिए था।"

संस्थान की गरिमा पर जोर

राय ने न्यायिक संस्थाओं के प्रति सम्मान पर जोर देते हुए कहा कि जिस संस्थान में आप काम करते हैं, उसका सम्मान करना आपकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, "जिस संस्थान को पूरा देश मानता है, उसके साथ ऐसा व्यवहार उचित नहीं। एक संस्थान स्थायी होता है — लोग आते जाते रहते हैं, लेकिन संस्थान हमसे पहले भी था और हमारे बाद भी रहेगा।" राय ने सभी से अपील की कि वे टिप्पणी करने से पहले जिम्मेदारी से सोचें और न्यायिक संस्थाओं के खिलाफ बोलने से बचें।

ट्विशा शर्मा मामले में ट्रांसफर याचिका

इसी सुनवाई के दौरान, मरहूम ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा की ओर से वकील अभिजीत सिन्हा ने एक ट्रांसफर याचिका दाखिल करने की जानकारी दी। याचिका में भोपाल में चल रहे मुकदमे को मध्य प्रदेश से बाहर नई दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की गई है, क्योंकि पिता दिल्ली NCR क्षेत्र में रहते हैं। सिन्हा ने यह भी बताया कि आरोपी न्यायिक पृष्ठभूमि से है और वहाँ काफी प्रभावशाली है। न्यायालय के समक्ष एक सीलबंद लिफाफे में कुछ सामग्री भी जमा की गई है।

अगली सुनवाई की तारीख

अधिवक्ता जगत सिंह ने बताया कि आज मामले को स्थगित कर दिया गया और अब 26 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे सुनवाई होगी। सर्वोच्च न्यायालय ने एक आदेश पारित किया था, लेकिन उसकी प्रति अभी तक न्यायालय को प्राप्त नहीं हुई थी, जिसके चलते न्यायाधीश आगे की कार्रवाई से पहले आदेश की समीक्षा करना चाहते थे। गौरतलब है कि न्यायपालिका की आलोचना और अवमानना की सीमारेखा पर यह मामला भविष्य में महत्वपूर्ण मिसाल कायम कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इसका निर्धारण स्वयं न्यायपालिका द्वारा किया जाना एक अंतर्निहित हितों के टकराव को जन्म देता है। बिना स्पष्ट मानदंड के, ऐसी याचिकाएँ असहमति की आवाज़ों को दबाने का साधन बन सकती हैं।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने संजय राउत और निखिल वागले को नोटिस क्यों जारी किया?
सर्वोच्च न्यायालय ने SCBA अध्यक्ष प्रदीप कुमार राय की याचिका पर 16 अक्टूबर 2026 को यह नोटिस जारी किया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत और वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले ने न्यायपालिका की गरिमा के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कीं।
SCBA अध्यक्ष प्रदीप कुमार राय ने इस याचिका में क्या कहा?
राय ने कहा कि उन्हें यह याचिका बड़े अफसोस के साथ दाखिल करनी पड़ी क्योंकि दोनों जिम्मेदार पदों पर हैं। उनके अनुसार दोनों को तथ्यों की जाँच करनी चाहिए थी और अपशब्दों से बचना चाहिए था। राय ने न्यायिक संस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखने की अपील भी की।
मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
अधिवक्ता जगत सिंह के अनुसार, मामला 16 अक्टूबर को स्थगित कर दिया गया और अब 26 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे सुनवाई होगी। आदेश की प्रति न मिलने के कारण न्यायाधीश आगे की कार्रवाई से पहले उसे देखना चाहते थे।
ट्विशा शर्मा मामले से इसका क्या संबंध है?
इसी सुनवाई के दौरान ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा की ओर से एक ट्रांसफर याचिका भी चर्चा में आई, जिसमें भोपाल से चल रहे मुकदमे को नई दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की गई है। पिता दिल्ली NCR में रहते हैं और आरोपी न्यायिक पृष्ठभूमि से बताया जाता है।
क्या न्यायपालिका की आलोचना करना कानूनी अपराध है?
न्यायपालिका की आलोचना और न्यायिक अवमानना के बीच की रेखा बारीक है। न्यायालय की अवमानना अधिनियम के तहत ऐसी टिप्पणियाँ जो न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करें या न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुँचाएँ, कार्यवाही योग्य हो सकती हैं। इस मामले में नोटिस की सीमा और नतीजा 26 अक्टूबर की सुनवाई के बाद स्पष्ट होगा।
राष्ट्र प्रेस
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