संजय राउत ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया माफीनामा, 17 नवंबर को व्यक्तिगत पेशी का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने न्यायपालिका के विरुद्ध दिए गए अपने बयानों के मामले में अवमानना नोटिस मिलने के बाद सर्वोच्च न्यायालय में एक हलफनामा दाखिल कर भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी माँगी है। इसके बावजूद, यह हलफनामा अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं था और बुधवार को उनकी ओर से कोई वकील भी उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें 17 नवंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।
हलफनामे में क्या कहा राउत ने
हलफनामे में संजय राउत ने लिखा कि वे इस अदालत की गरिमा, स्वतंत्रता और अधिकार को बनाए रखने के महत्व को पूरी तरह समझते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका किसी भी रूप में इस माननीय अदालत के प्रति अनादर दिखाने या न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था।
अपने हलफनामे में उन्होंने कहा, 'मैं इस न्यायालय और भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष, अपने उन बयानों के लिए पूरी ईमानदारी से और बिना किसी शर्त के माफी माँगता हूँ, जो बिना पुष्टि के दिए गए थे, जिनमें पर्याप्त सावधानी नहीं बरती गई थी, या जिनसे न्यायपालिका पर अनुचित लांछन लगने की संभावना थी। मेरा उद्देश्य इस माननीय न्यायालय की छवि खराब करना, इसके अधिकार को कम करना, किसी माननीय न्यायाधीश की स्वतंत्रता या निष्पक्षता पर सवाल उठाना, या न्याय प्रशासन में बाधा डालना बिल्कुल नहीं था।'
भविष्य के लिए दिया आश्वासन
राउत ने हलफनामे में यह भी वचन दिया कि वे आगे से न्यायपालिका से जुड़े किसी भी सार्वजनिक बयान में उचित संयम और सावधानी बरतेंगे। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों के आचरण के बारे में कोई भी तथ्यात्मक टिप्पणी करने से पहले उसकी पूरी तरह पुष्टि करेंगे।
अदालत का रुख और 17 नवंबर की सुनवाई
गौरतलब है कि बुधवार, 29 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान यह माफीनामा अदालत के रिकॉर्ड में नहीं था और राउत का कोई प्रतिनिधि भी उपस्थित नहीं था। इसे देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें 17 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। उस तारीख को अदालत इस माफीनामे पर विचार कर अपना निर्णय सुनाएगी।
यह ऐसे समय में आया है जब राजनेताओं द्वारा न्यायपालिका पर की जाने वाली सार्वजनिक टिप्पणियों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय अपने अधिकार-क्षेत्र के प्रति विशेष रूप से सतर्क दिख रहा है। यह राउत के राजनीतिक करियर में एक संवेदनशील मोड़ है, जो अपनी तीखी और बेबाक टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं।
क्या होगा आगे
17 नवंबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय यह तय करेगा कि राउत का हलफनामा अवमानना कार्यवाही को समाप्त करने के लिए पर्याप्त है या नहीं। यदि अदालत माफी को स्वीकार करती है तो मामला बंद हो सकता है; अन्यथा कार्यवाही आगे बढ़ सकती है।