शिवराज सिंह चौहान का इंडी गठबंधन पर हमला: 'सेव डेमोक्रेसी नहीं, सेव डायनेस्टी मार्च है'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और विपक्षी इंडी गठबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी पराजयों के बाद जनता को उम्मीद थी कि कांग्रेस आत्मचिंतन करेगी और अपनी भूलें स्वीकार करेगी, लेकिन पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सुधार की राह नहीं पकड़ेगी।
कांग्रेस नेतृत्व पर सीधा निशाना
चौहान ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को चाहिए था कि वे अपनी जिम्मेदारी स्वीकार कर जनता से माफी माँगते। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बजाय दोनों नेता कथित तौर पर भ्रम फैला रहे हैं, झूठे दावे कर रहे हैं और बेबुनियाद आरोपों की राजनीति अपना रहे हैं।
चौहान ने कांग्रेस की कार्यसमिति बैठक का हवाला देते हुए कहा कि राहुल गांधी खुद अपनी पार्टी के नेताओं से भरोसा और विश्वास माँग रहे थे। उन्होंने व्यंग्य किया, 'इसका सीधा मतलब है कि कांग्रेस को ही राहुल गांधी पर भरोसा नहीं है।'
'सेव डायनेस्टी मार्च' पर कटाक्ष
कांग्रेस द्वारा 2 से 8 अक्टूबर तक प्रस्तावित मार्च को लेकर चौहान ने सीधे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इसे 'सेव डेमोक्रेसी' मार्च का नाम दे रही है, जबकि असल में यह 'सेव डायनेस्टी' मार्च है। उनका कहना था कि देश की जनता वंशवादी राजनीति को अस्वीकार कर चुकी है।
चौहान ने यह भी कहा कि चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस अपनी संगठनात्मक कमजोरियों पर ध्यान देने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगती है। उन्होंने इसे संस्थाओं के राजनीतिकरण की कोशिश करार दिया।
इंडी गठबंधन की बैठक: 'शून्य विजन, 100% हताशा'
बुधवार को हुई इंडी गठबंधन की बैठक पर चौहान ने कहा कि बैठक होने से पहले ही गठबंधन बिखरा नज़र आ रहा था। उन्होंने रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य से समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव बैठक में नहीं पहुँचे। उन्होंने सवाल किया कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन कहाँ थे।
चौहान ने दावा किया कि DMK की ओर से यह तक कहा गया है कि जहाँ कांग्रेस रहेगी, वहाँ वे बैठना भी पसंद नहीं करेंगे। इसके अलावा उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल की अनुपस्थिति और तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता उद्धव ठाकरे के केवल वर्चुअली जुड़ने का उल्लेख किया। उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति को लेकर भी सवाल खड़े किए।
बैठक के नतीजे को लेकर चौहान ने कहा, 'इंडी गठबंधन की बैठक का नतीजा क्या निकला? शून्य विजन, 100 प्रतिशत हताशा और हार का एडवांस बहाना।'
मतदाता सूची संशोधन पर BJP का रुख
चौहान ने मतदाता सूचियों के संशोधन के मुद्दे पर कहा कि डुप्लीकेट वोट और गैर-नागरिकों के नाम सूची से हटाए जाने चाहिए। उनका कहना था कि मतदाता सूची को सवाल उठाने से पहले इंडी गठबंधन को अपनी आंतरिक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
आगे की राजनीतिक तस्वीर
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में चुनावी बिगुल बजने की तैयारी है और विपक्षी एकजुटता की परीक्षा होनी है। चौहान ने कहा कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन आने वाले चुनावों में अपनी संभावित हार के लिए पहले से बहाने तैयार कर रहे हैं। BJP का यह आक्रामक रुख आगामी चुनावी मौसम में सत्तापक्ष की रणनीति का संकेत देता है।