INDIA गठबंधन की बैठक से पहले शिवराज का हमला: 'राहुल गांधी को नेता मानने को कोई तैयार नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार, 30 सितंबर को नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए विपक्षी 'INDIA' गठबंधन पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने दावा किया कि गठबंधन की बैठक शुरू होने से पहले ही उसमें दरारें साफ नज़र आ रही हैं और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को गठबंधन के भीतर नेता के रूप में स्वीकार्यता नहीं मिल पा रही।
गठबंधन में अनुपस्थिति पर चौहान के आरोप
चौहान ने कहा, 'बैठक शुरू होने से पहले ही 'इंडी' गठबंधन बिखर गया। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) बैठक में शामिल नहीं हो रही है। अखिलेश यादव कहीं और व्यस्त हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) ने पहले ही मना कर दिया था। उद्धव ठाकरे व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि वर्चुअली शामिल होंगे।' उन्होंने आगे कहा कि यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि गठबंधन के घटक दल राहुल गांधी को अपना नेता स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
चौहान ने यह भी तर्क दिया कि जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के भीतर भी राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता को पूरी तरह स्वीकृति नहीं मिली है, तो देश उन्हें प्रधान नेता के रूप में कैसे स्वीकार करेगा। यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा है जो विपक्षी एकता में亀 विभाजन को उजागर करने पर केंद्रित है।
वोटर लिस्ट विवाद पर पलटवार
चौहान ने वोटर सूची की शुद्धता के मुद्दे पर भी विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा, 'एक साफ-सुथरी वोटर लिस्ट लोकतंत्र की आत्मा होती है। अगर गलत नाम जोड़े जाते हैं, तो लोकतंत्र ही खतरे में पड़ जाता है। जो लोग अब जीवित नहीं हैं, उनके नाम हटाने पर क्या आपत्ति हो सकती है?' उनका यह बयान उस समय आया है जब विपक्षी दल वोटर सूची में कथित गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोप लगा रहे हैं।
गौरतलब है कि विपक्ष ने हाल के हफ्तों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को वोटर लिस्ट विवाद के केंद्र में रखते हुए आरोप लगाए हैं। चौहान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष चुनावी हार की जिम्मेदारी लेने के बजाय बहाने ढूंढता है।
उत्तर प्रदेश के चुनाव नतीजों का हवाला
चौहान ने उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणामों का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि वोट चोरी होती, तो समाजवादी पार्टी को 37 सीटें नहीं मिलतीं। उन्होंने तर्क दिया कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग चुनाव परिणाम यह साबित करते हैं कि मतदाता स्वतंत्र रूप से अपना फैसला सुनाते हैं। उनके अनुसार, 'सच तो यह है कि लोगों ने ऐसे लोगों को वोट देना बंद कर दिया है।'
विपक्षी एकता की परीक्षा
यह ऐसे समय में आया है जब INDIA गठबंधन अपनी आंतरिक एकजुटता को लेकर पहले से ही सवालों के घेरे में है। AAP और कांग्रेस के बीच दिल्ली में पहले से तनाव है, जबकि TMC और कांग्रेस के बीच भी रणनीतिक मतभेद सार्वजनिक हो चुके हैं। चौहान का बयान इन्हीं दरारों को राष्ट्रीय विमर्श में केंद्र में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
आगे क्या
INDIA गठबंधन की बैठक के बाद विपक्ष की एकजुटता और साझा एजेंडे पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। हालाँकि, प्रमुख घटक दलों की अनुपस्थिति या वर्चुअल भागीदारी गठबंधन की व्यावहारिक ताकत पर सवाल खड़े करती है। भाजपा इस अवसर का पूरा राजनीतिक लाभ उठाने की स्थिति में है।