कांग्रेस की जमीन खिसकी, श्रुति चौधरी बोलीं — 'फौज ही नहीं तो लड़ाई कैसे लड़ेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा की कैबिनेट मंत्री श्रुति चौधरी ने 11 अक्टूबर 2026 को विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपने ही जमीनी नेताओं को पार्टी से बाहर कर दिया है और अब उसके पास आम जनता से जुड़ने वाला कोई आधार नहीं बचा। यह बयान तब आया जब कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों पर सियासी बयानबाजी पूरे देश में तेज हो गई है।
श्रुति चौधरी का विपक्ष पर हमला
श्रुति चौधरी ने कहा, 'विपक्ष जो कर रहा है, उन्हें शोभा नहीं देता, क्योंकि ये जमीन पर कहीं भी नहीं दिखते।' उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए बताया कि वे पहले कांग्रेस में थीं और 2014 तथा 2019 के चुनाव उसी पार्टी से लड़ीं। उन्होंने कहा कि पोलिंग के दिन भी लोग भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए मतदान करते दिखे और जनता के बीच BJP के प्रति स्पष्ट उत्साह था।
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ने न केवल हरियाणा में, बल्कि देशभर में अपने इलाकाई और जमीनी स्तर के नेताओं को किनारे कर दिया है। उनके शब्दों में, 'पार्टी में कुछ बचा ही नहीं है — जब फौज ही नहीं है, तो लड़ाई कैसे लड़ेंगे?'
चुनाव आयुक्त पर कांग्रेस के आरोप
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (OPCC) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर वोट चोरी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की। दास ने कहा, 'जब सरकार घमंड और सत्ता के नशे में चूर हो जाती है, तो वह गलत कामों, अन्याय और भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश करती है।' उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार इन आरोपों के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त को क्यों बचा रही है।
जंतर-मंतर वीडियो विवाद पर नेहा सिंह राठौर
जंतर-मंतर पर एक लड़की के साथ कथित दुर्व्यवहार के वायरल वीडियो पर लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'जब बेटियां पढ़-लिखकर प्रोटेस्ट में हिस्सा लेती हैं, अपने हक के लिए आवाज उठाती हैं और सवाल करने लगती हैं, तो उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा जाता है।' उन्होंने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे नारों को इस संदर्भ में 'शर्म की बात' करार दिया।
राहुल गांधी पर BJP-शिवसेना का पलटवार
शिवसेना के प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर लोकतंत्र को बदनाम करने का आरोप लगाया। उन्होंने तर्क दिया कि अगर सच में लोकतंत्र खतरे में होता, तो राहुल गांधी के सरकार विरोधी भाषण न तो टीवी पर दिखाए जाते, न अखबारों में छपते और न ही सोशल मीडिया पर वायरल होते।
उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि कांग्रेस की शीर्ष नेतृत्व की सोच अब पूरी तरह नफरत से भर गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक जैसे कड़े फैसले लिए, कांग्रेस ने सेना पर सवाल उठाए। आर्या ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है और दुनिया में उसका प्रभाव बढ़ा है, फिर भी राहुल गांधी निजी विरोध में पूरे देश की छवि खराब करने पर उतारू हैं।
सियासी माहौल और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों के कई नेता विरोध-प्रदर्शनों में सक्रिय भागीदारी और सरकार की कार्यशैली को लेकर आमने-सामने हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस और सत्तारूढ़ दलों के बीच संगठनात्मक मजबूती को लेकर यह बहस नई नहीं है, लेकिन जमीनी नेतृत्व की अनुपस्थिति का मुद्दा अब केंद्रीय बन चुका है। आने वाले दिनों में इन बयानों का असर राजनीतिक माहौल और चुनावी रणनीतियों पर पड़ना तय माना जा रहा है।