शुभ्रा सक्सेना की पुस्तक 'इट मैटर्स अ लॉट' लॉन्च, दलाई लामा ने लिखी प्रस्तावना
सारांश
मुख्य बातें
लेखिका शुभ्रा सक्सेना की नई पुस्तक 'इट मैटर्स अ लॉट' 16 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आधिकारिक रूप से लॉन्च हुई। यह पुस्तक पाठकों को जीवन के वास्तविक अर्थ और सचेत जीवन जीने की दिशा में आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती है। इसकी विशेषता यह है कि इसकी प्रस्तावना परम पावन दलाई लामा ने लिखी है, जो पुस्तक की विषयवस्तु को एक आध्यात्मिक आयाम प्रदान करती है।
पुस्तक की विषयवस्तु और संरचना
लेखिका शुभ्रा सक्सेना ने दिल्ली में आयोजित विमोचन कार्यक्रम में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'आज के समय में, खासकर युवाओं का जीवन लगातार मिलने वाली उत्तेजनाओं और सूचनाओं से भरा हुआ है। ऐसे में सही और गलत के बीच अंतर समझने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती जा रही है।' उन्होंने बताया कि इस पुस्तक में प्रत्येक अध्याय के अंत में तीन-चार प्रश्न दिए गए हैं और उनके बाद एक खाली पृष्ठ है, जिसमें पाठक स्वयं अपने उत्तर लिख सकते हैं।
सक्सेना के अनुसार पुस्तक की यह संरचना सुविचारित है — यह महज पठन सामग्री नहीं, बल्कि एक इंटरैक्टिव चिंतन-यात्रा है, जो पाठक को अपने भीतर झाँकने का अवसर देती है।
बचपन के सवाल से उपजी किताब
लेखिका ने बताया कि इस पुस्तक का बीज उनके बचपन में ही पड़ गया था। उन्होंने कहा, 'मैं छह साल की थी। मैं अपना होमवर्क कर रही थी। मेरी माँ दोपहर का खाना बना रही थीं और एक कमरे से दूसरे कमरे में आ-जा रही थीं और अचानक मेरे मन में यह खयाल आया — हम क्या कर रहे हैं और हम यह सब क्यों कर रहे हैं? अगर हमारा अस्तित्व है, तो हमारा अस्तित्व क्यों है?' यह अस्तित्ववादी जिज्ञासा दशकों बाद इस पुस्तक के रूप में मूर्त रूप ले सकी।
दलाई लामा से जुड़ाव
शुभ्रा सक्सेना ने परम पावन दलाई लामा से हालिया मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा, 'इस किताब की प्रस्तावना लिखकर एक तरह से उन्होंने आशीर्वाद दिया है। किताब में जो बातें की गई हैं, वह उनकी शिक्षा से काफी मिलती-जुलती हैं। मनुष्य जीवन में दया भावना होनी चाहिए।' गौरतलब है कि दलाई लामा की शिक्षाओं का केंद्रबिंदु करुणा और आत्म-जागरूकता रहा है, और इस पुस्तक की विषयवस्तु उसी दर्शन का विस्तार प्रतीत होती है।
साहित्यिक हलकों की प्रतिक्रिया
विमोचन कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ लेखक गुरचरण दास ने पुस्तक पर अपनी राय साझा करते हुए कहा, 'यह ऊपर से कुछ और ही लगती है। ऐसा लगता है जैसे यह कोई सेल्फ-हेल्प किताब हो, लेकिन इसकी गहराई में बहुत ही गंभीर और गहरी सोच छिपी है और हर अध्याय के साथ इसने मेरे दिमाग में कोई न कोई नया विचार जगा दिया।' यह टिप्पणी पुस्तक को सतही आत्म-सहायता साहित्य से अलग करती है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब मानसिक स्वास्थ्य, जीवन के उद्देश्य और आत्मचिंतन को लेकर भारतीय पाठक वर्ग में रुचि उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। 'इट मैटर्स अ लॉट' अपनी इंटरैक्टिव संरचना और दलाई लामा की प्रस्तावना के साथ इस विमर्श में एक नई आवाज़ जोड़ती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह पुस्तक व्यापक हिंदी और अंग्रेज़ी पाठक वर्ग तक किस हद तक पहुँचती है।